सरिता विशेष

बौलीवुड में रणदीप हुड्डा की अपनी एक अलग पहचान है. वह विवादों से हमेशा दूर रहते हैं. वह एक बेहतरीन अभिनेता होने के साथ साथ एक पोलो टीम व कई घोड़ों के मालिक होने के साथ ही बेहतरीन घुड़सवार हैं. अभिनेत्री रिचा चड्ढा उन्हें एक मूड़ी कलाकार मानती हैं. बौलीवुड में फिल्म के असफल होते ही फिल्म से जुड़े लोग एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप की झड़ी लगा देते हैं.

20 मई को प्रदर्शित फिल्म ‘‘सरबजीत’’ की असफलता के लिए ऐश्वर्या राय बच्चन व फिल्म के निर्देशक के साथ साथ निर्माता तक पर कई आरोप लग चुके हैं. मगर  फिल्म ‘सरबजीत’ के लिए सर्वाधिक मेहनत करने वाले तथा फिल्म में सरबजीत का मुख्य किरदार निभाने वाले अभिनेता रणदीप हुड्डा ने चुप्पी साधे रखी. यहां तक कि ‘सरबजीत’ की सफलता की पार्टी में जब कुछ पत्रकारों ने रणदीप से ऐश्वर्या राय बच्चन व फिल्म के बारे में सवाल किया, तो वह चुप रहे. बार बार सवाल पूछे जाने पर वह पत्रकारों पर ही भड़क उठे. उसके बाद पत्रकारों के बीच आम धारणा बन गयी कि रणदीप हुड्डा फिल्म ‘सरबजीत’ को लेकर कोई बात नहीं करना चाहते.

लेकिन फिल्म ‘‘दो लफ्जों की कहानी’’ के प्रमोशन के दौरान ‘‘सरिता’’ पत्रिका से एक्सक्लूसिव बात करते हुए रणदीप हुड्डा ने फिल्म ‘‘सरबजीत’’ को लेकर  खुलकर बात की. जब मैंने उनसे पूछा कि, ‘‘फिल्म ‘सरबजीत’ को बाक्स आफिस पर जो सफलता मिलनी चाहिए थी, वह नहीं मिली. आपको नहीं लगता कि फिल्म को सही ढंग से प्रमोट नही किया गया?’’ तब रणदीप हुड्डा ने एक समझदार इंसान व एक प्रोफेशनल कलाकार की तरह मेरे इस सवाल का जवाब देते हुए कहा-‘‘इस बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता. फिल्म को प्रमोट करने का जिम्मा किसी और का है. उसे जज करना मेरा काम नहीं है. मेरा काम अभिनय करना है और वह मैं जी जान लगाकर कर लेता हूं. फिल्म को किस तरह से रिलीज किया जाए, यह मेरा काम नही है. फिल्म को कैसे प्रमोट किया जाए, यह भी मेरा काम नहीं है. मैं सिर्फ अपनी फिल्म के बारे में ज्यादा से ज्यादा मीडिया से बात कर सकता हूं, वह मैं करता रहता हूं. मैं अपनी तरफ से किसी भी फिल्म को प्रमोट करने में कोई कसर नहीं छोड़ता हूं. ’’

रणदीप हुड्डा ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा-‘‘सच कहूं तो मैं कोई भी फिल्म प्रोडक्शन हाउस का नाम देखकर स्वीकार नहीं करता हूं. मैं सबसे पहले फिल्म की पटकथा, उसके बाद किरदार और फिर निर्देशक के नाम पर गौर करता हूं. प्रोडक्शन हाउस तो सबसे अंत में आता है. फिल्म ‘सरबजीत’ के जो निर्माता हैं, उनमें अनुभव की कमी है. उनके पास वह ताकत नही है, जिससे वह फिल्म को सही प्लेटफार्म दे सकें. नए लोग होने की वजह से सही लोगों के साथ उनका जुड़ाव कम है. पर मेरा अपना मानना है कि हर फिल्म अपने दर्शक ढूंढ़ ही लेती है. कभी वह आसानी से जल्दी ढूंढ़ लेती है, तो कभी लंबा समय लेकर. लेकिन हर फिल्म अपने दर्षकों तक पहुंच जाती है.

फिल्म सिर्फ सिनेमा घर नहीं,बल्कि डीवीडी, कभी टीवी,तो कभी इंटरनेट के द्वारा अपने दर्शक तक पहुंच जाती है. इस तरह से मेरा काम भी लोगों तक पहुंच जाता है. तो मुझे इस बात का अफसोस नहीं होता कि मैंने मेहनत की और मेरा काम लोगों तक नहीं पहुंचा. यदि कोई फिल्म बाक्स आफिस पर सुपर डुपर हिट हो जाए, तो भी एक कलाकार के तौर पर मुझे कोई पैसे मिलने वाले नहीं होते हैं. मेरे लिए सिर्फ इतना जरूरी होता है कि मेरा काम दर्शकों तक पहुंच जाए. पर अब वह किसी न किसी माध्यम से पहुंच जाता है. मैं आज दावे के साथ कह सकता हूं कि पचास साल बाद भी यदि किसी ने रणदीप हुड्डा के बारे में जानना चाहा, तो उसे मेरे बारे में, मेरी फिल्मों के बारे में जरूर पता चल जाएगा. अब तो इंटरनेट का जमाना है, एक बटन दबाया, सब कुछ सामने होता है. मेरी राय में जिस तरह की फिल्म ‘सरबजीत’ बनी है,उस हिसाब से वह अच्छा बिजनेस कर रही है.’’

अब रणदीप हुड्डा ने फिल्म ‘‘सरबजीत’’ की असफलता के लिए अपरोक्ष रूप से किसे दोषी ठहराया, किसे नहीं, इसका अंदाजा तो लगाया ही जा सकता है.