फिड्डल्म ‘कौकटेल’ से अभिनय के क्षेत्र में कदम रखने वाली डायना पेंटी एक मौडल और अभिनेत्री हैं. बचपन से ही चुनौतीपूर्ण काम करने की इच्छा रखने वाली डायना ने मुंबई के सेंट जेवियर कालेज से मास मीडिया में अपनी पढ़ाई पूरी की. वर्ष 2005 में उन्होंने मौडलिंग के क्षेत्र में कदम रखा और कुछ ही दिनों में सुपर मौडल बन गईं. शायद ही कोई ऐसा डिजाइनर होगा जिस के डिजाइन किए गए कपड़े पहन कर डायना रैंप पर न चली हों.

मौडलिंग को डायना इत्तफाक बताती हैं. उन के चाचा जो फैशन फोटोग्राफर हैं, को वे अपना रोल मौडल भी मानती हैं, जिन्होंने डायना का फोटो ले कर ‘इलीट मौडल्स इंडिया’ में भेजा और वहां उन का फोटो चुन लिया गया. वे उस समय कालेज में थीं इसलिए अपनी पढ़ाई छोड़ कर मौडलिंग नहीं करना चाहती थीं, लेकिन फिर उन्होंने मौडलिंग को पार्टटाइम करने का निश्चय किया.

पढ़ाई पूरी करने के बाद वे पूरी तरह से मौडलिंग में उतरीं. वे अपने काम को ले कर हमेशा वचनबद्ध रहती हैं. इस समय वे डायमंड मर्चैंट हर्ष सागर को डेट कर रही हैं, लेकिन अपनी सीमाओं में रहना पसंद करती हैं. वे कहती हैं कि हमें प्यार में सीमाएं नहीं लांघनी चाहिए. इस समय उन का सब से अधिक ध्यान कैरियर पर है. इतना ही नहीं, आज डायना कई बड़ीबड़ी कंपनियों की ब्रैंड एंबैसेडर भी हैं.

मौडलिंग कैरियर जब पीक पर था तभी उन्हें रोमांटिक फिल्म ‘कौकटेल’ में काम करने का औफर मिला. फिल्म की कहानी और साथी कलाकारों को देख कर वे उत्साहित हो गईं. उन्होंने इसी फिल्म से अभिनय के क्षेत्र में कदम रखा. फिल्म अच्छी चली पर डायना को अपने मन मुताबिक काम नहीं मिल रहा था, वे 3 साल तक अच्छी कहानी तलाशती रहीं. फिर उन के हाथ लगी कौमेडी फिल्म ‘हैप्पी भाग जाएगी’ जिस की कहानी काफी अलग है. पेश हैं, उन से हुई बातचीत के खास अंश :

इस फिल्म को ले कर इतनी उत्साहित क्यों हैं?

मुझे काफी लंबे अंतराल के बाद अपनी पसंद की फिल्म मिली है इसलिए काफी उत्साहित हूं. इस में मेरी जो भूमिका है वह काफी अलग है, लेकिन मैं ने अपने समक्ष आई सभी चुनौतियों को स्वीकार किया है.

कौमेडी करना कितना मुश्किल था?

कौमेडी करना बहुत कठिन था, लेकिन मैं ने की. जब आप के साथ अभय देओल, जिम्मी शेरगिल और अली फजल जैसे कलाकार हों तो काम करना आसान हो जाता है, वे काफी अच्छा परफौर्म करते हैं. उन्हें देखदेख कर मेरे लिए भी अभिनय करना आसान हो गया था.

फिल्म के किस भाग को करने में अधिक कठिनाई आई?

पूरी फिल्म ही कठिन है, क्योंकि मुझे कंफर्ट जोन से निकल कर काम करना था. हैप्पी शादी से भाग जाती है और भागते हुए पाकिस्तान पहुंच जाती है और वहां अभय देओल से मिलती है. वह कैसे वहां से निकलती है, इस में दिखाया गया है. मेरे लिए शुरुआत में मेरा चरित्र जो लाउड दिखाया गया है, मुझ से काफी अलग था. मैं इतनी लाउड नहीं हूं, थोड़ी शाय हूं. उसे तोड़ने में समय लगा. मुश्किलें आईं पर करतेकरते आसान हो गया. जब फनी सीन्स शूट हो रहे थे तो मैं अपनेआप को हंसने से नहीं रोक पा रही थी. इसलिए बारबार कट करना पड़ रहा था, लेकिन धीरेधीरे सब ठीक होता गया.

अभय देओल के साथ पहली बार काम करने का अनुभव कैसा रहा?

वे एक अनुभवी कलाकार हैं. मैं ने उन्हें देख कर काफी चीजें सीखी हैं. एक कलाकार को टीवी या हौल में देखने और सामने ऐक्टिंग करते हुए देखने में भी काफी अंतर होता है, लेकिन मैं यही कहूंगी कि मैं ने उन्हें देख कर खुद में काफी सुधार किया है.

बिना गौडफादर के बौलीवुड में अपनी जगह बनाना कितना मुश्किल रहा?

मुझे अधिक मुश्किल नहीं हुई. मैं ने जितने लोगों के साथ काम किया वे सभी अच्छे थे. उन लोगों ने मेरा कठिन परिस्थिति में भी साथ दिया. ऐसा लगा कि सभी मुझे गाइड कर रहे हैं, मैं ने कुछ मिस नहीं किया. आशा है, आगे भी वैसा ही रहेगा. मेरे हिसाब से आप को अंत में यह प्रूव करना पड़ता है कि आप कितने प्रतिभावान हैं.

लोग ऐसा कहते हैं कि मौडल्स ऐक्टिंग नहीं कर सकतीं. इस में कितनी सचाई है?

मेरे हिसाब से अधिकतर अभिनेत्रियां पहले मौडल रही हैं और यह बात बिलकुल सही नहीं है.

फिल्म को चुनते समय किस बात का ध्यान रखती हैं?

स्टोरी, चरित्र और मेकर, ये चीजें अवश्य देखती हूं. अगर स्टोरी पसंद आ जाए तो निर्माता को देखना जरूरी है. यह  बात भले ही बाद में आती है पर उसे देख लेना सही होता है.

सोशल मीडिया पर आप कितनी ऐक्टिव हैं?

सोशल मीडिया की वजह से ही तो आज मैं यहां तक पहुंची हूं. इस के माध्यम से लोग हमें पहचानते हैं और हमें प्रसिद्धि मिलती है. अभी मैं ट्विटर, इंस्टाग्राम, फेसबुक सभी पर हूं.

तनाव होने पर क्या करती हैं?

किताबें पढ़ती हूं, गाने सुनती हूं, इस के अलावा परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताती हूं, क्योंकि उस से मुझे खुशी मिलती है. सकारात्मक सोच वाले लोगों के बीच में रहना पसंद करती हूं, क्योंकि उन के बीच रहने से मुझ में पौजिटिव ऊर्जा आती है.

आप के यहां तक पहुंचने में परिवार का कितना सहयोग रहा है?

परिवार का बहुत सहयोग रहा है. वे मुझे और मेरे काम को सम्मान देते हैं और मुझ पर उन्हें पूरा भरोसा है. इस से मुझे आगे बढ़ने में काफी आसानी हो रही है.

आप की नजर में सफलता क्या है?

मेरे हिसाब से सफलता का अर्थ सब के लिए अलग है.

फिटनैस पर कितना ध्यान देती हैं?

मैं थोड़ी आलसी हूं इसलिए जिम नहीं जा पाती, मैं बहुत फूडी हूं इसलिए डाइटिंग नहीं कर पाती, लेकिन अगर लगने लगता है कि ज्यादा औयली खा लिया है तो लाइट फूड लेने लगती हूं.

कितनी फैशनेबल हैं?

फैशन मुझे पसंद है. मैं अपने हिसाब से तैयार होती हूं. अपने परिधान मैं खुद डिजाइन करती हूं. मैं वही पहनती हूं जो मुझे आरामदायक लगे. किसी की डै्रस देख कर मैं कपड़े नहीं पहनती. मुझे जीन्स, टीशर्ट और चप्पल अच्छे लगते हैं. कलर्स और प्रिंट्स बहुत पसंद हैं.

मेकअप कितना पसंद करती हैं?

मैं हमेशा नैचुरल मेकअप पसंद करती हूं. वही मुझ पर सूट भी करता है. मेरी स्किन अच्छी है इसलिए अधिक ध्यान नहीं देना पड़ता. बारिश के मौसम में मेकअप को और अधिक लाइट रखती हूं. स्मच फ्री काजल लगाती हूं. इस के अलावा थोड़ा फाउंडेशन और लिप ग्लौस लगाती हूं. शाम को मैं डार्क कलर लगाना पसंद करती हूं. काजल और लिप बाम मैं अपने पर्स में हमेशा रखती हूं.

समय मिले तो क्या करती हैं?

काफी किताबें पढ़ती हूं या अगर किसी फिल्म पर काम कर रही हूं तो उस की रिसर्च करती हूं.

किस बात से गुस्सा आता है?

अगर कोई झूठ बोले तो मुझे बहुत गुस्सा आता है.

खुश रहने का मंत्र क्या है?

आप को जो मिले उसी में खुश रहो.

पसंदीदा पर्यटन स्थल कौन सा है?

मुझे देश की उत्तरी सीमा पर जाना पसंद है. लेह, लद्दाख, कुल्लू मनाली आदि सभी स्थानों पर घूमने जाना चाहती हूं.