‘बिग बौस सीजन 7’ में आने के बाद काम्या अपने फैंस के और भी करीब आ गईं. इन दिनों धारावाहिक ‘शक्ति अस्तित्व के एहसास की’ में प्रीतों का किरदार निभा रहीं काम्या ‘कौमेडी सर्कस’, ‘कौमेडी नाइट्स बचाओ’ जैसे कौमेडी शोज में स्टैंडअप कौमेडी भी कर चुकी हैं, तो ‘बौक्स क्रिकेट लीग’ और ‘बौक्स क्रिकेट लीग 2’ का हिस्सा बन कर क्रिकेट के प्रति अपनी दीवानगी भी बयां कर चुकी हैं. आइए, काम्या के निजी जीवन को टटोलते हैं:

आप ने अपनी लाइफ में कई अप्स ऐंड डाउन देखे हैं. उन से कैसे निबटती हैं?

मैं बेबाक हूं, बिंदास हूं, किसी से नहीं डरती. शायद इसीलिए परेशानियों से निबट लेती हूं. दूसरा सच यह भी है कि मैं ने ये चीजें अपनी मां से सीखी हैं. जब हम छोटे थे तब हमारे घर में भी बहुत परेशानियां थीं, लेकिन मेरी मां बहुत अच्छे तरीके से उन से निबटती थीं. वे हार नहीं मानती थीं, कभी डरती नहीं थीं. उन्होंने कभी गिवअप नहीं किया. मैं ने भी कभी गिवअप नहीं किया और न ही कभी करूंगी. मेरी मां आज भी मेरे जीवन में पिलर की तरह हैं. मैं चाहती हूं कि मैं भी उन की तरह अच्छी मां बनूं.

अपनी बेटी की परवरिश के वक्त किन बातों को ध्यान में रखती हैं?

ब एक मां अपने बच्चे की परवरिश करती है, तो सिर्फ उस की खुशी का ध्यान रखती है, उस की सिक्योरिटी और कंफर्ट का खयाल रखती है. वह उसे दुनिया की सारी खुशियां देना चाहती है और दुनिया की बुराई से हमेशा दूर रखना चाहती है. मैं भी यही चाहती हूं. मुझे खुशी है कि मैं अपनी बेटी की अच्छी दोस्त हूं. वह मुझ से अपनी सारी बातें शेयर करती है, लेकिन मैं उस की अच्छी दोस्त नहीं बन पाई हूं और आने वाले 10 साल बनना भी नहीं चाहती. हां, जब वह बड़ी हो जाएगी तो जरूर बनना चाहूंगी. मैं अभी दोस्त बन कर उसे यह नहीं पता चलने देना चाहती कि उस की मां किन हालात से गुजरी है और आज यहां कैसे खड़ी है. मेरी बेटी मेरी पूंजी है. वह मेरी ताकत भी है और कमजोरी भी.

घर के साथ काम को कैसे मैनेज करती हैं?

अगर हम इस बात को बहुत बड़ा समझें कि मैं घर भी संभाल रही हूं बाहर काम भी कर रही हूं, मैं सुपर वूमन हूं तो बेशक आप को यह काम बहुत बड़ा लगेगा, लेकिन असल में दोनों काम एकसाथ करना मुश्किल नहीं है. बस टाइम मैनेजमैंट आना चाहिए.

बतौर सिंगल मदर बेटी की परवरिश कितनी चैलेंजिंग लगती है?

मैं अपनी बेटी को अच्छी परवरिश दे रही हूं, अच्छे स्कूल में पढ़ा रही हूं. वह सब कर रही हूं, जो पेरैंट्स अपने बच्चे के लिए करते हैं. मैं बतौर सिंगल मदर कभी कमजोर नहीं पड़ती सिवा उस समय जब मेरी बेटी मासूम से सवाल करती है जैसे मेरे फ्रैंड के पापा उन के साथ रहते हैं, तो मेरे क्यों नहीं? उस के ऐसे सवाल मेरे लिए चैलेंजिंग होते हैं. वह इसलिए क्योंकि मैं झूठ नहीं बोलती और उसे सच अभी नहीं बताना चाहती.

अपनी पर्सनल और प्रोफैशनल लाइफ में ज्यादा अहमियत किसे देती हैं?

प्रोफैशनल लाइफ को, क्योंकि मेरा काम मेरा जनून है, मेरी खुशी है. मैं ने जिंदगी के हर मोड़ पर परेशानियां झेली हैं, लेकिन मैं ने काम करना कभी नहीं छोड़ा.

एक पुरुष के लिए दूसरी शादी करना आसान है, लेकिन महिला के लिए क्यों नहीं?

एक औरत पुरुष को दिलोजान से अपनाती है. वह यह कैलकुलेट नहीं करती कि इस की बीवी है या इस का बच्चा है, लेकिन एक पुरुष तलाकशुदा महिला को अपनाते वक्त यह सब कुछ सोचता है. वह ऐसी औरत चाहता है जिस के साथ किसी दूसरे पुरुष का नाम न जुड़ा हो, फिर भले उस की वह तीसरी शादी हो या उस का नाम 10 औरतों के संग जुड़ा हो. इस की वजह यह है कि औरत मन से प्यार करती है और पुरुष दिलोदिमाग से.