‘रौक स्टार’ से बौलीवुड में ऐंट्री करने वाली अभिनेत्री नरगिस फाखरी अमेरिकन फैशन मौडल भी हैं. न्यूयार्क के क्वींस में जन्मी नरगिस के पिता पाकिस्तानी और मां चेकोस्लोवियन हैं. पिछले दिनों प्रदर्शित फिल्म ‘मद्रास कैफे’ और फिल्म ‘फटा पोस्टर निकला हीरो’ में बतौर आइटम डांसर नजर आईं नरगिस से सोमा घोष ने बात की. पेश हैं मुख्य अंश.

आप किस तरह की फिल्मों में काम करना पसंद करती हैं?

मैं ने 2 साल में 2 फिल्में कीं जो बहुत कम हैं पर मैं इस दौरान खाली नहीं बैठी. कई विज्ञापनों में काम किया. मुझे एक ऐसी फिल्म चाहिए थी जिस से मैं अपने आप को जोड़ सकूं और वह मुझे ‘मद्रास कैफे’ मिली. वैसे, मुझे हर तरह की भूमिका निभाना पसंद है.

बौलीवुड में अपनेआप को स्थापित करना कितना मुश्किल है?

मैं खुश हूं कि मुझे दोनों ही निर्देशक, निर्माता सही मिले. मैं यहां की नहीं हूं, मुझे यहां के वातावरण को जानना मुश्किल था. मेरी एजेंसी ने मेरी सहायता की. मुझे हिंदी नहीं आती थी, मैं ने रोज 4-4 घंटे बैठ कर हिंदी के क्लासेज लिए. अब मैं थोड़ी हिंदी बोल और समझ सकती हूं. जब भी मुझे समय मिलता है मैं हिंदी मूवीज देखती हूं. यहां की संस्कृति को समझने की कोशिश कर रही हूं. इन सब चीजों को सीखनेसमझने में वक्त तो लगता ही है.

किसी ‘कंट्रोवर्सी’ को आप कैसे लेती हैं?

यहां की नहीं होने की वजह से लोग मेरे बारे में कुछ भी छाप देते हैं. मेरे कई फ्रैंड लड़के हैं, क्योंकि मेरे हिसाब से लड़के अधिक अच्छे और समझदार होते हैं. मैं उन के साथ घूमती हूं, समय बिताती हूं, तो कोई कुछ भी लिख देता है, जो मैं ने कभी कहा भी नहीं है. पहले दुख होता था पर अब आदत पड़ चुकी है. एक समय के बाद आप को इन सब मसलों को ले कर एक तरह की मैच्योरिटी लानी पड़ती है. अगर ग्लैमर वर्ल्ड में हो तो यह सब सीखना और भी जरूरी हो जाता है.

रिश्ता या रिलेशनशिप आप की नजर में क्या है?

मेरे लिए रिलेशनशिप उतनी जरूरी नहीं जितना परिवार है. परिवार के बिना आप अधूरे हैं. मेरी मां न्यूयार्क में अकेली रहती हैं. समय मिलते ही मैं उन के पास पहुंच जाती हूं. वे मेरे हर काम में सहयोग देती हैं. उन्हें मैं भारत के बारे में सबकुछ बताना चाहती हूं.

आप को फैशन कितना पसंद है?

मैं बहुत ही साधारण लड़की हूं. सिंपल रहना पसंद करती हूं. लड़की होने के नाते जो फैशन करना होता है वह करती हूं. मुझे ऐनिमल पिं्रट बहुत पसंद हैं.

आप का फैशन स्टेटमैंट क्या है?

मेरा कोई स्टाइल स्टेटमैंट नहीं है. जब मैं एक जगह से दूसरी जगह जाती हूं तो आरामदायक वस्त्र पहनती हूं. मेरे हिसाब से सब से बेहतरीन स्टाइल का मतलब कंफर्टेबल होना है.

कितनी ‘फूडी’ हैं आप? भारत के व्यंजनों को खाया?

मैं गुडकुक नहीं हूं, मैं हमेशा हैल्दी फूड खाती हूं. मुझे सब्जियां अधिक पसंद हैं, वही बनाती हूं. मैं ने भारत के सभी व्यंजन ‘ट्राई’ किए हैं. दिल्ली में गाजर का हलवा खा कर 2 दिन अस्पताल में रही. लेकिन मैं ने वड़ापाव, पावभाजी, चाट, पानीपूरी आदि सबकुछ चख लिया है.