बॉलीवुड और हॉलीवुड में नाम कमा चुके अभिनेता अनिल कपूर आज भी हंसमुख और फिट हैं. उनकी इस फिटनेस का राज उनकी संतुष्टि है, जो उन्हें फिल्मों और पारिवारिक जीवन में मिला. वे अपने पुराने दिनों को आज भी याद करते हैं, जब फिल्मों का दौर, काम करने की तकनीक, लोगों की सोच सब अलग थी. तब एक फिल्म के दौरान पूरी टीम एक परिवार होती थी. जहां खाना-पीना, मौज-मस्ती सब काम के साथ होता रहता था, लेकिन वे इस दौर को भी अच्छा मानते है जहां उन्हें आज के टैलेंटेड कलाकारों, निर्देशकों के साथ काम करने का मौका मिल रहा है. इन दिनों उनकी फिल्म ‘मुबारका’ रिलीज पर है, जो पारिवारिक फिल्म है. पेश है कुछ अंश.

आपकी फिटनेस का राज क्या है?

मैं सब खाता हूं, लेकिन अधिक पेट भरकर नहीं खाता. साथ में रेगुलर वर्कआउट करता हूं और 8 घंटे की नींद पूरी करता हूं. खुश रहता हूं, तनाव नहीं लेता. कभी भी कोई इंज्यूरी होने पर पूरा आराम करता हूं. इससे जल्दी ठीक हो जाता हूं.

ये फिल्म आपकी अब तक की फिल्मों से कितनी अलग है?

ये एक पारिवारिक मनोरंजक फिल्म है, जिसमें रोमांस, कॉमेडी, एक्शन सब है. यह एक सच्ची कहानी है जिसे मनोरंजक तरीके से पेश करने की कोशिश की गयी है. इसमें मैंने पहली बार रियल भतीजे अर्जुन कपूर के साथ काम किया है और पहली बार मैं सरदार की भूमिका में हूं. इसमें मेरे आसपास काम करने वाले लोग सारे नए हैं, इसलिए नया सा महसूस कर रहा हूं.

पहले और अब की फिल्मों में अंतर क्या पाते हैं? आपकी सोच कितनी बदली है? आप अब किस तरह की फिल्मों को चुनते हैं?

सोच हमेशा बदलती रहती है. जो सोच और पसंद 35 साल पहले थी, अब वह नहीं है. इसलिये मेरे सोच विचार को भी समय के साथ-साथ बदलना पड़ा है. कभी यह बदलाव सही होता है, कभी गलत. कितना भी अनुभव होने के बाद भी कई बार कुछ बातें गलत हो जाती है. ये ‘शो बिजनेस’ में होता रहता है. इसे स्वीकारना भी जरुरी होता है. बहुत सारी चीजें बदली है. पहले कभी सोचा नहीं था कि तकनीक इतनी आगे बढ़ेगी. फिल्मों में भी आजकल बहुत परिवर्तन आया है. तकनीक, स्टोरी टेलिंग, कल्चर, आदि सब बदल चुकी है.

आपने अर्जुन कपूर के साथ अभिनय किया है, क्या बचपन में लगा था कि अर्जुन कपूर अभिनय करेंगे?

मुझे तो कभी लगा ही नहीं था कि वह एक्टर बनेगा, क्योंकि करियर की शुरुआत में वह असिस्टेंट डायरेक्टर बना था और काम के प्रति बहुत ‘पैशनेट’ था. तब लगा कि कैमरे के पीछे जायेगा, लेकिन अचानक उसका फिल्मों में अभिनय करना चौकाने वाला था. उसके बाद तो कई फिल्में उसने कर डाली.

आपने इतनी लम्बी जर्नी फिल्मों में की है, क्या कभी पुराने दिनों को याद करते है?

अच्छे दिन याद आते हैं. जो समस्या तब आई मैंने तभी ‘सॉल्व’ किया. माता-पिता की मदद भी ली. मैं आगे आने वाले समय पर अधिक फोकस्ड रहता हूं. पीछे मुड़कर कम देखता हूं. बहुत सारी यादे हैं, शूटिंग करना, साथ में ट्रेवल करना, मौज-मस्ती करना सब यादगार है. इसके अलावा जब मैं पहली बार पिता बना, पहली बार गाड़ी खरीदी, पहली बार बड़ा घर बना, पहली बार जब विदेश गया आदि बहुत सी यादे हैं. जिसे मैं अभी भी याद करता हूं.

आपको कभी कंट्रोवर्सी का सामना नहीं करना पड़ा, आपने इसे कैसे बनाये रखा?

जब लोग मुझे आकर कहते हैं कि मेरी पीठ पीछे सब मेरी तारीफ करते हैं तो बहुत अच्छा लगता है. उसमें मेरी पत्नी और परिवार का काफी योगदान है. मुझे खुशी किसमें है ये मैंने शुरू से समझ लिया था, वैसा ही मेरा व्यवहार सबके साथ था और उसी हिसाब से काम कर रहा हूं. साधारण रहना, इसमें एक खूबी है. जब आप हर वक्त खुश रहते हैं और आपका आत्मविश्वास बढ़ता रहता है. इसमें परिवार, दोस्त, खाना-पीना, रहन-सहन सब आ जाता है. जिसके हिसाब से आप आगे बढ़ते जाते हैं.

किसी फिल्म के सफल होने में निर्देशक का कितना हाथ मानते हैं?

अच्छा निर्देशक एक साधारण कहानी को अच्छा बना सकता है जबकि एक खराब निर्देशक एक अच्छी स्क्रिप्ट को खराब बना सकता है. ये अंतर है.

बच्चों की सफलता को कैसे देखते हैं?

(हंसते हुए) अभी तो उन्होंने शुरुआत की है. आगे और अच्छा करने की जरुरत है. मेरे हिसाब से सफलता केवल हिट फिल्मों की सूची से नहीं गिनी जाती, बल्कि आप कैसे ह्यूमन बीइंग हैं, आपका स्वभाव कैसा है, आप अपने जीवन को कैसे आगे ले जा रहे हैं, आपकी सोच क्या है आदि सभी अगर सबको पसंद आये तभी आप सफल हैं, अन्यथा नहीं. मेरे साथ उनका अच्छा रिश्ता है और वे दोनों ही नॉर्मल बच्चे हैं. आगे बढ़ने के लिए मेहनत कर रहे है.

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