फिल्मों में नाजुक बदन की ज्यादातर हीरोइनों को खतरनाक स्टंट करने से डर लगता है, पर आंचल सोनी ने इस सोच को बदल दिया है. वे केवल फिल्मों में ही नहीं, बल्कि अपने डांस शो में भी खतरनाक स्टंट करने से पीछे नहीं हटती हैं. अपने डांस शो के दौरान वे ट्यूबलाइट तोड़ती हैं, लोहे की छड़ को मोड़ती हैं और आग से खेलने वाले स्टंट करती नजर आती हैं. साल 2017 आंचल सोनी के कैरियर के लिहाज से बहुत खास है. वे हिंदी और भोजपुरी फिल्मों में काम कर रही हैं. साथ ही, वे अपना खुद का होम प्रोडक्शन चलाती हैं. उन के होम प्रोडक्शन की फिल्म ‘बाप रे बाप’ बड़े परदे पर आने वाली है. हिंदी फिल्में ‘गुलाबो’, ‘पिंजरा’, ‘शपथ’ और ‘खान इज बैक’ तैयार हो रही हैं. भोजपुरी फिल्मों में ‘हम साथी जनमजनम के’ के अलावा

2 और फिल्में बन रही हैं. बिहार के सीवान की रहने वाली और उत्तर प्रदेश के जौनपुर में पलीबढ़ी आंचल सोनी दक्षिण भारत की फिल्में भी कर रही हैं. पेश हैं, उन से हुई बातचीत के खास अंश:

बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के फिल्म लाइन में आना कितना मुश्किल होता है

आज ऐक्टिंग की दुनिया बहुत बड़ी हो गई है. किसी भी जगह की रहने वाली लड़की दूसरी जगह पर काम कर सकती है. कुछ लोग भोजपुरी फिल्मों को अच्छा नहीं मानते, पर सही बात यह है कि बंगाली, गुजराती, मराठी और राजस्थानी सभी बोली के बोलने वाले लोग भोजपुरी फिल्में करना चाहते हैं. ऐक्टिंग की दुनिया के बड़े होने से सभी काम मिलने में आसानी होने लगी है. फिल्मी बैकग्राउंड के अपने फायदे होते हैं, पर दूसरे लोगों को भी यहां काम मिलता है.

आप का मुंबई का सफर कैसा रहा

मैं ने जौनपुर के टीडी कालेज से हिंदी और भूगोल विषय के साथ बीए का इम्तिहान पास किया था. इसी बीच बनारस में एक म्यूजिक अलबम की शूटिंग हो रही थी. मैं ने उस में काम किया. उस के बाद मैं मुंबई आ गई. मेरे पिताजी ने मुंबई में चाइनीज रैस्टोरैंट खोल लिया था. यहां मुझे हिंदी टैली फिल्म में काम मिल गया. भोजपुरी फिल्मों में जौनपुर के तमाम लोग हैं. वे बोले कि मुझे भोजपुरी फिल्मों में काम करना चाहिए. इस के बाद भोजपुरी फिल्मों का काम शुरू हुआ. मेरी पहली भोजपुरी फिल्म ‘जवानी बियाहे राजाजी’ थी. इस फिल्म में मेरा काम देख कर मुझे और भी कई फिल्में मिलने लगीं. मैं ने दक्षिण भारत की कुछ फिल्मों में भी काम किया है.

भोजपुरी फिल्मों में थोड़ा भरे बदन की हीरोइनें ज्यादा पसंद की जाती हैं. आप की क्या राय है

ऐसा नहीं है. अब देखने वालों का नजरिया बदल रहा है. हीरोहीरोइन को लोग हमेशा फिट देखना ही पसंद करते हैं. हमें तो भोजपुरी फिल्मों के साथसाथ दूसरी फिल्मों में भी काम करना है. ऐसे में अपने को फिट रखना पड़ता है. फिट रहने से हर तरह की पोशाक पहनने के बाद भी खूबसूरती बनी रहती है.

फिल्मों में आप को किस तरह के रोल करना पसंद है

मुझे हर तरह के रोल करना पसंद है. मुझे लगता है कि किसी ऐक्टर को एक किरदार में बंध कर नहीं रहना चाहिए. बेहतर ऐक्टर वही है, जो हर रोल को अच्छे से कर सके. मुझे फिल्मों में खतरनाक स्टंट करना पसंद है.

भोजपुरी फिल्मों पर खुलेपन के आरोप लगते रहते हैं. क्या आप इस बात से सहमत हैं

भोजपुरी फिल्मों में हिंदी फिल्मों से ज्यादा खुलापन नहीं है. हिंदी फिल्म में हीरोइन कोई भी कपड़े पहन ले, मुद्दा नहीं बनता, पर भोजपुरी फिल्मों में पहन ले, तो बदन की नुमाइश मान लिया जाता है.

क्या यह बात सच है कि भोजपुरी फिल्मों में हीरोइनों को बहुत सारे समझौते करने पड़ते हैं

केवल भोजपुरी फिल्मों की ही बात नहीं है. जहां पर भी आप मेहनत और स्ट्रगल करने बजाय शौर्टकट तरीके से आगे बढ़ना चाहते हैं, वहां समझौता करना पड़ता है. ऐसे लोग हर जगह हैं. भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में भी होंगे. फैसला हीरोइन को ही करना होता है कि वह कैसे काम करना चाहती है.