सरिता विशेष

छोटी सी उम्र में दिल्ली से मुंबई जैसे महानगर में कदम रखने वाली दिशा को बंधीबंधाई परिपाटी पर चलना पसंद नहीं. उन्हें बचपन से ही सजनेसंवरने का शौक था. इसीलिए उन्होंने ऐक्टिंग को अपना कैरियर बनाया. स्लिमट्रिम दिशा की सादगी उन के कपड़ों और मेकअप से साफ झलकती है. हैवी मेकअप से परहेज करने वाली दिल्ली की दिशा पर ऐक्टिंग का ऐसा जनून सवार हुआ कि 16 साल में ही पढ़ाई को अलविदा कह ऐक्टिंग से नाता जोड़ लिया. दिल्ली की गलियों में शौपिंग करने और दहीभल्ले खाने के मजे को दिशा मुंबई आने पर बहुत मिस करती हैं. शो ‘प्यार का दर्द है मीठामीठा, प्याराप्यारा’ से अपने कैरियर की शुरुआत करने वाली दिशा से उन के नए शो ‘कोई अपना सा’ के इवैंट पर मुलाकात के दौरान कुछ सवाल जवाब हुए:

कम उम्र में ऐक्टिंग की शुरुआत से बीच में पढ़ाई छोड़ने का कोई असर पड़ा?

मैं जब 12वीं कक्षा में थी तभी मुझे पहला शो मिल गया. तब मुझे पढ़ाई और ऐक्टिंग में से एक को चुनना पड़ा, क्योंकि दोनों एकसाथ नहीं हो सकते थे. लेकिन मैं मानती हूं कि ऐक्टिंग के लिए पढ़ाई जरूरी नहीं है. हमारी इंडस्ट्री में कई ऐसे सितारे हैं, जो कम पढ़ेलिखे होने के बावजूद आज बुलंदियों पर हैं. आमिर खान को ही देख लीजिए. वे 12वीं कक्षा पास हैं पर फिल्म इंडस्ट्री में टौप पर हैं. ऐक्टिंग पढ़ाने वाली चीज नहीं है और न ही इसे कोई सिखा सकता है. यह तो सैल्फ ग्रूमिंग से ही आती है.

तो जो एनएसडी और एफटीआईआई से आते हैं वे कौन होते हैं?

मैं आप की बात मानती हूं कि एनएसडी में अभिनय की बारीकियों को सिखाया जाता होगा, लेकिन आप ही बताएं कि कितने लोग हैं, जो एनएसडी और एफटीआईआई से निकल कर फिल्मों में हैं. इन की संख्या बहुत कम है. ज्यादातर को मौका नहीं मिलता. हालांकि मैं उन्हें अपने से बहुत अच्छा कलाकार मानती हूं. लेकिन उस कला का क्या फायदा जिसे दिखाने का मौका ही आप को न मिले.

थिएटर के मुकाबले टीवी में काम करना कितना आसान है?

मुझे थिएटर का ज्यादा ऐक्सपीरिएंस नहीं है, क्योंकि मैं ने बचपन में ही स्कूल थिएटर में भाग लिया था. मुझे नौनस्टौप बोलने से बड़ा डर लगता है. सैकड़ों की भीड़ में बिना कट के बोलना बहुत ही कठिन काम है. लेकिन टीवी में भी काम करना उतना आसान नहीं है. हफ्ते में रोज 12 से 14 घंटे बिना रुके शूटिंग करना कोई आसान काम नहीं. हम लोग एक दिन में 12 सीन तक शूट करते हैं, क्योंकि डेली सोप की शूटिंग रोज होती है. इस में तो हमें यह भी मालूम नहीं होता कि अगले दिन कहानी में क्या बदलाव आने वाला है. डेली सोप में किसी तरह की तैयारी करने का या रोल पर खास वर्क करने का समय नहीं मिलता है, क्योंकि शौट से 15 मिनट पहले ही स्क्रिप्ट हाथ में दी जाती है. तभी पता चल पाता है कि क्या करना है. लेकिन फिल्मों में ऐसी मारामारी नहीं है. वहां एक दिन में एक ही सीन शूट हो पाता है.

रिश्तों में कितना विश्वास रखती हैं?

हर शख्स का किसी न किसी से रिश्ता जरूर है. मैं व्यक्तिगत जीवन में रिश्तों को बहुत महत्त्व देती हूं. मैं आज भी अपना कोई भी काम मम्मीपापा से पूछे बिना नहीं करती. फिर हमारा शो भी रिश्तों के तानेबाने पर आधारित है, जिस में मेरा जाह्नवी का कैरेक्टर भी बहुत कुछ मेरी निजी जिंदगी के करीब है. मैं भी जाह्नवी की तरह भूत, भविष्य में विश्वास नहीं करती. बिंदास हूं, कमजोर नहीं और न ही जीवन की कठिनाइयों में आंसू बहाती हूं.

पंखुड़ी से जाह्नवी किस तरह अलग है?

दोनों में जमीनआसमान का अंतर है. ‘प्यार का दर्द है’ की पंखुड़ी तो बिलकुल ही बात नहीं करती थी. हमेशा गुमसुम सी खयालों में खोई रहती थी पर जाह्नवी ठीक इस के विपरीत है. वह कभी चुप नहीं बैठती. हमेशा फिल्मों का कोई न कोई डायलौग सुनाती रहती है. हां, जो दोनों में समानता है वह है फैमिली को प्यार करना. मैं निजी जिंदगी में पंखुड़ी के ज्यादा करीब हूं, क्योंकि मैं बहुत सीधीसादी सिंपल गर्ल हूं. मुझे ज्यादा शो औफ करना और बोलना पसंद नहीं है. शुरू में तो बहुत ही कम बात करती थी. अब जब सैट पर जाने लगी हूं, तो बोलने भी लगी हूं.

पहले शो के बाद 3 साल तक कहां गायब रहीं?

यह 3 साल का ब्रेक मैं ने कुछ प्लान करने के लिए ही लिया था पर वह प्लानिंग फेल हो गई, इसलिए वापस टीवी में आ गई. इस के पहले मेरे पास ‘गुलाम’ और ‘एक था राजा एक थी रानी’ के भी प्रस्ताव आए थे, लेकिन फाइनली मैं उन का हिस्सा न बन सकी. लेकिन मैं जैसी कहानी चाहती थी वैसी जब मुझे इस शो की लगी, तो मैं ने तुरंत हां कर दी.

आप अपने होने वाले जीवनसाथी में क्या देखेंगी?

अभी तो ऐसा कुछ नहीं सोचा है. हां, अगर कोई मिलता है तो मैं चाहूंगी कि वह तमीज वाला जरूर हो. वह सच्चा हो, दूसरों की इज्जत करने वाला हो, क्योंकि मुझे घर में बचपन से यही सिखाया गया है कि अगर इज्जत दोगे तो इज्जत मिलेगी और यही मैं अपने पार्टनर में चाहती हूं.

कोई फिल्म मिलती है तो किस तरह का रोल करने की तमन्ना है?

मैं फिल्म ‘दिलवाले दुलहनिया ले जाएंगे’ में सिमरन वाला रोल करना चाहती हूं. जब यह फिल्म आई थी तब मैं बहुत छोटी थी, लेकिन तब से ले कर अब तक मैं इसे कई बार देख चुकी हूं. काजोल और शाहरुख की मैं बहुत बड़ी फैन हूं.

खाली समय में क्या करती हैं?

मुझे शौपिंग करना बहुत पसंद है. जब भी मौका मिलता है, तो शौपिंग करने निकल जाती हूं. मैं फैशन ट्रैंड पर नजर रखती हूं और अपडेट रहती हूं. ट्रैंड में रहना ही मेरा स्टाइल मंत्र है. कुछ भी मैं नहीं पहन सकती. मैं ऐसे कपड़े पहनती हूं जिन में सहज महसूस कर सकूं. हैवी मेकअप मुझे बिलकुल पसंद नहीं है. अपना ज्यादा समय अपने साथी कलाकारों के साथ बिताती हूं, इसलिए कि वे सभी मेरे दोस्त हैं.