सरिता विशेष

चटपट सवाल जवाब

पंसदीदा पर्यटन स्थल : गोआ

मनपसंद रंग : ब्लैक

रंग जो मूड बदल दे : सफेद

डेली वर्कआउट : 4 घंटे, जिस में डांस, जिम, मार्शल आर्ट आदि शामिल हैं

गुस्सा कब आता है : जब कोई सीन ठीक से नहीं कर पाता

पसंदीदा खाना : पापा के हाथ का बना दालचावल, ढोकला, थेपला

तनाव दूर करने का तरीका : आइसक्रीम और चौकलेट खाना

मनपसंद डिजाइनर : कोई नहीं, साधारण कपड़े पहनता हूं

सफल होने का मंत्र : हमेशा सकारात्मक सोच रखना

प्रेरणास्रोत : रितिक रोशन

फिल्म ‘हीरोपंती’ से अभिनय के क्षेत्र में कदम रखने वाले 26 वर्षीय टाइगर श्रौफ का असली नाम जय हेमंत है. अत्यंत शांत स्वभाव के टाइगर की बचपन से ही खेल और मार्शल आर्ट में रुचि थी. उन्हें पढ़ाई का शौक अधिक नहीं था, लेकिन मातापिता की तरफ से उन्हें आजादी थी कि वे अपना कैरियर खुद चुन सकें. वे अपने पिता और प्रसिद्ध अभिनेता जैकी श्रौफ को अपना आदर्श मानते हैं और मां आयशा श्रौफ की बातों को टाल नहीं सकते. पिछले दिनों उन की दूसरी फिल्म ‘बागी’ रिलीज हुई, जिस में उन्होंने बहुत मेहनत की है औैर मार्शल आर्ट की नई विधा को परदे पर उतारा है. प्रस्तुत हैं, उन से हुई बातचीत के मुख्य अंश :

आप में फिल्मों में आने की रुचि कैसे पैदा हुई?

दरअसल, मैं खेल में अधिक दिलचस्पी लेता था. 4 साल की उम्र में मैं ंने मार्शल आर्ट सीखना शुरू किया, लेकिन पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाता था. पापा के अभिनय से मैं तब अधिक प्रेरित नहीं था, लेकिन जब वे कहीं जाते तो लोग उन्हें घेर लेते थे. तब यह देख कर मुझे खुशी मिलती थी. मैं ने कभी सोचा नहीं था इस क्षेत्र में मेरा कैरियर बनेगा. ग्रैजुएशन करने के बाद मैं ने सोचा कि मैं किस लाइन में जाऊं. चूंकि भारत में तो क्रिकेट के अलावा औैर किसी खेल को अधिक महत्त्व नहीं दिया जाता, इसलिए मैं खेल को कैरियर नहीं बनाना चाहता था. उस समय फिल्मों के भी औफर्स आने लगे थे, जिन में एक फिल्म ‘हीरोपंती’ थी. तब मैं ने फैसला कि या कि स्पोर्ट्स के अनुशासन को अगर फिल्म लाइन में प्रयोग करूंगा तो अधिक लाभ होगा. अच्छा यह हुआ कि ‘हीरोपंती’ खूब चली. दर्शकों ने मेरे काम को पसंद किया. साजिद नाडियाडवाला के साथ मेरा 3 फिल्मों का कौंट्रैक्ट है. मैं खुश हूं कि बहुत जल्दी मुझे दर्शकों का प्यार मिला. दूसरी फिल्म में समय लगा, क्योंकि इस के लिए काफी तैयारी करनी पड़ी.

इस फिल्म में 5 साल की मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग आप ने 3 महीने में पूरी की. इस की क्या वजह थी?

बचपन से मैं मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग ले रहा हूं. इस फिल्म में मैं ने ‘कज्लरी पैतु’ नामक मार्शल आर्ट सीखी, जो हर तरह के मार्शल आर्ट की जननी है. इस में मेरे ट्रेनर भारद्वाज ने भी ऐक्ंिटग की है. उन्होंने इस शैली को शुरू से बहुत ही आसान तरीके से सिखाया है.

आप के लुक में काफी बदलाव आया है. कितना मेकओवर किया है और कैसे?

मैं खुद पर काफी काम करता हूं. मैं सोशल नहीं हूं. मेरे सिर्फ 2-3 दोस्त ही हैं. मेरी लाइफस्टाइल साधारण है. घूमनेफिरने का भी समय नहीं है. पार्टियों में रुचि बिलकुल नहीं है. यही मेरी लाइफ है. हर दिन अपने में कुछ सुधार लाने की कोशिश करता हूं. इसी से शायद मेरे लुक में बदलाव आ गया है.

सैलिब्रिटी पिता होने की वजह से आप पर कितना दबाव रहता है?

पिता के अभिनेता होने की वजह से लोगों को मुझ से काफी उम्मीदें हैं, जो मेरे लिए बहुत मुश्किल होता है. लेकिन उस प्रैशर से मुझे ताकत मिलती है कि मैं और मेहनत करूं ताकि पिता का नाम आगे बढ़ा सकूं.

क्या आप अपने पिता से अपने अभिनय या फिल्मों के बारे में कभी चर्चा करते हैं?

मैं कोई चर्चा नहीं करता. मैं उन की टक्कर का नहीं हूं. उस फ्रेम में मैं फिट नहीं हो सकता. मैं खुद की एक अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहा हूं. जब वे मिलते हैं तो अधिक बात फिल्मों के बारे में नहीं करता, परिवार के बारे में बातचीत करता हूं.

आप सोशल नहीं पर आज क्या सोशल मीडिया से ही कलाकार पौपुलर होते हैं? ऐसे में आप कुछ खो नहीं रहे हैं क्या?

मैं मेहनत पर विश्वास करता हूं. काम अच्छा है तो वह सब को दिखता है. मैं खुश हूं कि पहली फिल्म से ही मेरे फैन फौलोवर्स काफी हैं. सोशल नैटवर्किंग जरूरी है, पर काम भी साथ में करना आवश्यक है.

पहली फिल्म से दूसरी फिल्म के दरमियान आप खुद में क्या बदलाव पाते हैं?

मैं मजदूर हूं. मैं खुद को स्टार नहीं समझता. मैं काम के लिए लालची हूं. हर तरह की अलगअलग फिल्में करना चाहता हूं और दर्शकों का प्यार पाना चाहता हूं. बदलाव यही है कि अधिक काम करने की इच्छा जागी है.

सैलिब्रिटी पुत्र होने की वजह से कितना फायदा है?

फायदा यह है कि आप सब की नजर में जल्दी आते हैं और दर्शकों की आशा हम से दोगुनी हो जाती है. नौर्मल न्यू कमर्स समझते हैं कि यह जैकी श्रौफ का बेटा है, इसलिए फिल्म मिल गई और चल गई. मैं जो भी करूं उसे प्रूव करना मुश्किल होता है. खुद की पहचान जब तक न बने, तब तक हार्डवर्क करना पड़ता है. आज प्रतियोगिता बहुत है, मैं खुद को उस भीड़ से अलग सिद्ध करना चाहता हूं.

आप का ड्रीम प्रौजैक्ट क्या है?

मैं स्पाइडर मैन और सुपर मैन की ऐक्ंिटग हौलीवुड में करना चाहता हूं. दुनिया की यात्रा माइकल जैक्सन की तरह कर, परफौर्म करना चाहता हूं, ताकि देश का नाम रोशन हो.

फिल्म ‘बागी’ के बारे में आप क्या कहना चाहेंगे?

यह एक मुश्किल फिल्म थी, मैंटली, फिजिकली औैर इमोशनली यह चुनौतीपूर्ण फिल्म थी. इस में मेहनत, प्रैक्टिस और रिहर्सल बहुत करनी पड़ी.

आप कभी बागी हुए?

मैं कभी बागी नहीं हुआ. मैं एक शांत लड़का हूं और मातापिता से डरता हूं. मेरे मातापिता ने मुझे आजादी दी पर मैं ने कभी उस का गलत फायदा नहीं उठाया.

श्रद्धा कपूर के साथ अभिनय करना कितना सहज था?

श्रद्धा कपूर से बहुत कुछ सीखने को मिला. हम दोनों एक ही स्कूल में पढ़ते थे. इतनी सारी हिट फिल्में करने के बाद भी वह बहुत साधारण है.

आप के पास अभी कितनी फिल्में हैं?

कई फिल्मों पर बात हो रही है. अभी आगे ऐक्शन कौमेडी पर आधारित रेमू डिसूजा की फिल्म ‘फ्लाइंग जाट’ आने वाली है.