व्यवसायी परिवार से संबंध रखने वाले सोनू सूद लुधियाना, पंजाब के हैं. फिल्मी बैकग्राउंड से न होने के बावजूद उन्होंने फिल्मों में अपनी पहचान बनायीं. वैसे तो उन्होंने इलेक्ट्रोनिक इंजीनियरिंग में बीटेक किया है, लेकिन बचपन से ही उनकी इच्छा एक्टर बनने की थी. माता-पिता चाहते थे कि वे अपनी पढाई पूरी करें. उन्होंने वैसा ही किया और मॉडलिंग के बाद फिल्मों की ओर रुख किया. बॉलीवुड में उनकी पहली फिल्म ‘शहीद-ए-आज़म’ थी, जिसमें उन्होंने भगत सिंह की भूमिका निभाई थी. इसके बाद उन्होंने कई फिल्में की. जिसमें जोधा अकबर, सिंह इज किंग, एक विवाह ऐसा भी, शूटआउट एट वडाला, हैप्पी न्यू इयर, दबंग, गब्बर इज बैक आदि प्रमुख हैं. उन्होंने हिंदी के अलावा कन्नड़ा, तमिल, तेलगू, पंजाबी आदि भाषाओं में भी फिल्में की हैं.

साल 2016 में उन्होंने अपना प्रोडक्शन हाउस ‘शक्ति सागर प्रोडक्शन्स’ अपने स्वर्गीय पिता शक्ति सागर के नाम पर खोला है. सोनू सूद अपनी बॉडी को लेकर काफी सजग रहते हैं और फिटनेस पर काफी ध्यान देते हैं. यही वजह है कि अभिनेताओं की अच्छी बॉडी की लिस्ट में उनका नाम भी शामिल है. इन दिनों वे ‘कुंग फु योगा’ फिल्म को लेकर काफी उत्सुक हैं, जिसमें उन्होंने अभिनेता जैकी चैन के साथ अभिनय किया है, साथ ही वे उस फिल्म के निर्माता भी हैं. अपने ‘फिट एंड फाइन’ अंदाज़ में वे सामने आये, बातचीत रोचक थी, पेश है अंश.

प्र. इस प्रोजेक्ट में आप कैसे शामिल हुए, इसमें शामिल होने की खास वजह क्या थी?

मुझे एक दिन फोन आया कि हम जैकी चैन की एक फिल्म बना रहे हैं जिसमें ‘फिट एक्टर’ की लिस्ट में आपका नाम सबसे ऊपर है. उन्होंने स्क्रिप्ट भेजी, वीडियो कांफ्रेंसिंग पर बात हुई और मैं इसमें शामिल हो गया. इस फिल्म की खास आकर्षण मेरे लिए अभिनेता जैकी चैन और निर्देशक स्टैनले टोंग है, जो बहुत ही कमाल की एक्शन फिल्म बनाते हैं. मुझे बहुत इच्छा थी कि अगर मुझे एक्शन फिल्म करनी है तो जैकी चैन की फिल्म में काम करना है और वह सपना जो मैंने बचपन से देखा था, वह पूरा हो रहा है. उनकी सारी फिल्में मैंने देखी है.

प्र. किस प्रकार की तैयारी की है?

मैंने बीजिंग में करीब सात से आठ महीने जैकी चैन स्टाइल कुंग फू सीखने के लिए गया हूं. सुबह चार से पांच बजे उठकर माइनस दस डिग्री तापमान में रोज प्रैक्टिस करता था. यह केवल फिल्म के लिए ही नहीं किया बल्कि आगे भी मैं ऐसे एक्शन को भारत में ला सकता हूं. मैंने चाइनीज भाषा भी सीखी है.

प्र. आपके करियर में इतने उतार-चढ़ाव आये, फिर भी आप डटे रहे और काम करते रहे, इसे कैसे देखते हैं?

ये सही है कि मैं छोटे शहर से आया था. लेकिन माता-पिता का सहयोग हमेशा रहा, उनके सपोर्ट के बिना मैं यहां तक नहीं पहुंच सकता था. काम मिलेगा, इसी विश्वास के साथ मैं यहां आया था और धीरे-धीरे रास्ते खुलते गए. मैं तो एक इंजीनियर था, पर मेरी कद-काठी को देखकर दोस्त हमेशा एक्टर बनने की सलाह देते थे. मैंने भी पढ़ाई पूरी करने के बाद सोचा कि चलो एक साल कोशिश करते हैं, अगर सही हुआ तो यही रहेंगे, नहीं तो वापस जायेंगे. एक साल कैसे सालों में बदल गया पता ही नहीं चला.

प्र. मुंबई आने के दौरान सबसे अधिक संघर्ष कहां था?

मैंने फिल्म की प्रोसेस को बहुत एन्जॉय किया है, लेकिन जब आप परिवार से दूर रहते हैं, तो आप अपनी सारी बातें फोन पर ही शेयर कर पाते हैं, ऐसे में आप उन्हें अच्छी बातें ही शेयर करते हैं. कठिनाइयों को आप बता नहीं पाते. वहीं अधिक ‘मिस’ करता था, वहीं संघर्ष था. यह सिर्फ मेरे लिए ही नहीं, बल्कि हर बाहर से आने वाले एक्टर कर लिए मुश्किल होता है.

प्र. इस फिल्म का प्रोडक्शन आप कर रहे हैं, निर्माता बनना कितना मुश्किल होता है?

ये सही है कि कठिन है, लेकिन मुझे करना था. मैंने जैकी चैन को बीजिंग से चार्टेड प्लेन से मुंबई लाया, मुझे याद आता है जब मैं पहली बार मुंबई आया था तो मेरे पास टिकट का रिज़र्वेशन नहीं था. मैं लुधियाना से चलने वाली डिलक्स ट्रेन के चालू टिकट में आया था. इस तरह ये जर्नी बुरी नहीं है, भले ही मैं बड़े स्टार लिस्ट में शामिल नहीं हुआ हूं, लेकिन जो भी मेरी जिंदगी में हुआ है, उस दौरान मुझे सीखने को बहुत कुछ मिला है. मैंने इस फिल्म की डिस्ट्रीब्यूशन को भी संभाला हुआ है. फिल्म को बनाना एक ‘थीसिस’ लिखने जैसा है, जिसे एक पेन से लेकर हॉल तक जाकर खत्म होती है. इसका श्रेय मैं अपने पिता को देता हूं, जो एक व्यवसायी थे, ‘सेल्फ मेड’ थे. उनका कुछ असर मुझपर भी पड़ा है. इसके अलावा मैंने बहुत काम सीखा हुआ है, जब मुंबई आया था तो काम कम था. उस दौरान मैंने कैमरे को पकड़ना, साउंड रिकॉर्डिंग, एडिटिंग आदि फिल्म की सारी बारीकियां सीख ली हैं. मेरे घर में इस तरह की कई किताबें भी रखी हुई हैं. मैं इंजीनियरिंग बैकग्राउंड का हूं और मुझे सीखने की बहुत इच्छा रहती है. जिसका लाभ अब मुझे मिल रहा है.

प्र. क्या जीवन में कोई मलाल रह गया है?

(भावुक होकर) जिंदगी में मलाल यही रहेगा कि जो सफलता मुझे मिली, मेरे माता-पिता उसे देखने के लिए नहीं रहे.

प्र. क्या कोई ड्रीम प्रोजेक्ट है?

मैं एक बायोपिक बनाना चाहता हूं.

प्र. परिवार के साथ समय कैसे बिता पाते हैं?

मैं बहुत व्यस्त रहता हूं, लेकिन समय मिलने पर परिवार के साथ रहता हूं.

प्र. आपकी फिटनेस का राज क्या है?

मेरी फिटनेस की वजह मेरे मुंह पर एक जिप का लगना है, जो कुछ भी खाने नहीं देती. मैं पूरे दिन में तीन घंटे जिम करता हूं, कितना भी व्यस्त रहूं, जिम अवश्य जाता हूं.

प्र. यूथ के लिए क्या मेसेज देना चाहते हैं?

मैं यूथ से यह दुआ करता हूं कि सपने आप देखे, पर मेहनत खूब करें. सपने अगर टूटते हैं, तो अपने आप को और अधिक मजबूत करना सीखे. साथ ही यह सिद्ध करने की कोशिश करें कि दुनिया की कोई भी ताकत आपको आगे बढ़ने से रोक नहीं सकती. कर्म करते रहें, फल अपने आप मिल जायेगा.