‘फाइव पौइंट समवन’, ‘वन नाइट ऐट कौल सैंटर’, ‘टू स्टेट्स’, ‘थ्री मिस्टेक्स इन माई लाइफ’ जैसे बहुचर्चित उपन्यासों से प्रसिद्ध हुए उपन्यासकार, पटकथा लेखक और स्तंभकार चेतन भगत आज सैलिब्रिटी लेखक बन चुके हैं. चेतन शांत स्वभाव के हैं और हमेशा जमीन से जुड़े रहना चाहते हैं. वे आम लोगों के बीच रह कर कहानियां लिखना पसंद करते हैं ताकि लोग उन से जुड़ सकें. अभी वे एक रिऐलिटी शो भी होस्ट कर रहे हैं, पेश हैं उन से हुई बातचीत के अंश :

आज की जैनरेशन रिश्तों को कितनी अहमियत देती है? आप के हिसाब से रिश्तों को संभालना कितना जरूरी है?

‘रियल 2 स्टेटस कपल्स’ शो में इसी को दिखाने की कोशिश की गई है. इस में रियल कपल्स दिखाए जाएंगे जो शादीशुदा नहीं हैं पर शादी करने वाले हैं. वे एकदूसरे के परिवार को थोड़ा सा ही जानते हैं या नहीं जानते हैं, वे कैसे उन्हें राजी कराते हैं, ये सब दिखाया जाएगा. मैं इस में सूत्रधार हूं और उन के द्वारा की गई गलतियों को सुधारने के लिए चर्चा करता हूं.

मैं ने इस दौरान यह नोटिस किया है कि आज के युवा के लिए यह जरूरी है कि अगर वे शादीशुदा जीवन अच्छा बिताना चाहते हैं तो, लड़का हो या लड़की, परिवार का दिल जीतें. उस के लिए वे कोशिश करने के लिए तैयार भी रहते हैं. रिश्ते आप को ताकत देते हैं, उन्हें संभालना जरूरी है. लेकिन कैसे? इस का आकलन आप को ही करना पड़ता है.

इस तरह का शो करते हुए आप कितना योगदान देते हैं?

मैं अधिक राय कभी भी नहीं देता, क्योंकि जो शो करता है उस के दिमाग में एक खाका पहले से ही तैयार होता है जिसे मैं परदे पर ला रहा हूं.

बदलते समाज ने पतिपत्नी के रिश्तों की परिभाषा को कितना बदला है, क्योंकि आजकल तलाक की संख्या अधिक बढ़ रही है?

आज के युवा अपनी जरूरतों के बारे में काफी सजग हैं. उन्हें जो चाहिए होता है, वे कैसे भी उसे पाना चाहते हैं. ऐसे में वे चाहते हैं कि उन के पार्टनर से भी वही मिले जिस की उन्हें दरकार है और अगर नहीं मिला तो वे रिश्तों को छोड़ देते हैं. समाज आजकल आत्मनिर्भर हो रहा है. महिलाएं और पुरुष दोनों ही सशक्त हो रहे हैं. उन्हें अगर अपने मनमुताबिक सहयोग अपने पार्टनर से नहीं मिलता तो वे उसे बदलने से हिचकिचाते नहीं. तलाक को कलंक या निषेध समझने की सोच धीरेधीरे कम होती जा रही है. मेरे हिसाब से हर किसी की यह कोशिश होनी चाहिए कि शादी न टूटे, लेकिन यह भी सही है कि जो रिश्ता बोझ लगे, उस से निकल जाना ही बेहतर होता है और आज लोग सोचसमझ कर ही फैसला लेते हैं.

महिला सशक्तीकरण के नाम पर महिलाएं कहीं अधिक पावरफुल तो नहीं हो रही हैं, जिस से समाज को समस्या हो रही है?

यह सही है कि महिलाएं आजकल वित्तीय रूप से सक्षम हो रही हैं लेकिन समाज उसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है. मेरी जो अगली किताब है, जिस में मैं लड़की बन कर कहानी लिख रहा हूं, वह इसी बारे में है कि हम लड़कियों को कहते हैं कि आप कुछ भी कर सकती हो. फिर जब वह बहुतकुछ बन जाती है तो हम कहते हैं कि वह रोटी क्यों नहीं बनाती. समाज आज लड़कियों को बराबरी का दरजा देने को कहता है पर उसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं होता.

आप अपनी अब तक की यात्रा को कैसे देखते हैं?

मैं खुश हूं कि जहां भी मैं ने कोशिश की है वहां काम मिला. बहुत कम लेखक होते हैं जिन्हें इतनी शोहरत मिलती है. बड़ी संख्या में लोगों ने मेरी किताबों को पढ़ा, फिल्में बनीं और अब टीवी पर भी आ गया हूं. हर माध्यम से मैं लोगों से जुड़ पा रहा हूं. आज भी मैं बहुत मेहनत करता हूं. हर कहानी को अपनी पहली कहानी समझ कर लिखता हूं. कुछ भी लिख दूं, यह नहीं सोचता, हमेशा नया विषय, नई कहानी खोजता हूं.

बौलीवुड में नया क्या कर रहे हैं? आप की किताबों पर आधारित फिल्म बनने पर आप कितना सहयोग देते हैं?

अभी मेरे नौवल ‘हाफ गर्लफैंड’ पर फिल्म बन रही है. मोहित सूरी उस के निर्देशक हैं. बहुत आशाएं हैं. मैं निर्देशक के ऊपर सब छोड़ देता हूं. उन की फिल्म है, इसलिए उन की सोच ही मेरी सोच होती है. कभीकभी कुछ वे पूछ लेते हैं, अगर लगता है तो कुछ राय देता हूं.

बौलीवुड में आजकल फिल्मों की कहानियों का दौर बदल रहा है. अलग तरह की फिल्में भी कामयाब हो रही हैं. इस बारे में आप की राय क्या है?

मेरे जैसे लेखकों के लिए अच्छा दौर है. आजकल केवल ग्लैमर ही नहीं, कंटैंट को भी लोग देखते हैं. कंटैंट की अहमियत बढ़ने से अच्छे लेखकों को अधिक अवसर मिलते हैं, उन की मांग बढ़ती है. फिल्म निर्माताओं को पता चल चुका है कि अगर कंटैंट सही नहीं है, तो कितना भी ग्लैमर डाल दो, फिल्में नहीं चलतीं.

खाली समय में क्या करना पसंद करते हैं?

मेरे जुड़वां 11 साल के बच्चे श्याम और इशान हैं, उन के साथ खेलता हूं, कहीं बाहर जाना पसंद करता हूं. मेरे बच्चे बड़े हो रहे हैं, मैं चाहता हूं जितना समय उन के साथ बिता सकूं, अच्छा रहेगा. मैं और मेरी पत्नी बच्चों को हमेशा धरातल पर रखना पसंद करते हैं.

क्या आप को लगता है कि हिंदी सिनेमा जगत में लेखकों को अच्छा पैसा और मान मिल रहा है? क्या आप को भी अपने काम के हिसाब से मेहनताना मिला?

थोड़ाबहुत मिल रहा है. पहले कहानियां इतनी मौडर्न नहीं होती थीं. अब जो अच्छे लेखक बौलीवुड के हैं उन के पास बहुत काम है. काम इतना अधिक है कि वे कर नहीं पाते. उन की संख्या हालांकि कम ही है, फिर भी ‘पीकू’ की लेखिका जूही चतुर्वेदी आजकल काफी पौपुलर हो चुकी हैं. उन के पास काम की कमी नहीं. मुझे भी ठीक पैसा मिला है. आज से 7 साल पहले जब मैं आया था, तब मुझे कोई नहीं जानता था. आज सब पहचानते हैं. साहित्यकार नहीं बना पर मेरी कहानियां लोगों को छू गई हैं.

सफलता के बाद आप की जिंदगी कितनी बदली है?

जिंदगी में थोड़ा बदलाव तो आया ही है. परिवार के लिए समय नहीं मिलता. कई बार लाइफ का बैलेंस खराब हो जाता है. मेरा काम लोगों तक अपनी सोच को पहुंचाना है, चेहरे को नहीं.

अपनी कहानियों के अलावा किस लेखक को पढ़ना पसंद करते हैं?

मैं बहुत सारे लेखकों को पढ़ता हूं. विक्रम सेठ, अरुंधती राय, अमिताभ घोष, जुम्पा लाहिड़ी आदि सभी नामचीन लेखकलेखिकाओं को पढ़ चुका हूं.      –