सरिता विशेष

15 साल से टीवी जगत की ‘क्वीन’ बनी अभिनेत्री कविता कौशिक ने 20 साल पहले निगेटिव भूमिका निभाकर अपने करियर की शुरुआत की थी. लेकिन उन्होंने धारावाहिक ‘एफआईआर’ में चंद्रमुखी चौटाला बन अधिक प्रसिद्धी पाई. नकारात्मक भूमिका से उन्हें अवार्ड, खूब पैसा, गाड़ी मकान सब मिला. टीवी पर उनका खूब नाम भी था, वह एक साथ तीन–तीन शो किया करती थी, जिसमें ‘कुटुंब’, ‘कहानी घर घर की’ ,’कुमकुम’ आदि सभी एकता कपूर की धारावाहिकों में काम करती रही, पर एक मलाल उनके अंदर था, कि उन्होंने पिता के पुलिस ऑफिसर बनने के सपना को पूरा नहीं किया. स्वभाव से बोल्ड कविता को तब बहुत अच्छा लगा जब उन्हें लीक से हटकर ‘एफआईआर’ में पुलिस ऑफिसर बन कॉमेडी करने का मौका मिला. दर्शको ने उनके काम की प्रशंसा की.

वह कहती हैं कि मेरे पिता आर्मी ऑफिसर थे, उनकी इच्छा थी कि मैं पुलिस ऑफिसर बन वर्दी पहनू. मैं उनकी इकलौती संतान हूँ. जब मुझे चंद्रमुखी चौटाला निभाने का अवसर मिला, तो मैं खुश हुई और उन्हें कहा कि अब आप मुझे टीवी पर वर्दी में देखिये और उन्हें ख़ुशी भी मिली कि मैं बहुत अच्छा काम कर रही हूँ.

हालाँकि यह अभिनय कठिन था ,क्योंकि इससे पहले मैंने कभी कॉमेडी नहीं की थी पर धीरे- धीरे सब ठीक हुआ और अब मैं फिर से एक कॉमेडी धारावाहिक कर रही हूँ. ’डॉ.भानुमती ओन ड्यूटी’ सब टीवी पर प्रसारित होने वाला यह कॉमेडी शो है, इसमें मेरा चरित्र बड़ा ही ग्रेसफुल है. मैं आर्मी की डॉक्टर हूँ, कुछ भी करने के लिए तैयार हूँ, हमेशा सबकी मदद करना चाहती हूँ. चंद्रमुखी बदतमीज़ थी, कभी कभी किसी को डांट या मार भी देती थी, पर ये किरदार एकदम अलग है.

कोई चरित्र आपको कितना प्रभावित करता है? पूछे जाने पर कविता हंसती हुई कहती है कि बहुत प्रभावित करता है, मैं आज रास्ते मैं कोई गलत बात नहीं देख सकती और हो भी क्यों न? जब आप किसी भूमिका को सालों से निभाते हैं तो आपको उसमें जीना पड़ता है, तभी आप उसे कर सकते हैं. मैंने चंद्रमुखी चौटाला की भूमिका करीब नौ सालों तक निभाई थी. सिर्फ मैं ही नहीं मेरे चरित्र से कई महिलाएं भी प्रेरित हुई हैं. कई बार वे मुझसे मिलकर कहती हैं कि आप को देखकर हमने पुलिस में ज्वाइन किया है, हम आगे बढ़कर किसी की मदद करने में हिचकिचाते नहीं. ये बाते सुनकर ख़ुशी होती है और पिता की बातें याद आती है.

आजकल के धारावाहिकों में भूत प्रेत, बिच्छू, सांप बन जाना, चुड़ैल, दो बहनों में ईर्ष्या, सास का बहू को ताना देना, बहू को मार  देना, आदि की भरमार है, इस प्रकार की धारावाहिक कविता को पसंद नहीं, वह कहती हैं रियल लाइफ में कोई भी काम प्यार से ही होता है. पॉवर का इस्तमाल करने से नफरत का रास्ता तैयार होता है. आजकल लोगो में आक्रोश बहुत है, लोग कुंठित हैं, ऐसे में ऐसी धारावाहिके सही नहीं हैं. प्रोग्रेसिव धारावाहिक दिखाई जानी  चाहिए, रिग्रेस्सिव नहीं, क्योंकि टीवी समाज का आइना है. मुझे तो बिग बॉस का शो भी पसंद नहीं जिसमें लोगो के आचरण को गलत तरीके से दिखाया जाता है. टीवी घर पर सब साथ मिलकर देखते है जिसमें माता पिता भाई बहन बच्चे सब होते है. प्राइम टाइम में कुछ अच्छी चीजे दिखाई जानी चाहिए.

कॉमेडी ,कविता पसंद करती हैं पर दोहरी अर्थ वाले कॉमेडी पसंद नहीं करती. वह बताती है कि ‘चीप वल्गर कॉमेडी’ से हँसाना आसान होता है. टीनएजर्स और कुछ लोगो को पसंद आती है. नॉटी कॉमेडी मुझे पसंद है वही अगर वल्गरिटी में बदल जाये तो पसंद नहीं. कॉमेडी लिखना और करना आसान नहीं होता. कॉमेडी देखने से दिल खुश होना चाहिए. किसी का मजाक उड़ाना तब तक ठीक है जब तक कि उसे बुरा न लगे, किसी को बेईज्ज़त कर कॉमेडी, जो उसे आहत करें मुझे कतई पसंद नहीं. कॉमेडी में प्रतिभा की जरुरत होती है.

कविता कौशिक फिल्मो में आने की इच्छा रखती है, पर उसे वैसी भूमिका नहीं मिलती. अगर मिले तो अवश्य करेगी. वह अपने जीवन साथी के बारे में कहती है कि समय बदल गया है, रिश्तों में कमिटमेंट कम हो गया है, तकनीक जितनी जल्दी किसी रिश्ते को पास लाती है, उतनी ही जल्दी उससे दूर भी हो जाती है. मेरा काम, माता पिता, दोस्त, पर्सनल लाइफ सब बैलेंस हैं. मैं इससे खुश हूँ .डरती हूँ कि कोई मेरा गलत कदम इसे ख़राब न कर दे.

खाली समय में कविता खाना बनाती हैं, उन्हें कुकिंग, घूमना और गाना गाने का शौक है. उन्हें फैशन भी पसंद है. जब भी समय मिलता है, शौपिंग करती हैं. जीवन में खुश रहने का मंत्र वह अपने आप से संतुष्ट रहने को बताती हैं.