फिल्म ‘‘नाम शबाना’’ में एक जासूस का किरदार निभाकर शोहरत  बटोर रही अभिनेत्री तापसी पन्नू ने इस फिल्म की शूटिंग शुरू करने से पहले काफी रिसर्च किया. उसके बाद इस फिल्म में अभिनय करते हुए तापसी को समझ में आया कि पुरूषों की बनिस्बत औरतें ज्यादा बेहतरीन जासूस साबित हो सकती हैं, क्योंकि औरतों में सिक्स सेंस ज्यादा अच्छा और तेज होता है.

खुद तापसी पन्नू ने इस संबंध में ‘‘सरिता’’ पत्रिका से खास बातचीत करते हुए कहा कि ‘‘दूसरे विश्व युद्ध से अब तक के इतिहास पर जब आप शोध करेंगे, तो पाएंगे कि महिलाओं को जासूस कम, हनी ट्रैप के रूप में ज्यादा उपयोग किया गया. कहने का अर्थ यह है कि लड़की जब स्पाई हो, तो उसको इस तरह से भी उपयोग किया जा सकता है. नैंसी वेक हों या इनायत खान नाम की महिला जासूस, जो दूसरे विश्व युद्ध के समय काफी चर्चित रही हैं. यह हनी ट्रैप बनकर आती थी, पर जो काम वे करती थीं, उससे वे अंतिम स्पाई बन जाया करती थीं. तापसी आगे कहती हैं कि जैसे मैंने पहले आपको बताया कि इस फिल्म को करते समय मेरी समझ में आया कि लड़कियां ज्यादा बेहतरीन स्पाई बन सकती है, क्योंकि उनका सिक्स सेंस ज्यादा अच्छा काम करता है. इसके अलावा लड़कियां मल्टीटास्किंग होती हैं. उनके दिमाग में एक साथ कई चीजें चलती रहती हैं, जबकि पुरूषों का दिमाग एक ही दिशा में काम करता है. यदि एक लड़की स्पाई हो, तो उसकी सीमाएं आंकना मुश्किल हो जाता है. फिल्म ‘बेबी’ में मेरे किरदार को ‘हनी ट्रैप’ के रूप में उपयोग किया गया था. इसके अलावा पुरूषों की ये मानसिकता होती है कि एक लड़की हमारा क्या बिगाड़ सकती है.’’

जब हमने तापसी से पूछा कि शोधकार्य करने के बाद लड़कियों या औरतों को लेकर आप किस निश्चय पर पहुंची और लड़कियों से क्या कहना चाहेंगी?

इस पर तापसी पन्नू ने कहा कि ‘‘शोधकार्य के दौरान मुझे एक बात यह समझ में आयी कि हर लड़की को और हर जासूस को विचार करना चाहिए कि सामने वाले ने उससे जितना कहा है, उसके कितने अर्थ या मायने हो सकते हैं. सच कहूं तो अब तक मैंने इस बात को अपनी निजी जिंदगी में कभी उपयोग नहीं किया था, तो मेरे लिए ये समझना बहुत मुश्किल रहा कि बाल की खाल कैसे निकाली जाए.’’

आगे जब हमने तापसी पन्नू से पूछा कि उनकी बात को मानते हुए, यदि निजी जिंदगी में लड़कियां अपने सिक्स सेंस का उपयोग करने लगें, तो क्या उनका शोषण कम हो जाएगा? इसके जवाब में तापसी पन्नू ने कहा कि ‘‘सिक्स सेंस से लड़की सामने वाले पुरूष के इरादे को भांप सकती है, पर उस वक्त उसे तुरंत प्रतिक्रिया देनी आनी चाहिए. अगर सोचने में समय बर्बाद कर दिया, तब कोई मतलब नहीं रह जाएगा और प्रतिक्रियाएं परिस्थितियों के अनुसार देनी चाहिए. जैसे कि कुछ दिन पहले हमने (मैंने व अक्षय कुमार ने) कुछ महिलाओं के साथ वर्कशॉप कर उन्हें समझाया था कि वे किस तरह से अपनी कोहनी का उपयोग करके भी खुद को सुरक्षित रख सकती हैं. सेल्फ-डिफेंस की ट्रेनिंग के दौरान मैंने बहुत कुछ सीखा और मैं तमाम लड़कियों को सिखाती भी रहती हूं कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि, सामने वाले पुरूष का कद क्या है और उसकी ताकत कितनी है? जरूरत इस बात की होती है कि आपको कुछ उतनी ट्रिक्स आनी चाहिए कि आप सामने वाले पर जीत हासिल कर लें. यदि सही समय पर आपका दिमाग काम किया, तो आप सात सेकंड के अंदर सामने वाले पुरूष को चित कर सकती हैं. अक्सर होता यह है कि जब कोई घटना घटती है, तो लड़की यह सोचने लगती है कि ऐसा मेरे साथ कैसे हो गया? उस वक्त वह तुरंत प्रतिक्रिया कर, अपने शरीर को हरकत में ला अपने आपको बचाने के बारे में नहीं सोच पाती है. कोई लड़की हो या औरत, उसकी पहली कमजोरी शारीरिक नहीं, बल्कि दिमागी सोच है. जहां घटना घटती है, तुरंत औरतों का ‘प्रजेंस ऑफ माइंड’ काम नहीं करता और वे डर जाती हैं. यदि लड़की रिएक्ट करेगी, तो जीत उसकी ही होगी. इसके लिए लड़की को यह भूलना पड़ेगा कि कोई उन्हें आकर बचाएगा. लड़कियों को ये सोचना ही पड़ेगा कि उन्हें खुद अपनी सुरक्षा करनी है.’’

जब हमने तापसी से पूछा कि क्राव मागा, कूडो व मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग से उनकी निजी जिंदगी पर कितना असर हुआ? तो तापसी ने उत्तर दिया कि ‘‘मैंने ये सारी ट्रेनिंग तो अपनी फिल्मों के किरदार के साथ न्याय करने के लिए ली थी, पर अब मेरे अंदर जबरदस्त आत्मविश्वास आ गया है, जबकि अपनी निजी जिंदगी में, मैं पूरी तरह हिंसा के खिलाफ हूं. मैं तो किसी को एक थप्पड़ भी नही मार सकती. पर अब मैं डर नहीं सकती. अब मेरी समझ में आ गया है कि मेरे पास मसल्स नहीं हैं, तो भी मैं सामने वाले पुरूष का मुकाबला कर सकती हूं. मुझे इंसान के शरीर के कई ऐसे बिंदु पता हैं, जहां पर चोट करके एक झटके में उसे जमीन पर ढेर किया जा सकता है.’’

जब हमने तापसी से सवाल किया कि ‘‘आम जीवन में क्राव मागा या कूडो सीख कर औरतें कैसे घरेलू हिंसा से बच सकती हैं’’, तो हमारे इस सवाल पर तापसी पन्नू कहती हैं कि- ‘‘मेरी राय में तो हर लड़की या औरत को कोई न कोई मार्शल आर्ट सीखना चाहिए. इससे उनका अपना आत्मविश्वास बढ़ेगा और इससे वह दिमागी रूप से मजबूत भी हो जाती हैं. दूसरी बात मार्शल आर्ट की प्रैक्टिस करने से शारीरिक ताकत आ जाती है. लड़की की बॉडी लैंग्वेज स्ट्रांग हो जाती है, उसे अपनी शारीरिक ताकत का अहसास हो जाता है और जहां तक घरेलू हिंसा का सवाल है, तो वहां जब तक औरते भावनाओं में डूबी रहेंगी, तब तक हारती ही रहेंगी. हमें यह मानकर चलना चाहिए कि, जहां एक औरत पर हाथ उठता है, वहां इमोशन्स खत्म हो जाते हैं. यदि किसी पुरूष में इंसानियत नहीं है, उसमें मानवीय संवेदना नही है, वह औरत पर हाथ उठाता है, तो औरत को भी अपने इमोशन्स को भूल कर सामने वाले पर वार करना चाहिए.’’