एक्शन फिल्मों में जबरदस्त भूमिका निभाने वाले अभिनेता विद्युत जामवाल ने मार्शल आर्ट की कठिन विधा ‘कलरिपैतु’ में डिग्री ली है. महज 3 साल की उम्र से ही विद्युत मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी था. इसके बाद उन्होंने करीब 25 शहरों में एक्शन शो किया है.

स्वभाव से विनम्र विद्युत आर्मी ऑफिसर के बेटे होने की वजह से पिता के ट्रान्सफर के साथ-साथ उन्हें हर जगह जाना पड़ा, लेकिन उन्होंने मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग नहीं छोड़ी. उन्हें बचपन में जैकी चैन की फिल्में देखना बहुत पसंद था. जिसकी भी फिल्म हिट होती, उसे वे अपना आइडियल मान लेते थें. जिसमें शाहरुख खान, अजय देवगन और अक्षय कुमार है. विद्युत ने बॉलीवुड के एक्शन हीरो के रूप में अपनी इमेज बना ली है. उनकी फिल्म कमांडो 2 रिलीज होने वाली है. वे अपनी फिल्म को लेकर बहुत उत्सुक हैं. पेश है उनसे हुई बातचीत के अंश.

इस फिल्म का मिलना कैसे हुआ?

सभी को ‘कमांडो’ का एक्शन इतना पसंद आया कि ‘कमांडो 2’ करना ही था. सबने मेरी एक्टिंग को काफी सराहा था. यह मुझे काफी अच्छा लगा. जब निर्देशक ने यह फिल्म बनाने की सोची तब उन्होंने सबसे पहले मुझे ही फोन लगाया और मैंने हां कर दिया.

इस फिल्म की खास आकर्षण क्या रही? कितना कठिन है ये फिल्म?

ये फिल्म मेरा अपना फ्रेंचाइज है. इसमें एक चुनौती ये रही कि मैं जो भी करूं, बेहतर करूं. इसकी स्टोरी अलग है. मैंने काफी मेहनत किया है. ‘कमांडो’ की पहली फिल्म में निर्माता ने एक नए लड़के को लिया था, जिसमें मुझे प्रूव करना था, लेकिन कमांडो 2 की कहानी से लेकर अभिनय सब अच्छी लगी थी. इसमें स्टंट बहुत कठिन है, इतने बड़े शरीर को लेकर एक खिड़की से निकलने वाला दृश्य बहुत कठिन था.

एक फिल्म के बाद दूसरी कितनी सफल होगी ये पता नहीं, ऐसे में आप कितना प्रेशर महसूस कर रहे हैं?

कमांडो 2 को बनाने में मैंने काफी समय लिया है. इसकी वजह यह थी कि ये फिल्म पहली फिल्म से भी बेहतर हो. मैंने मेहनत भी काफी की है, उम्मीद है फिल्म सफल होगी.

आर्मी बैकग्राउंड से होने की वजह से इस तरह की फिल्मों में काम करना कितना सहज होता है?

नॉन फिल्मी लोगों के लिए ये इंडस्ट्री बहुत मुश्किल है. आर्मी बैकग्राउंड से होने की वजह से मैं देश के हर कोने में गया हूं. इससे एक्सपोजर बहुत मिला है. फौजी का बेटा होने से आप हर तरह की परिस्थिति में अपने आप को सेट केर लेते है.

आप इंडस्ट्री की दिनचर्या में अपने आप को कैसे फिट करते हैं, क्योंकि आप फौजी बैकग्राउंड से हैं और मार्शल आर्ट को सीखा है?

मेरे लिए अनुसाशन का मतलब थोड़ा अलग है. मैं अपनी दिनचर्या को अपने हिसाब से तैयार कर लेता हूं. काम सब करता हूं, कुछ छूटता नहीं है. मेरे फादर नहीं हैं, एक मां है, जिनसे मैं काफी ‘क्लोज’ हूं. वह लन्दन में रहती हैं, लेकिन मैं दिन में एक से दो बार उनको फोन अवश्य कर लेता हूं.

आपको फिल्म इंडस्ट्री में आने की प्रेरणा कहां से मिली?

मुझे हमेशा से कठिन काम पसंद है. मैं एक मार्शल आर्टिस्ट हूं और कमांडो के दौरान निर्माता विपुल शाह ने मुझे चुना, क्योंकि उन्हें पता था कि इस चरित्र में में फिट बैठूंगा. जब आप नॉन फिल्मी बैकग्राउंड से होते है तो इतनी कैपिबिलिटी आपमें होनी चाहिए कि लोग आप को देखें. यूथ इस इंडस्ट्री में आने के लिए कुछ सिखते हैं. मैं तो पहले से ही सीखा हुआ था. फिल्मों में आने का भी उद्देश्य भी यही था. मेरी मां की संस्था केरल में है, जहां मार्शल आर्ट सिखाया जाता है. वही मैं पला-बड़ा हूं.

कितना संघर्ष था?

यहां काम मिलना मुश्किल है. हर बार प्रूव करना पड़ता है. अगर आप को मौका मिल भी जाए, तो आपको सपोर्ट नहीं मिलता. मैंने सोचा था कि मैं सूरज की तरह इतना चमकूं कि लोग मुझे ‘इग्नोर’ ना करें.

‘कमांडो’ के दौरान भी मैंने बिना वायर और केबल के एक्शन किया. कमांडो 2 में मैंने सब कुछ अपने आप किया और सोचा कि हर बार मैं दर्शकों को इतना कुछ दे दूं कि वे मेरी फिल्म को अवश्य देखें. ये आत्मविश्वास मुझे मेरे परिवार और गांव से मिला. मुझे 4 साल की मेहनत के बाद फोर्स फिल्म मिली थी.

अभी आप अपने आप में कितना बदलाव महसूस करते हैं?

मैं बहुत विनम्र हो गया हूं. सब लोग आपके बराबर नहीं, आपसे काफी ऊपर हैं. हेयर स्टाइलिस्ट, ड्रेस डिजाइनर जैसे कोई भी हो, उन्हें अपने क्षेत्र में महारथ हासिल है, इसलिए मैं सबकी इज्जत करता हूं.

ग्लैमर वर्ल्ड में अपने आपको ग्राउंडेड रखना कितना मुश्किल होता है?

जो लोग सफलता के बाद बदल जाते हैं, मुझे लगता है कि वे सफलता के लिए तैयार नहीं होते. मुझे पता है मुझे सफलता मिलेगी, इसलिए मुझमें कोई बदलाव नहीं आएगा. आज के जमाने में लोग बहुत होशियार हैं और वे सही और गलत इंसान के फर्क को अच्छी तरह समझते हैं. आपको ईमानदार होना जरुरी है. मुझे नॉर्मल लोग बहुत प्रभावित करते हैं.

फिटनेस के लिए आप क्या करते है?

मैं पर्सनली विश्वास करता हूं कि आप सब कुछ लिमिट में खाएं, क्योंकि शरीर के लिए सब जरुरी है. मैं सब खाता हूं. रोज 15 मिनट वर्कआउट करता हूं. कोई डाइट फॉलो नहीं करता.

फिल्मों में आने की चाहत रखने वाले यूथ के लिए क्या मेसेज है?

सिर्फ ‘गुड लुकिंग’ लड़के या लड़की से कुछ नहीं होता. यहां आने के लिए किसी एक टैलेंट की आवश्यकता होती है. उसमें आपको इतना अच्छा होना है कि हिन्दुस्तान में वैसा कोई न हो. अगर ऐसा नहीं है, तो आप मुंबई मत आइये.

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