‘रब ने बना दी जोड़ी’ फिल्म से अभिनय के क्षेत्र में कदम रखने वाली अभिनेत्री और मॉडल अनुष्का शर्मा अब प्रोड्यूसर भी बन चुकी हैं. उन्हें पहला ब्रेक डिज़ाइनर वेंडील रोड्रिक ने अपने पोशाक के साथ दिया, लेकिन अनुष्का को पता चल गया था कि उन्हें इसी ‘फील्ड’ में कुछ करना है. वह मॉडल बनकर ही संतुष्ट थी, लेकिन एक दिन यशराज से उन्हें फोन आया. वह दिल्ली से मुंबई आई और यशराज की एक ऑडिशन में ही उन्हें चांस और तीन फिल्मों का कॉन्ट्रैक्ट मिला. उनकी जिंदगी बदल गयी. उन्हें अधिक संघर्ष नहीं करना पड़ा, न ही किसी प्रकार के ‘कास्टिंग काउच’ का सामना करना पड़ा. उन्होंने धीरे-धीरे सीढियां चढ़ी और आज कामयाबी की शिखर पर पहुंच चुकी हैं.

अनुष्का से जब भी उनके और विराट कोहली के साथ रिश्ते के बारे में पूछा गया तो उन्होंने जवाब देने से साफ मना कर दिया, क्योंकि इसे वे अपनी पर्सनल बात मानती हैं. इंडस्ट्री में वह अपने आप को लकी मानती हैं क्योंकि बाहर से आने के बाद भी उन्होंने हर बड़े कलाकार के साथ काम किया. हंसमुख और स्पष्टभाषी अनुष्का के साथ मिलना रोचक था, पेश है कुछ अंश.

प्र. फिल्म निर्माता बनने का अनुभव कैसा है?

दूसरी बार निर्माता बनी हूं. ये सही है कि कलाकार के साथ अधिक जिम्मेदारी नहीं होती. उनसे अधिक आशाएं नहीं रखी जाती. सिर्फ अच्छे अभिनय की मांग निर्माता, निर्देशक करते हैं. जब आप खुद निर्माता बनते हैं तो जिम्मेदारी अधिक होती है. हर बार आपको सभी निर्णय लेने पड़ते हैं. सबको एक साथ चलना पड़ता है. लेकिन अगर टीम अच्छी हो और वे बात को आसानी से समझते हैं तो काम करना कोई मुश्किल नहीं होता. हां इतना जरूर है कि हर दिन कुछ न कुछ परेशानी आती है, जिसके लिए आपको तैयार रहना पड़ता है. पहली फिल्म के बाद मैंने ये महसूस किया है कि अधिक जिम्मेदारी से मुझमें अधिक आत्मविश्वास जन्म लेता है, अधिक काम कर पाती हूं. ‘फिल्लौरी’ फिल्म के लिए मैंने अपने भाई कर्नेश शर्मा के साथ काम किया है. दोनों ने मिलकर इसे प्रोड्यूस किया है. बचपन से हम दोनों साथ रहे हैं, दोनों में अच्छी ट्युनिंग है, इससे दोनों के बीच सकारात्मक सोच अधिक हुई है, लेकिन चुनौती वैसी ही होती है.

प्र. क्या आप अभिनय से अधिक फिल्म निर्माण पर ध्यान देना चाहती हैं?

मैं अपने अंदर की आवाज़ को हमेशा सुनती हूं. मैंने कोई प्लान निर्माता बनने के लिए नहीं किया था. ये हो गया, दरअसल जो भी काम मुझे स्ट्रोंगली फीलिंग दे, उसे मैं करती हूं. किसी बात से मैं डरती नहीं. लिखने का काम भी मैं कर रही हूं, क्योंकि लिखने से लेकर अभिनय और निर्माण सब मुझे उत्साहित करते हैं. मैं कवितायें भी लिखती हूं.

प्र. पुरुष प्रधान इंडस्ट्री में महिला निर्माता बनना कितना मुश्किल है? किस बात का अधिक ख्याल रखना पड़ता है?

मेरे हिसाब से पूरी दुनिया में महिलाओं के लिए काम करना आसान नहीं होता. पुरुष प्रधान समाज में मुश्किल है. ‘फीमेल एक्टर’ भी इसे फेस करते हैं. समाज अगर ऐसा है, तो उसका असर दिखता है. लेकिन मैंने एक कलाकार के रूप में एक मुकाम हासिल कर लिया है. ऐसे में मेरे लिए कोई भी काम फिल्म से सम्बंधित करना आसान होता है. मेरी अधिकतर फिल्में सफल रही हैं. लोग मुझपर विश्वास करते हैं. इतना ज़रूर है कि मेरे लिए भी चुनौती है और मैं उसे स्वीकार करती हूं. अगर फीमेल प्रोड्यूसर बनना चैलेंज है तो मुझे उसे करने में अच्छा लगेगा. मैं अपने विज़न पर कभी कम्प्रोमाईज नहीं करती. अच्छी फिल्में बनाने की कोशिश करती रहती हूं. सावधानी तो रखनी ही पड़ती है. लेकिन मुझे लगता है कि मैंने सही समय में निर्माता बनने का निर्णय लिया है.

प्र. आपकी सफलता में आपके परिवार का कितना हाथ रहा है?

परिवार का साथ हमेशा रहा है, मां, पिता और भाई ने हमेशा साथ दिया है. इसमें भाई का साथ सबसे अधिक है. जब वे मर्चेंट नेवी में थे और ट्रेवल करते थे, तो उस दौरान फिल्में चुनने से पहले मैं उनकी राय अवश्य लेती थी, क्योंकि वे इंडस्ट्री से नहीं है, इसलिए उनकी सोच आम दर्शक की तरह होती थी. मैंने हमेशा अलग तरह की फिल्में की है. जिसमें कर्नेश का बहुत बड़ा हाथ फिल्मों को चुनने में है.

प्र. क्या कभी आपको अपने कैरियर से खतरा महसूस हुआ?

शुरू में हुआ, क्योंकि मुझे लगा नहीं था कि मैं इस इंडस्ट्री में आउंगी. जब आप सोच लेते है कि आपको करना क्या है तो हर परिस्थिति से निकलने के लिए आप तैयार रहते हैं. मुझे वह अनुभव नहीं था. मैंने रातों-रात सफलता पायी, ऐसे में कैसे इसे सम्हालूं उसे लेकर चिंता हुई और डर भी लगा. लेकिन इतना जरूर सोच लिया था कि मुझे क्या करना नहीं है. 20 साल की उम्र में ही मैंने सोच लिया था कि मुझे आइटम सोंग नहीं करना है, क्योंकि इससे मुझे क्रिएटिवली संतुष्टि नहीं मिलेगी. इस तरह काफी सोच समझकर आगे बढ़ी हूं और अब डर नहीं लगता. मैं बहुत परिश्रम कर सकती हूं और अपना सौ प्रतिशत ‘एफर्ट’ प्रयोग करती हूं. फिर चाहे वह घर की सफाई हो या कुछ और काम.

प्र. क्या इंडस्ट्री में करीब 10 साल तक काम करना कठिन था? किसी कंट्रोवर्सी को कैसे लेती हैं?

नहीं, मेरे लिए आसान था, क्योंकि ‘स्टारडम’ मुझपर कभी हावी नहीं हुआ. मैं एक साधारण लड़की हूं और सोचती हूं कि अगर मुझमें ‘ईगो’ आ जाये तो वह मेरी सृजनात्मकता को तहस-नहस कर देगी. कभी भी मैं अपने आप को सुपरस्टार नहीं समझती. जो रियल में सुपरस्टार है वे उसे सम्हालना जानते हैं. पर अभी तक मैं उसके लायक नहीं हूं. कंट्रोवर्सी से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. मुझे शांति बहुत पसंद है और उसे बनाये रखने की कोशिश करती हूं.

प्र. क्या महिलाएं आज भी अपनी रिलेशनशिप को लेकर खतरा महसूस करती हैं?

असल में आजकल लोग अपने रिश्ते को लेकर खुश नहीं रह सकते, जो मिला है उससे उन्हें हमेशा अधिक चाहिए, ऐसा वे सोचते रहते हैं. ऐसे में उन्हें बहुत कुछ खोना पड़ता है. अगर जो मिला है उसी में संतुष्टि रखें, तो रिश्ता कायम रहता है.

प्र. क्या आपको लगता नहीं है कि पुरुष को अपनी मानसिकता बदलनी चाहिए?

केवल पुरुषों को ही नहीं, बल्कि उन सभी की सोच को बदलना पड़ेगा, जो महिलाओं के लिए ऐसा सोचते हैं. उसमें परिवार की खास भूमिका होती है. मेरे परिवार में मेरे पिता, मेरे बारे में भी उतना ही सोचते हैं, जितना वे भाई के बारे में सोचते हैं. ये सब परिवार की परवरिश से होता है.

प्र. कोई सुपर पावर मिले तो क्या बदलना चाहती हैं?

एक ‘ट्रू सेंस ऑफ़ फ्रीडम’ को बदलना चाहती हूं. जो लोग अपने आपको सबसे अधिक होनहार समझते हैं, दूसरों को नहीं. इससे लाइफ बड़ी तनावपूर्ण हो जाती है. अगर उनकी सोच बदले तो वे खुद खुश रहने के साथ-साथ दूसरों को भी खुश रख सकते हैं.