बौलीवुड में अभिनेत्री के तौर पर जो मुकाम, जो सुपर स्टारडम श्रीदेवी को मिला है वह किसी अन्य अभिनेत्री को नहीं मिल पाया. सर्वाधिक अवार्ड भी उन्हीं की झोली में गए. अभिनय करते हुए उन्होंने 50 वर्ष पूरे कर लिए हैं. उन के कैरियर की 300वीं फिल्म ‘मौम’ 7 जुलाई को रिलीज होगी. श्रीदेवी ने इस मिथ को भी तोड़ा है कि शादी के बाद हीरोइन का कैरियर खत्म हो जाता है. 2 बेटियों की मां बनने के कारण पूरे 15 वर्ष तक अभिनय से दूर रहने के बाद जब गौरी शिंदे के निर्देशन में बनी फिल्म ‘इंग्लिशविंग्लिश’ से उन्होंने अभिनय में वापसी की, तो उम्मीद से कहीं अधिक उन्हें और उन की इस फिल्म को पसंद किया गया. फिर उन्होंने तमिल फिल्म ‘पुली’ की और फिर हिंदी फिल्म ‘मौम’ जिसे तमिल, मलयालम व तेलुगू में डब किया गया है.

हाल ही में श्रीदेवी से हुई बातचीत के कुछ खास अंश:

पिछली फिल्म ‘इंग्लिशविंग्लिश’ को जबरदस्त सफलता मिली. उस के 4 वर्ष बाद ‘मौम’ आ रही है?

शादी और बच्चों के होने के बाद ‘इंग्लिशविंग्लिश’ करने में मुझे 15 साल का वक्त लगा. पर इस के बाद ‘मौम’ करने में 4 वर्ष लगे. एक तरह से यह इंप्रूवमैंट है. वैसे मैं ने ‘इंग्लिशविंग्लिश’ और ‘मौम’ के बीच एक तमिल फिल्म ‘पुली’ भी की थी. ऐसा नहीं है कि मेरे पास फिल्मों के औफर नहीं आए हैं. ‘इंग्लिशविंग्लिश’ से पहले भी मेरे पास फिल्मों के औफर आ रहे थे. ‘इंग्लिशविंग्लिश’ और ‘मौम’ के बीच भी कई दूसरी फिल्मों के औफर आए. लेकिन मैं फिल्में सिर्फ संख्या बढ़ाने के लिए नहीं करना चाहती. मैं ने हमेशा उन फिल्मों का हिस्सा बनना पसंद किया, जो मुझे पसंद आईं. यदि घरपरिवार को छोड़ कर स्टूडियों में जा कर काम करना है, तो कुछ तो अर्थपूर्ण काम होना चाहिए. फिल्म में ऐसी कोई बात जरूर होनी चाहिए, जो मुझे इतना प्रेरित करें कि मैं घरपरिवार से कुछ समय के लिए निकल कर स्टूडियो में जा कर काम करूं.

300वीं फिल्म के रूप में ‘मौम’ को चुनने की खास वजह?

मैं ने यह फिल्म किसी योजना के तहत नहीं की. अब तक मेरी जिंदगी या कैरियर में जो कुछ होता रहा है वह किसी योजना के तहत नहीं, बल्कि डैस्टिनी के चलते होता आ रहा है. मैं ने कभी योजना नहीं बनाई कि कब कौन सी फिल्म करूंगी. मैं ने तो यह भी नहीं सोचा कि मैं 300 फिल्मों में अभिनय कर लूंगी और 300वीं फिल्म के रूप में मैं ‘मौम’ करूंगी. यह महज इत्तफाक है कि 300वीं फिल्म के रूप में मैं ने ‘मौम’ में अभिनय किया है, जो बहुत ही बेहतरीन और समसामयिक फिल्म है. इस फिल्म को ले कर मैं बहुत खुश हूं. यह हमारे होम प्रोडक्शन की फिल्म है.

फिल्म ‘मौम’ में आप का किरदार क्या है?

यह एक पारिवारिक इमोशनल फिल्म है. इस में पिता व बेटी का रिश्ता है. मां और बेटी की रिलेशनशिप है. पति और पत्नी का भी इमोशनल रिलेशन है. इन तीनों रिलेशन के इर्दगिर्द यह एक इमोशनल कहानी है. आज की तारीख में मौडर्न परिवारों के अंदर जो समस्याएं चल रही हैं, वही हमारी फिल्म का हिस्सा हैं यानी आज के संदर्भ में हमारी फिल्म प्रासंगिक फिल्म है. एक परिवार के अंदर रिश्तों को ले कर क्या होता है, यह सब आप को इस में नजर आएगा.

आप की पिछली फिल्म ‘इंग्लिशविंग्लिश’ में भी आप का मां का किरदार था. अब फिल्म ‘मौम’ में भी आप का किरदार एक मां का है. इन दोनों किरदारों में क्या अंतर है?

दोनों किरदार बहुत अलग हैं. ‘इंग्लिशविंग्लिश’ की मां बहुत इमोशनल है. पढ़ीलिखी नहीं है. उसे अंगरेजी बोलना नहीं आता. उस के बच्चे और पति हमेशा उस का मजाक उड़ाते हैं. वह बाहर कभी खुल कर बात नहीं कर पाती. हमेशा दबीसहमी सी रहती है यानी कि एक अलग तरह का किरदार है. जबकि फिल्म ‘मौम’ में जो मां है, वह अंदर से सशक्त और गहराई वाली नारी है. बच्चों से बहुत प्यार करती है. लेकिन मां होते हुए भी उसे बदले में उतना प्यार नहीं मिलता. उसे उस प्यार की तलाश रहती है.

फिल्म ‘मौम’ का जो परिवार है, वह मौडर्न है या दकियानूसी?

यह फिल्म अति समसामयिक है यानी फिल्म का परिवार मौडर्न है. बच्चे भी मौडर्न हैं. जिस तरह से बड़े शहरों के आज के बच्चे होते हैं, उसी तरह के बच्चे इस फिल्म में हैं. जिस तरह से मौडर्न परिवारों में डाइनिंगटेबल पर बैठ कर मातापिता और बच्चे बातें करते हैं वे सब इस फिल्म का हिस्सा हैं. इस फिल्म में इमोशन के साथसाथ ड्रामा और रोमांच भी है. फिल्म का विषय ऐसा है, जिस की चर्चा हर दर्शक करना चाहेगा.

जब आप ने अभिनय कैरियर की शुरुआत की थी, उन दिनों हीरोइन बनना आसान था या आज के माहौल में?

हीरोइन बनना आसान उस वक्त भी नहीं था और आज भी नहीं है. बिना परिश्रम के कभी कुछ नहीं मिलता. आज की हीरोइन भी बहुत मेहनत करती है. वर्तमान समय के कलाकार तो कमाल की मेहनत करते हैं. वे डांस, ऐक्टिंग, फाइटिंग, मार्शल आर्ट सहित बहुत कुछ सीखते हैं.

जब आप सुपरस्टारडम पर सवार थीं, तब आप सभी कलाकार 2-3 शिफ्टों में काम करते थे, पर आज का कलाकार तो एक समय में एक ही फिल्म करता है?

यह भी सच है. आज जिस ढंग से काम होता है, उस तरह का काम करने में ऐंजौयमैंट ज्यादा है. अब परफैक्शन पर जोर दिया जाता है. परफैक्शन की जो भूख है, उस से कलाकार को भी काम करने में मजा आता है. जब मैं फिल्म ‘नगीना’ कर रही थी, उस वक्त मैं ने एकसाथ 3 नहीं बल्कि 4 शिफ्टों में काम किया था. आज कोई कलाकार ऐसा काम नहीं कर सकता. यह अच्छी बात है. मैं ने ‘नगीना’ के साथसाथ ‘मिस्टर इंडिया’ के अलावा 2 और फिल्में भी की थीं. सभी सुपरहिट रही थीं.

आप ऐसी भारतीय अदाकारा हैं, जिन्हें सुपरस्टार का दर्जा मिला. दूसरों के साथ ऐसा अब तक नहीं हुआ है?

मुझे ये सब नहीं पता, पर आप जो कुछ कह रहे हैं, उस के लिए मैं आप की शुक्रगुजार हूं. मैं सिर्फ इतना जानती हूं कि हर इनसान मेहनत कर रहा है. सब को शोहरत मिल रही है. हर कलाकार या फिल्मकार अपनी डैस्टिनी के अनुसार आगे बढ़ रहा है. फिल्म इंडस्ट्री में एक अभिनेत्री के तौर पर मुझे जो शोहरत मिली, जो मुकाम मिला, उस में सिर्फ मेरा ही योगदान नहीं है, बल्कि मेरे निर्देशकों का भी रहा है. मैं इन सब की शुक्रगुजार हूं. आज जो मैं आप के सामने बैठ कर आप से बातें कर रही हूं, ये सब उन निर्देशकों की वजह से ही संभव हो पाया है, जिन्होंने मेरी प्रतिभा पर यकीन कर अब तक मुझे फिल्मों में  अभिनय करने का अवसर प्रदान किया.

अब तक मिथ रहा है कि शादी के बाद हीरोइन का कैरियर खत्म हो जाता है. इस मिथ को तोड़ने में आप की मदद किस ने की?

इस मिथ को तोड़ने में मेरा अपना कोई योगदान नहीं है. यह कंट्रीब्यूशन उन निर्देशकों का है, जिन्होंने शादी के बाद भी मेरी प्रतिभा पर यकीन किया. उन्हें मुझ पर और मेरी प्रतिभा पर यकीन है. इसीलिए वे आज भी मुझे ले कर फिल्में बना रहे हैं.

जब आप ने फिल्म ‘इंग्लिशविंग्लिश’ या ‘मौम’ चुनी उस वक्त आप को एक अलग तरह की पटकथा मिली या आप को ध्यान में रख कर किरदार लिखे गए?

ऐसा तो हो नहीं सकता कि 15 साल के बाद जब अचानक गौरी शिंदे मेरे पास ‘इंग्लिशविंग्लिश’ की स्क्रिप्ट ले कर आईं, तो मैं ने दौड़ कर लपक ली. मैं ने पहले ही कहा कि मैं ने आज तक महज गिनाने के लिए कोई फिल्म नहीं की. मैं टाइमपास करने के लिए कोई फिल्म नहीं कर सकती. जब मैं ने ‘इंग्लिशविंग्लिश’ की पटकथा सुनी, तो उस ने मेरे दिल को छू लिया. मुझे लगा कि मुझे इस फिल्म को करना चाहिए. उस वक्त मुझे या गौर शिंदे को पता नहीं था कि यह फिल्म कमर्शियली इतनी अधिक सफल हो जाएगी. मैं ने तो सिर्फ एक अच्छी फिल्म करने के मकसद से यह फिल्म की थी. अब ‘मौम’ को ले कर भी मेरी यही सोच है. पर मैं यह मानती हूं कि ‘इंग्लिशविंग्लिश’ में मैं ने जिस तरह का किरदार निभाया, उसे दर्शकों ने बहुत पसंद किया.

आप की बेटी जाह्नवी की फिल्मों से जुड़ने की काफी चर्चा है?

यह सच है कि जब मेरी बेटी ने कहा कि उसे फिल्मों में हीरोइन बनना है, तो मैं थोड़ी घबराई थी. उसे इजाजत देने को ले कर मेरे अंदर हिचक थी, जबकि मैं समझती हूं कि आज मैं जो कुछ हूं, वह फिल्म इंडस्ट्री की वजह से ही हूं. फिल्म इंडस्ट्री की वजह से ही मैं ने नाम कमाया है. लेकिन समय का अंतराल बहुत माने रखता है.

मेरी मां मुझे बहुत प्रोटैक्ट करती थीं. उसी तरह मैं भी अपनी बेटियों को बहुत प्रोटैक्ट करती हूं. आप यकीन नहीं करेंगे, लेकिन हकीकत यह है कि मैं ने 300 फिल्मों में अभिनय कर लिया, मगर मैं ने अपनी बेटियों को बहुत कम फिल्में दिखाई हैं. छह साल की उम्र तक तो उन्हें यह भी पता नहीं चला कि मैं अभिनेत्री हूं. 6 साल की उम्र के बाद जब वे मेरे साथ एअरपोर्ट पहुंची और लोगों ने मुझ से औटोग्राफ मांगे तब मुझे उन्हें बताना पड़ा कि मैं फिल्मों में अभिनय करती हूं. लेकिन मैं ने उन से कह दिया था कि मैं उन्हें अपनी कोई फिल्म नहीं दिखाऊंगी.

क्या आप को लगता है कि हर किरदार के साथ कोई न कोई प्रयोग किया जाना चाहिए?

ऐक्सपैरीमैंट जरूर करना चाहिए. असली चुनौती तो नए ऐक्सपैरीमैंट करने में ही है. यदि हम बारबार घिसेपिटे किरदार निभाते रहेंगे, तो उन में क्या चुनौती होगी?

हौलीवुड की फिल्में भारतीय भाषाओं में डब हो कर भारत में प्रदर्शित हो रही हैं और भारतीय फिल्मों से ज्यादा कमा रही हैं. इसे कैसे देखती हैं?

यह तो ग्लोबलाइजेशन का परिणाम है. सिर्फ हौलीवुड की फिल्में ही सफल नहीं हो रही हैं, हमारी फिल्में भी सफल हो रही हैं. आमिर खान, सलमान खान, शाहरुख खान, अक्षय कुमार, इन की फिल्में भी सफहो रही हैं. इस के अलावा हौलीवुड फिल्में भी असफल हो रही हैं. ‘जंगल बुक’ ने पूरे विश्व में बहुत कमाई की, पर उस ने भारत में क्या कमाया यह मुझ से ज्यादा बेहतर आप जानते हैं. आमिर खान की फिल्म ‘दंगल’ ने तो चीन में 1200 करोड़ रुपए कमा लिए.

रिऐलिटी शो में जिस तरह से बच्चे काम कर रहे हैं, उस से क्या उन का भविष्य बनता है? आप उन के पेरैंट्स को क्या सलाह देना चाहेंगी?

मैं बच्चों और उन के पेरैंट्स को सलाम करती हूं. मुझे याद है जब मैं छोटी थी और शूटिंग के लिए सैट पर जाती थी, तो मेरी मां बहुत काम करती थीं. वे सब कुछ छोड़ कर मेरे लिए मेहनत करती थीं. जबकि हम लोग फिल्मी माहौल से नहीं थे. मैं ने एक भी दिन नहीं सुना कि आज यह काम नहीं हो पाया या आज मेरी मम्मी सैट पर नहीं हैं. वे हमेशा मेरा हौसला बढ़ाने के लिए मौजूद रहती थीं. मैं आज जो कुछ भी हूं, वह अपनी मां की वजह से हूं. आज टीवी पर जो बच्चे काम कर रहे हैं, जो अच्छी परफौर्मैंस दे रही हैं, उस का सारा श्रेय मैं उन के पेरैंट्स को देती हूं.

लेकिन यदि वे टीवी रिऐलिटी शो का हिस्सा न बनते, तो डाक्टर या इंजीनियर बन सकते थे?

आप की बात सही है. मगर यदि बच्चे की रुचि संगीत या नृत्य या फिर अभिनय में है, तो आप क्या करेंगे? यदि बच्चे अभिनय, नृत्य या संगीत में रुचि दिखा रहे हैं, उस में नाम कमा रहे हैं, तो हमें उन्हें सपोर्ट करना चाहिए. मैं भी एक मां हूं. मैं ने भी अपनी बेटियों को पढ़ाने के बारे में सोचा. डाक्टर, इंजीनियर बनाने के बारे में सोचा. पर अंतत: मुझे भी उन की रुचि के आगे झुकना पड़ा.

बचपन या टीनएज का वह सपना जो अब तक पूरा नहीं हुआ और क्या उसे पूरा करना चाहेंगी?

पेंटिंग मेरा पैशन रहा है. लेकिन कुछ वजहों से मैं ने पेंटिंग्स करना छोड़ दिया था. लेकिन शादी के बाद जब मैं ने अपने बच्चों का होमवर्क करवाना शुरू किया, तो उन के लिए ड्राइंग मैं तब बनाती थी. मेरी बेटियों ने कहा कि मम्मा आप तो बहुत अच्छी ड्राइंग बना लेती हैं. आप को तो पेंटिंग्स बनानी चाहिए. तब मैं ने फिर से पेंटिंग्स बनानी शुरू कीं. मेरी एक पेंटिंग अमेरिका के न्यूयौर्क की एक आर्ट गैलरी में खरीद कर रखी गई है.

निर्माता के तौर पर आप को अपने पति की कौन सी फिल्म पसंद है?

आप बौनी कपूर को अच्छी तरह से जानते हैं. उन्होंने अब तक सब बेहतरीन फिल्में बनाई हैं. मुझे ‘मिस्टर इंडिया’ सब से ज्यादा पसंद है. ‘वो सात दिन’ भी. लेकिन मेरी व मेरे बच्चों की फेवरेट फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ है. ‘नो ऐंट्री’ भी बहुत पसंद है, क्योंकि मेरी कौमेडी में भी बहुत रुचि है.