कैलाश खेर ऐसे गायक, गीतकार व संगीतकार हैं जिन के लिए संगीत बिना शब्दों के मन की भावना को दूसरों तक पहुंचाने की विधा है. अपनी अनूठी आवाज के चलते बौलीवुड में सूफी परंपरा को जिंदा रखने का इरादा रखने वाले कैलाश खेर से उन के अभी तक के सफर के बारे में शांतिस्वरूप त्रिपाठी ने बातचीत की. पेश हैं मुख्य अंश :
 
आप के लिए संगीत के क्या माने हैं?
हृदय की जिन सूक्ष्म भावनाओं को आप शब्दों में या बोल कर बयां न कर पा रहे हों उन्हें जिस विधा से व्यक्त कर पाते हैं, वही संगीत है. मेरे लिए संगीत एक एहसास है. यह एक ऐसी भावना है जिसे व्यक्त करना संभव नहीं है. मेरे लिए संगीत नशा है. मैं संगीत के बिना रह ही नहीं सकता.
आप की पहचान सूफी संगीतकार के रूप में होती है, पर तमाम लोग सूफी संगीत की आलोचना करते हैं. आरोप है कि बहुत से लोग सूफी के नाम पर कुछ भी गाते रहते हैं?
जो लोग सूफी संगीत की आलोचना करते हैं मैं उन के पक्ष में हूं. क्योंकि हर बात सूफी नहीं होती है. हर बात को सूफी होना भी नहीं चाहिए. 
आप के अनुसार सूफी संगीत क्या है?
सूफी संगीत कबीर वाणी है. कबीर वाणी, निर्गुण भक्ति को दर्शाती है. निर्गुण भक्ति भी प्यार का एक रूप है. उसी निर्गुण संगीत को मुगलकाल में सूफी संगीत कहा गया.
देश में तमाम संगीत कंपनियां मौजूद हैं जिन के साथ काम करते हुए आप संगीत की सेवा कर सकते हैं. इस के बावजूद आप ने अपनी खुद की संगीत कंपनी ‘कैलासा म्यूजिक’ शुरू करने की जरूरत क्यों महसूस की?
आप ने बड़े पते की बात कही. हमारे यहां संगीत कंपनियां काफी हैं, जोकि कई गायकों से गवा कर प्राइवेट अलबम निकालती हैं. देश में हर साल कम से कम 1 हजार फिल्में बनती हैं. इस के बावजूद हमें अपनी संतुष्टि के गीत गाने के मौके नहीं मिल पाते. यह क्षेत्र व्यापार का है. हर कोई संगीत का दोहन करने में लगा हुआ है. किसी को अच्छे संगीत की नहीं पड़ी. हम अपनी पसंद का काम नहीं कर पा रहे हैं. अब मेरे अंदर जो असंतोष है, उस के लिए कुछ तो अच्छा करना है. हमें अपनी पीढ़ी या आने वाले पीढ़ी के लिए कुछ काम करना पड़ेगा. इसलिए हम ने अपनी संगीत कंपनी खोली. मैं ने अपनी संगीत कंपनी के तहत अपने 4 अलबम निकाले हैं और इन चारों अलबमों को खासी शोहरत मिली है.
तमाम संगीत कंपनियों का दावा है कि अब संगीत के अलबम नहीं बिकते?
मैं उन की बातों से सहमत नहीं हूं. इस पृथ्वी पर सबकुछ बिकता है. यदि ईमान बिक सक?ता है तो संगीत के अलबम क्यों नहीं बिकेंगे? हमें लगता है कि संगीत कंपनियां संगीत अलबम न बिकने का झूठा प्रचार कर रही हैं. यदि वे सच बोल रही हैं तो इस का अर्थ यह हुआ कि उन का ईमान इतना बिक चुका है कि अब उन्हें सजा मिल रही है. जो अपना ईमान बेच चुके हैं वे अब सामान नहीं बेच पाएंगे क्योंकि जो उन्हें दिख रहा है वह मृतप्राय है.
आप ने तमाम देशों में म्यूजिकल कंसर्ट किए हैं. किस देश में आप को सब से ज्यादा पसंद किया गया? वहां के लोगों ने कभी कुछ कहा?
अमेरिका में मुझे पसंद किया जाता है. अमेरिकियों को भारतीय संगीत ज्यादा पसंद आता है. उन्हें भारतीय संगीत में अध्यात्म नजर आता है. वे आध्यात्म को सुरों में सुनना चाहते हैं. संगीत, भाषा और संस्कृति से परे है. इस वजह से अमेरिकी ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व की हर धरती का इंसान इस के साथ जुड़ता है. आप यकीन करें या न करें, मैं ने 8 साल के अंदर सिर्फ अमेरिका व कनाडा में 300 म्यूजिक कंसर्ट किए हैं. एकसाथ 16 हजार अमेरिकियों ने हमारे हिंदी गाने सुने हैं.
विदेशों में लोग आप के किस गाने को ज्यादा सुनना पसंद करते हैं?
हमारे नौन फिल्मी गीतों के अलबम के गीतों को वे ज्यादा सुनते हैं. मेरा एक गाना है, ‘बम बम लहरी…’ यह उन्हें बहुत पसंद आया. उन्हें लगा कि इस आवाज में माईथोलौजी या अलौकिकता है और वे इस के दीवाने हो गए.
आप को नहीं लगता कि टीवी चैनलों पर प्रसारित हो रहे संगीत प्रधान रिऐलिटी शो में आ रहे बच्चे भटक रहे हैं? वे पढ़ाई से दूर हो जाते हैं?
मैं बहुत ज्यादा रिऐलिटी शो के साथ नहीं जुड़ा हुआ हूं. मैं ‘सारेगामापा लिटिल चैंप्स’ से जज के रूप में जुड़ा हुआ था. उस वक्त मुझे इस की सोच अच्छी लगी थी कि संगीत को बेहतर तरीके से लिया जा रहा है. लोगों में संगीत को ले कर जागरूकता बढ़ रही है. इस शो को जज करते समय मैं ने पाया था कि बच्चे जितना संगीत में रुचि ले रहे हैं, उतना ही वे अपनी पढ़ाई पर भी ध्यान दे रहे हैं. यदि सभी ऐसा कर रहे हैं तो यह अच्छी बात है.
आप को कभी इस बात का एहसास नहीं हुआ कि रिऐलिटी शो में प्रतियोगी बन कर आए बच्चों पर जीत हासिल करने का दबाव रहता है?
कैसा दबाव? जब हम ने ‘सारेगामापा लिटिल चैंप्स’ को जज किया था उस वक्त हम ने बच्चों पर दबाव नहीं बनाया था. बच्चों पर जो तनाव आता है वह उन के मातापिता देते हैं. हर मातापिता अपने बच्चे से ज्यादा से ज्यादा अपेक्षा रखता है. उस वक्त हम बच्चों के साथसाथ उन के मातापिता को भी यह समझाने का प्रयास करते रहे कि यह जीवन का अंत नहीं है. अभी तो शुरुआत है. इन पर दबाव बनाने की बजाय जरूरत है इन नन्ही प्रतिभाओं की सही गू्रमिंग की.
दूसरे गायकों व संगीतकारों के मुकाबले आप बहुत कम रिऐलिटी शो में नजर आते हैं?
अति सर्वत्र वर्ज्यते. हम सभी को पता है कि अति में विनाश है. मैं अच्छा काम करना चाहता हूं और ज्यादा से ज्यादा अच्छा काम कर अपने प्रशंसकों का दिल जीतना चाहता हूं.
सीरियल ‘बालिका वधू’ में आप के स्वरबद्ध गीत सुनाई देते हैं. इस सीरियल में जिन समस्याओं का जिक्र है, क्या आप उन से किसी भी रूप में जुड़ा हुआ महसूस करते हैं?
सीरियल ‘बालिका वधू’ जब शुरू हुआ था तब बाल विवाह इस का मुद्दा था. सीरियल की कहानी पता नहीं कहां से कहां पहुंच गई है. सीरियल वाले हमारे अलबम के गीतों का उपयोग कर रहे हैं. वैसे हमारे देश में समस्याएं बहुत हैं. दुख की वजहें कई हैं तो सुख की भी वजहें कई हैं. देश विकास की ओर बढ़ रहा है. शिक्षा का विकास हो रहा है. लोगों की जीवनशैली और प्रवृत्ति बदल रही है. उसी से जीवन में बहुत बदलाव आ रहा है. 
समाज में आ रहे बदलाव को आप किस तरह से देखते हैं?
मैं झूठी तारीफ नहीं करता. हकीकत यही है कि इंसान बहुत जल्दी तरक्की चाहता है, ऐसे में मूल्यों और संस्कारों का विनाश हो रहा है. इंसान एक ही दिन के अंदर चांद को छूना चाहता है. यह कैसे संभव है? आज की युवा पीढ़ी तुरंत करोड़पति बनना चाहती है. अरे भइया, किसान खेत में बीज बोता है तो उसे भी फसल काटने के लिए कुछ महीनों तक इंतजार करना पड़ता है. इन महीनों में वह किसान सब्र से काम लेता है. पर आज के दौर में किसी के पास सब्र नाम की चीज नहीं है. जब सब्र नहीं है तो आप कैमिकल की चीजों का उपयोग करेंगे, कैमिकल आएगा तो जहर भी आएगा. 
ऐसे में तरक्की की कीमत तो चुकानी पड़ेगी. दूसरी बात हमारे देश में दो चेहरे लगा कर घूमने वालों की कमी नहीं है. इसी के चलते देश का व समाज का सत्यानाश हो रहा है. हमारे यहां आडंबर व पाखंड रचने वालों की संख्या बहुत है.
आज अधीर युवा पीढ़ी में सिर्फ निगेटिविटी है?
मैं ने ऐसा नहीं कहा. आज की युवा पीढ़ी सजग है. वह सच के लिए लड़ना जानती है. तभी तो हम ने 2010 में अन्ना हजारे के लिए एक गीत लिखा था, जिस के बोल हैं, ‘अंबर तक यही नाद गूंजेगा, सच का नाद अंबर तक गूंजेगा…’
अन्ना हजारे के साथ आप क्यों जुड़े थे?
हम हमेशा सत्य के साथ जुड़ते हैं. और जुड़े रहेंगे. लाखों अन्ना हजारे इस पृथ्वी पर, भारत में आए हैं. हमारे देश में ऐसे लोगों की संख्या हमेशा अधिक रही है जिन्होंने अन्याय, दुराचार सहित देश के अंदर जितनी भी बुराइयां हैं, उन के खिलाफ अपना जीवन होम किया है. अपने जीवन की संपूर्ण ऊर्जा परिवर्तन के लिए, देश के पुनर्निर्माण के लिए लगाई है.