सरिता विशेष

अपने समय की मशहूर अदाकारा सायरा बानो व ट्रैजिडी किंग दिलीप कुमार की भतीजी शाहीन बानो की बेटी सायशा सैगल को अभिनय विरासत में मिला है. तभी तो महज 19 साल की उम्र में सायशा सैगल एक तेलुगू फिल्म ‘अखिल’ में अभिनय करने के अलावा अजय देवगन निर्देशित हिंदी फिल्म ‘शिवाय’ में अनुष्का का किरदार निभा कर अपनी एक अलग पहचान बनाने में कामयाब रही हैं. मजेदार बात यह है कि सायशा सैगल ने सब से पहले हिंदी फिल्म शिवाय अनुबंधित की थी. मगर जब यह फिल्म एक वर्ष के लिए रुक गई तो उस बीच उन्होंने तेलुगू फिल्म ‘अखिल’ कर ली. इन दिनों वे एक तमिल फिल्म ‘कुमारी कंदम’ में अभिनय कर रही हैं.

आप सलमान खान की होमप्रोडक्शन फिल्म से बौलीवुड में कैरियर शुरू करने वाली थीं?

मैं ‘शिवाय’ से अपना कैरियर शुरू कर के खुश हूं. सलमान सर मुझे ले कर कोई फिल्म कभी नहीं बना रहे थे, पर मैं उन से सलाह लेती रहती हूं. वे हमारे पारिवारिक मित्र हैं, भविष्य में उन के साथ फिल्म करना चाहूंगी. अब तो अजय देवगन सर भी परिवार की तरह हो गए हैं.

आप की पहली बौलीवुड फिल्म ‘शिवाय’ प्रदर्शित हो चुकी है. किस तरह की प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं?

मैं बहुत खुश हूं कि मुझे बौलीवुड के मशहूर अभिनेता अजय देवगन के साथ फिल्म ‘शिवाय’ से अभिनय कैरियर शुरू करने का अवसर मिला. इस फिल्म का निर्देशन भी अजय देवगन सर ने किया है. हम ने इस फिल्म की शूटिंग बुल्गारिया में की थी. इस में काफी खतरनाक स्टंट सीन्स भी हैं. यह बहुत महंगी फिल्म है. मुझे इस फिल्म से जिस तरह की उम्मीद थी उस से कहीं ज्यादा अच्छी प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं. लोग फिल्म व उस की कहानी के साथसाथ फिल्म में मेरे किरदार अनुष्का की भी काफी तारीफ कर रहे हैं.

यों तो मेरी पहली तेलुगू फिल्म ‘अखिल’ 2015 में प्रदर्शित हो गई थी. फिल्म ने काफी सफलता बटोरी थी. इस के बावजूद फिल्म ‘शिवाय’ के प्रदर्शन से पहले मैं बहुत नर्वस थी, लेकिन अब जिस तरह से दर्शकों ने मुझे स्वीकारा है. उस से मेरा हौसला बढ़ गया है.

पर लोग ‘शिवाय’ की दूसरी अभिनेत्री एरिका कर की भी प्रशंसा कर रहे हैं?

जी हां, मैं ने पहले ही कहा कि लोग पूरी फिल्म की तारीफ कर रहे हैं. आप ने तो फिल्म देखी है. इसलिए आप को भी पता है कि हम दोनों के किरदार बहुत अलग हैं. हम दोनों ने ही इस फिल्म के लिए काफी मेहनत की है. मगर आप इस बात को मानेंगे कि मुझे इस फिल्म में अपनी प्रतिभा को दिखाने का काफी मौका मिला. मैं भी कई खतरनाक दृश्यों का हिस्सा हूं. लोगों ने मेरे किरदार को इसलिए भी ज्यादा पसंद किया, क्योंकि मैं ने इस में एक भारतीय लड़की अनुष्का का किरदार निभाया है जोकि बुल्गारिया में रहते हुए भी भारतीय संस्कारों से ओतप्रोत है. फिल्म ‘शिवाय’ ने मुझे सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी स्टार अभिनेत्री बना दिया है.

जब अजय देवगन ने इस फिल्म के लिए आप से संपर्क किया था, तो आप की पहली प्रतिक्रिया क्या थी?

सच यह है कि मैं खुद अजय देवगन सर से मिलने गई थी. मैं तो बचपन से ही अभिनेत्री बनना चाहती थी. जब मैं 9 वर्ष की थी, तभी से मेरी मम्मी ने मुझे नृत्य की शिक्षा दिलवानी शुरू कर दी थी. मैं ने ओडिशी, कत्थक, बेले, हिपहौप सहित कई प्रकार के नृत्य सीखे हैं. इन दिनों मैं जिमनास्टिक सीख रही हूं. मैं ने लंदन और ब्राजील में लैटिन अमेरिकन नृत्य की ट्रेनिंग ली. मैं ने लंदन के अलावा दक्षिण अफ्रीका में स्टेज शो भी किए. फिर स्कूल की पढ़ाई खत्म करने के बाद मेरे दिमाग में फिल्मों में अभिनय करने का खयाल आया, तो मैं ने लोगों से मिलना शुरू किया. लेकिन जब मैं अजय देवगन सर से मिली, तो उन्होंने बताया कि वे फिल्म ‘शिवाय’ पर काम कर रहे हैं. मुझे लगा कि यह फिल्म मुझे बड़ी आसानी से मिल जाएगी, पर ऐसा नहीं हुआ. मुझे इस फिल्म के लिए पूरे 6-7 घंटे का लंबा औडिशन देना पड़ा. उस के बाद ही मेरा चयन हुआ, पर मेरे लिए इस फिल्म का मिलना बहुत बड़ी उपलब्धि रही. फिल्म ‘शिवाय’ मेरे लिए हमेशा यादगार रहेगी, क्योंकि मुझे यह फिल्म मेरे 17वें जन्मदिन पर मिली थी.

बतौर निर्देशक अजय देवगन किस तरह के निर्देशक लगे?

वे एक सुलझे हुए इंसान, बेहतरीन निर्देशक व अभिनेता हैं. उन्हें फिल्म मेकिंग का अच्छा अनुभव है. अभिनेता बनने से पहले उन्होंने सहायक निर्देशक के रूप में काम किया था. इसलिए वे अच्छे तकनीशियन भी हैं. दूसरी बात उन्होंने खुद फिल्म की स्क्रिप्ट लिखी है तो उन के दिमाग में स्पष्ट था कि उन्हें किस दृश्य में कलाकार से क्या चाहिए. वे तो हमें कई बार खुद अभिनय कर के भी बताते थे कि वे क्या चाहते हैं.

फिल्म ‘शिवाय’ देख कर आप के परिवार वालों की क्या प्रतिक्रिया रही?

मेरी मां शाहीन बानो की फूफी नानी सायरा बानो बहुत खुश हैं. उन्हें मेरा काम पसंद आया है. मेरे फूफा नाना यानी कि दिलीप कुमार ने अब तक फिल्म नहीं देखी है. उन की तबीयत ठीक नहीं चल रही है पर जैसे ही वे ठीक हो जाएंगे, मैं उन्हें यह फिल्म दिखाना चाहूंगी.

फिल्म ‘शिवाय’ में आप के बाथ टब स्नान के दृश्य की काफी चर्चा है?

खूबसूरती की चर्चा होनी चाहिए. यह दृश्य कहीं से भी अश्लील नहीं है बल्कि यह दृश्य पटकथा का अहम हिस्सा है. मुझे अश्लीलता व नंगेपन से परहेज है. मुझे किसिंग या इंटीमेट सीन देने से परहेज नहीं है. फिल्म की हीरोइन को ग्लैमरस होना ही चाहिए. मैं किसी भी फिल्म में स्विमिंग सूट या टूपीस बिकिनी सहजता से पहन सकती हूं, पर अश्लील दृश्यों को कभी भी अंजाम नहीं दूंगीं.

पर बोल्ड दृश्य हों तो?

जब तक अश्लीलता नहीं है, तब तक मैं कर सकती हूं. लेकिन बोल्ड दृश्य करना है या नहीं, यह बात निर्देशक और सह कलाकार कौन है इस बात पर भी निर्भर करेगी. कुछ निर्देशक हर दृश्य को बड़ी कलात्मकता के साथ फिल्माते हैं, जबकि कुछ निर्देशकों के दिमाग में तो नंगापन ही रहता है. मैं ऐसे निर्देशकों से दूरी बना कर रखना चाहूंगी. मैं उस दृश्य को कभी अंजाम नहीं दे सकती, जहां मैं खुद को सहज नहीं पाऊंगी.

आप फिल्मी परिवार से हैं. इसलिए आप के लिए सबकुछ बहुत आसान रहा?

मेरी राय में हम फिल्मी परिवारों से आने वाले कलाकारों से लोगों को कुछ ज्यादा ही उम्मीदें होती हैं. उन उम्मीदों को पूरा करने का हम पर दबाव होता है. माना कि किसी स्टार की बेटी होने की वजह से हमें निर्मातानिर्देशकों से मिलने का मौका आसानी से मिल जाता है. मगर हमें अपनी प्रतिभा को साबित करना पड़ता है. यहां महज पहचान या रिश्तेदार होने की वजह से किसी को काम नहीं मिलता, क्योंकि फिल्म कला के साथसाथ व्यापार भी है. एक फिल्म के निर्माण में कई करोड़ रुपए लगते हैं. जहां तक मेरी जानकारी है फिल्म ‘शिवाय’ का बजट 100 करोड़ से अधिक है. इतनी बड़ी लागत वाली फिल्म में महज किसी कलाकार की बेटी या फिल्मी परिवार की सदस्य होने की वजह से काम नहीं दिया जा सकता.

अब आप तमिल व तेलुगू फिल्मों को अलविदा कह देंगी या…?

अलविदा कहने का मेरा कोई इरादा नहीं है. मैं हर भाषा की फिल्में करना चाहती हूं. बशर्ते उस की कहानी बेहतरीन हो और निर्देशक अच्छा हो. फिलहाल तो मेरे हिस्से हिंदी, तमिल व तेलुगू तीनों भाषाओं की बेहतरीन फिल्में आ रही हैं.

लेकिन मैं ने सुना है कि आप पहले सिर्फ हिंदी फिल्में ही करना चाहती थीं?

जी हां, हम जिस माहौल में पलेबढ़े होते हैं, उसी माहौल में रमना चाहते हैं. मैं बचपन से ही बौलीवुड की फिल्में देखते हुए बड़ी हुई हूं. मैं ने बचपन में अपने पिता सुमित सहगल को भी हिंदी फिल्में करते हुए देखा है. मैं ने अपनी मम्मी शाहीन की फिल्में भी देखी हैं. मुझे अपनी मम्मी की फिल्म ‘आई मिलन की रात’ बहुत पसंद है. मैं ने 17 वर्ष की उम्र में हिंदी फिल्म ‘शिवाय’ ही अनुबंधित की थी और इसी फिल्म से मेरे अभिनय कैरियर की शुरुआत होनी थी. लेकिन कुछ वजहों से फिल्म ‘शिवाय’ एक वर्ष के लिए रुक गई थी. मेरे पास समय था पर उस वक्त दक्षिण भारत में काम करने का मेरा कोई इरादा नहीं था. मैं ने सोचा था कि मुझे सिर्फ हिंदी फिल्में ही करनी हैं, लेकिन जब तेलुगू फिल्म के निर्देशक वी वी विनायक मेरे पास तेलुगू फिल्म ‘अखिल’ का औफर ले कर आए तो इस फिल्म की कहानी ने मुझे इतना प्रभावित किया कि मैं ने हामी भर दी.

दूसरी बात इस फिल्म में दक्षिण भारत के सुपर स्टार नागार्जुन के बेटे अखिल हीरो थे. फिल्म ‘अखिल’ के प्रदर्शित होने पर जम कर तारीफ मिली और मुझे तमिल फिल्म ‘कुमारी कंदम’ मिल गई. मेरे पास इन दिनों कई फिल्मों के औफर हैं. मैं ने दक्षिण भारत में 2 फिल्मों के लिए हामी भरी है. एक हिंदी फिल्म भी करने वाली हूं, पर अभी इस की घोषणा होना बाकी है. ‘शिवाय’ के प्रदर्शन के बाद भी कुछ औफर मिले हैं, पर पटकथा पढ़ने के बाद ही निर्णय लूंगी.

लगता है आप भी अपनी मां शाहीन की तरह जल्द विवाह करने वाली हैं?

बिलकुल नहीं, मेरी मां ने बहुत जल्दी शादी कर ली थी. शादी के बाद उन्हें अभिनय को अलविदा कहना पड़ा. उस के बाद उन के साथ जो कुछ हुआ, उस को ले कर मैं चर्चा नहीं करना चाहती पर मैं और मेरी मां बहुत खुश हैं. मैं जल्द शादी करने के मूड में नहीं हूं. अभी तो मेरा कैरियर शुरू हुआ है. मुझे अभिनय जगत में बहुत काम करना है. मैं अपना सारा ध्यान अपने अभिनय कैरियर को संवारने में लगाना चाहती हूं.