महज 4 साल की उम्र में अपनी आवाज के जादू से सब को अपना दीवाना बनाने वाले आदित्य नारायण ने वे सबकुछ पा लिया, जो एक कलाकार वर्षों की मेहनत के बाद हासिल कर पाता है. पिता उदित नारायण और मां दीपा नारायण के सान्निध्य में संगीत सीखने वाले आदित्य ने सिंगिंग के साथसाथ अभिनय में भी अपना जौहर दिखाया. 4 साल की उम्र से आज तक कई गीतों को अपनी आवाज दे चुके आदित्य जीटीवी के रिएलिटी शो ‘सारेगामापा’ के नए सीजन के होस्ट हैं. एक कार्यक्रम के दौरान आदित्य ने अपने संगीत के सफर के अनुभवों और भविष्य के तानेबाने को ले कर बात की, पेश हैं, बातचीत के कुछ चुनिंदा अंश :

एक अभिनेता के तौर पर पहली फिल्म ‘श्रापित’ के बाद अब तक आप की कोई फिल्म नहीं आई, ऐक्टिंग छोड़ दी या फिर फिल्में नहीं मिल रही हैं?

फिल्मों में तो ऐंट्री मैं ने 1995 में फिल्म ‘रंगीला’ से कर ली थी, पर उस समय मैं छोटा बच्चा था. जब ‘श्रापित’ में अभिनय के लिए कहा गया तब भी मैं ज्यादा बड़ा नहीं था, इस फिल्म में काम करने के बाद मैं कन्फ्यूज हो गया कि क्या करूं. ऐक्टिंग में अपना कैरियर बनाऊं या सिंगिंग को अपनाऊं, क्योंकि तब तक मैं सफलता के सारे स्वाद चख चुका था. ‘श्रापित’ फिल्म रिलीज होने के बाद मेरे पास कई फिल्मों के औफर आए जो सारे एक ही कैरेक्टर जैसे थे. तभी घर वालों ने कहा कि तू अगर अभी से इन फिल्मों के चक्कर में पड़ जाएगा तो टाइपकास्ट बन कर रह जाएगा और तेरी पहचान वह नहीं होगी जो तू चाहता है. मैं भी जानता था कि इतनी छोटी उम्र में अगर बिना किसी तैयारी के फिल्मों के चक्कर में पड़ जाऊंगा तो आगे नहीं टिक पाऊंगा, इसलिए फिल्मों से एक मूवी के बाद ब्रेक ले लिया.

अभी क्या डिसाइड किया है, ऐक्टिंग या सिंगिंग?

मुझे दोनों करने हैं. सिंगिंग के साथसाथ ऐक्टिंग मैं बचपन से करता आ रहा हूं. फिल्म ‘रंगीला’, ‘अकेले हम अकेले तुम’ और ‘परदेश’ सभी फिल्मों में मैं ने गाने गाए और ऐक्टिंग भी की है. देखिए, फिल्म ‘रामलीला’ के लिए मैं संजय सर के पास असिस्टैंट डायरैक्टर बनने गया था, पर वहां मुझे 2 गाने मिल गए, इस का मतलब मैं हर तरह का काम करने को तैयार रहता हूं.

फिल्मों में चाइल्ड ऐक्टर के बाद ऐंकरिंग में कैसे आ गए?

इस की भी एक कहानी है. फिल्मों में सिंगिंग मैं ने छोटी उम्र से ही शुरू कर दी थी. किसी ने बताया कि टीवी पर एक म्यूजिक का रिएलिटी शो शुरू होने वाला है. उस में होस्ट के लिए शो के निर्देशक मुझे अप्रोच करने वाले हैं. संगीत आधारित शो होने के कारण मैं ने हां कर दी कि चलो, कैमरे के सामने तो आने को मिलेगा. पर यह शो इतना सक्सैस होगा मैं ने कभी सोचा भी नहीं था. एक प्रस्तोता के रूप में मुझे लोगों का बहुत प्यार मिला. तब से ले कर आज तक इसी तरह का प्यार मिलता गया और आज में ‘सारेगामापा’ को 5वीं बार होस्ट कर रहा हूं.

‘सारेगामापा’ के पहले शो की अपेक्षा यह किस तरह अलग है?

यह सीजन पिछले सीजन से बिलकुल अलग है. इस में कई सारे बदलाव किए गए हैं. जज पैनल में मीका, साजिदवाजिद, प्रीतम के साथ 40 लोगों का स्पैशल जूरी पैनल है, जिस में संगीत, कला, मीडिया, बिजनैस से जुड़े लोग शामिल हैं, जो हर प्रतियोगी को अपने कौशल की कसौटी पर तराशते हैं. इस बार औडिशन पर भी बहुत खर्च किया गया. करीब 17 शहरों में जा कर 500 लोगों में से सुपर 100 को चुनना और 100 में से सुपर 12 का चयन करना बड़ी टेढ़ी खीर है. औडिशन के दौरान तो हम लोगों ने 12 से 14 घंटे लगातार काम किया है. हमारा उद्देश्य दुनिया को सर्वश्रेष्ठ गायक देना है.

इस तरह के शो क्या वाकई एक स्ट्रगलर को प्लेटफौर्म देते हैं?

इंडस्ट्री में जितने भी नए गायकों पर आप नजर डालें, तो आप पाएंगे कि उन की शुरुआत ही रिएलिटी शो के माध्यम से हुई है. उन्हें आम से खास बना कर लोगों से उन की कला को परिचित कराने का माध्यम ये रिएलिटी शो ही हैं. श्रेया घोषाल से ले कर कुणाल गांजेवाला तक सभी को इन शोज की ही बदौलत प्रसिद्धि मिली है. छोटे शहरों के कलाकार भी देश ही नहीं दुनिया में अपनी पहचान बनाने का काम इन शोज के जरिए बखूबी कर रहे हैं.

छोटे परदे पर आ रहे डेली सोप करने का मन हुआ कभी?

सही बताऊं तो मेरी इच्छा कभी नहीं रही कि मैं टीवी पर ऐक्टिंग करूं, क्योंकि टीवी पर किसी शो को होस्ट करना और ऐक्टिंग करने में जमीनआसमान का अंतर है, और डेली सोप में ऐक्टिंग करने का मतलब है आप के पास पर्याप्त समय का होना और वह मेरे पास नहीं है, क्योंकि अगर यहां समय दूंगा तो संगीत के लिए समय नहीं निकाल पाऊंगा. संगीत तो मेरी नसनस में बसा हुआ है. इस से मैं दूर हो ही नहीं सकता.

म्यूजिक इंडस्ट्री में कंपीटिशन कितना बढ़ा है?

देखिए, हर क्षेत्र की तरह इस क्षेत्र में भी कंपीटिशन बढ़ा है, जो अच्छा है, क्योंकि जब प्रतियोगिता होगी तभी तो अच्छा परिणाम सामने आएगा. पहले तो गिनेचुने गायक ही होते थे पर अब कई रिएलिटी शोज के माध्यम से गायकों की संख्या बढ़ी है, जो हर विधा का संगीत जानते हैं. आज के संगीत में बहुत विविधता है. शास्त्रीय संगीत के साथ वैस्टर्न संगीत भी खूब पौपुलर हो रहा है, लेकिन एक ट्रैंड बहुत खराब चल गया है कि यदि आप को काम चाहिए तो किसी कंपनी के साथ करार करना होगा और एक कौन्ट्रैक्ट साइन कर के देना होगा तभी आप को काम मिलेगा. अगर उस कंपनी के अलावा कहीं दूसरी जगह आप गाना गाते हैं तो अपने मेहनताने से निश्चित परसैंटेज देना होगा. अब आप ही बताएं काम मैं करूं और परसैंटेज दूसरे को दूं. यह बात मेरी समझ से बाहर है. आजकल एक ही फिल्म में कईकई गायकों से गाना गंवाना और कई संगीतकार रखने का ट्रैंड चल पड़ा है जो मुझे पसंद नहीं आता. इस में किसी को भी फिल्म के संगीत का श्रेय नहीं मिल पाता सारी शोहरत और पैसा कंपनी के हाथोंमें चला जाता है.

आप ने भी ऐसा कोई कौंट्रैक्ट साइन किया है क्या?

बिलकुल नहीं और न ही कभी करूंगा, क्योंकि मेरे हालात ऐसे नहीं कि खर्च चलाने के लिए काम मिलता रहे. मैं संगीत को बेचता नहीं हूं उस की साधना करता हूं. मैं कभी नहीं चाहूंगा कि किसी भी शो के लिए मिले पैसों से किसी दूसरे के साथ हिस्सा बांटूं, क्योंकि मेहनत मैं करता हूं तो पूरे पैसों पर भी मेरा ही हक बनता है.

तकनीकी गायकों की गायकी अच्छी है या खराब?

आज सारा संगीत तकनीक में बंध चुका है. म्यूजिकल इंस्ट्रूमैंट से ले कर सिंगर की आवाज तक सभी तकनीकसे बंधे हैं. आज सभी अच्छे संगीतकार तकनीक का उपयोग कर के संगीत में नए प्रयोग कर रहे हैं. गायकी में भी यही बात लागू होती है, मैं तो कहूंगा आज की तकनीक ने संगीत और गायन को निखारने में मदद की है.