सरिता विशेष

चैनल ‘‘वी’’ पर वीजे के रूप में काम करने के बाद फिल्म ‘‘लंदन ड्रीम्स’’ से अभिनय की तरफ मुड़ने वाले आदित्य रॉय कपूर की जोड़ी श्रद्धा कपूर के साथ काफी पसंद की गयी. वैसे तो वह दूसरी अभिनेत्रियों के संग भी फिल्में करते रहते हैं. मगर आदित्य रॉय कपूर की गत वर्ष कटरीना कैफ के संग वाली फिल्म ‘‘फितूर’’ असफल रही. परदे पर इनकी जोड़ी जमी नहीं. पर अब एक बार फिर आदित्य रॉय कपूर ने श्रद्धा कपूर के साथ फिल्म ‘‘ओ के जानू’’ की है. जिसमें वर्तमान युवा पीढ़ी के करियर व प्यार या शादी को लेकर जो अंर्तद्वंद चलता रहता है, उसका चित्रण है.

चैनल के वीजे से लेकर फिल्म ‘‘ओ के जानू’’ तक के अपने करियर को किस रूप में देखते हैं?

– अरे सर! मैं क्या बताऊं. आप खुद शुरू से मेरा करियर देखते आए हैं. मुझसे ज्यादा आप मेरे करियर का आकलन कर सकते हैं. जहां तक मेरा अपना सवाल है, मैं पीछे मुड़कर देखने में यकीन नहीं करता. सच कहूं तो मैं अपने करियर को लेकर कुछ ज्यादा सोचता नही हूं. मैं यह कभी नहीं सोचता कि कहां क्या बदलाव आया, किस तरह से मेरा एटीट्यूड बदल गया. मेरे करियर, मेरी जिंदगी में सब कुछ होता जा रहा है.

मगर सफलता मिलते मिलते अचानक जब फिल्म असफल हो जाती है. तब क्या होता है?

– सफलता पाने के बाद जब असफलता मिलती है, तो तकलीफ ज्यादा देती है. ‘आशिकी 2’ को जबरदस्त सफलता मिली. उसके बाद मेरी दो फिल्में ठीक ठाक नहीं चली. पर मैं अपने आपको बचाने में सफल हो गया. क्योंकि ‘आशिकी 2’ की सफलता के बाद भी मैं जमीन पर ही था. हवा में नहीं उड़ रहा था. अपने आपको स्टार नहीं माना था.

हां! आपकी कोई फिल्म या आपका कोई प्रोजेक्ट असफल होता है, उस वक्त बहुत कुछ आपके अपने नजरिए पर निर्भर करता है. मेरा मानना है कि आपको लेकर लोगों का नजरिया बदलने दो, पर आप खुद अपने नजरिए को ना बदलें. यदि आपने लोगों के बदलते नजरिए के साथ साथ अपने अंदर का आत्मविश्वास खो दिया, तो सब गड़बड़ हो जाएगा. यदि आपने लोगों के बदलते नजरिए पर, लोगों की बातों पर ध्यान देना शुरू किया, तब तो आप गए काम से. इसलिए इंसान के अंदर धैर्य होना चाहिए. सफलता असफलता हर किसी के साथ आती है. इससे कोई बच नहीं सकता.

वह कौन सा मोड़ था, जब आपका अपना आत्मविश्वास डगमगाया था?

– मैं यह नहीं कहता कि मेरे साथ ऐसा नहीं हुआ. कभी कभी हमारा अपना आत्मविश्वास डगमगाता है. पर मेरे साथ ऐसा बहुत कम समय के लिए हुआ है. ऐसा लोगों की बातें सुनने की वजह से मेरे साथ कभी नहीं हुआ. मैं लोगों की बातें सुनकर अपनी प्रतिभा, अपने निर्णय, अपने काम पर शक नहीं करता. लेकिन हम भी इंसान हैं. हम खुद ही कई बार अपने काम या अपने निर्णय को लेकर खुद से सवाल करते हैं? जब फिल्म असफल होती है, तब भी हम इस तरह के सवाल अपने आप से करते ही हैं?ह र इंसान यह जानने की कोशिश करता है कि मेरा अपना निर्णय कहीं गलत तो नहीं हुआ? तो उस वक्त विश्वास डगमगाता है. मगर उसी वक्त आपका अपना धैर्य काम आता है.

सब कुछ आपकी तकदीर पर निर्भर करता है. यदि आपका समय अच्छा नहीं है, तो गड़बड़ी होनी ही है. यदि समय अच्छा हो तो आपको खुद ब खुद उसी तरह के रास्ते मिलते जाते हैं. कई बार समय के अनुसार ही आपके अपने विचार, आपकी सोच बदलती है. पर समय अच्छा नहीं है, तो आप चाहें जितनी लड़ाई लड़ लें, चाहें जितना परिश्रम कर लें, चाहे जितनी हायतौबा मचा लें, कुछ फायदा नहीं निकलना है. पर समय अच्छा आएगा, तो आपको आगे बढ़ने से रोकने की हिम्मत किसी में नहीं है. आपकी तकदीर ,आपका हक कोई छीन नहीं सकता.

फिल्म ‘‘ओ के जानू’’ तो तमिल की सफलतम फिल्म ‘‘कधाल कंमनी’’ का हिंदी रीमेक है. इसका आप पर कितना दबाव रहा?

– दबाव इस बात का जरूर रहता है कि क्या हम मौलिक फिल्म के अनुरूप परफार्मेस दे पाएंगे? सफल फिल्म के रीमेक करते समय लोगों की बढ़ी हुई अपेक्षाओं पर खतरा उतरने का दबाव होना स्वाभाविक है. मगर कलाकार के तौर पर मैं कोई भी दबाव सेट पर लेकर नही जाता. 

फिल्म ‘‘ओ के जानू’’ भी रोमांटिक फिल्म है?

-जी हां! यह भी रोमांटिक फिल्म है. यह दक्षिण भारत की तमिल भाषा की फिल्म ‘‘ओ कधाल कंमनी’’ का रीमेक है. इसमें मेरी जोड़ी श्रद्धा कपूर के साथ है. इस फिल्म में वर्तमान समय की युवा पीढ़ी की करियर व प्यार को लेकर सोच व मानसिकता को लेकर कुछ बातें की गई हैं. या यूं कहें कि युवा पीढ़ी करियर व प्यार को लेकर जिस अंर्तद्वंद से गुजर रही है, उसका चित्रण है.

करियर और प्यार को लेकर आपकी अपनी सोच क्या है?

– मेरी राय में हर युवक को इन दोनों चीजों को एक साथ लेकर चलना चाहिए. अब समय बदल चुका है. मैंने देखा है कि तमाम पति पत्नी नौकरी करते हुए अपने बच्चों को पालते हैं. दोनों एक दूसरे के लिए रूकावट नहीं बनते. दोनों चीजें एक साथ एकढर्रे पर चल सकती हैं. मगर हर इंसान के लिए इसकी अलग अलग प्राथमिकताएं होती हैं. मगर शादी करने से पहले लड़का हो या लड़की दोनों इस बात पर सोचते हैं कि यदि शादी के बाद वह अपने करियर को नहीं बना पाए तो? इसी के चलते जल्दी जल्दी कमिटमेंट नहीं करते हैं. लोग सोचते हैं कि यदि मैंने रिश्ते या शादी के लिए हामी भर दी, तो मैं अपने करियर, अपने काम में सौ प्रतिशत नहीं दे पाउंगा. आप जानते हैं कि आज की तारीख में कितनी प्रतिस्पर्धा है? ऐसे में सौ प्रतिशत देने का खतरा सभी को रहता ही है. यह आज के युग का कंफ्यूजन है. मैं तो यही कहूंगा कि हम जिस युग में रह रहे हैं, उस युग का कंफ्यूजन है. मैं तो सारा ध्यान अपने करियर पर लगा रहा हूं.

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पर हमने सुना है कि आप तो स्कूल के दिनों में ही किसी को दिल दे बैठे थे?

– मैंने पहले भी कहा कि मेरी जिंदगी में उम्र के बढ़ने के साथ कई चीजें होती रही हैं. जब मैं नौंवी कक्षा में पढ़ता था, तब पहली बार मुझे प्यार का बुखार चढ़ा था. मैं उसे डेट पर ले गया था. जेब में ज्यादा पैसे नहीं थे, इसलिए मैंने उसे सैंडविच खिलाया था. पर वह प्यार टिका नहीं. ब्रेकअप होने के बाद मुझे लगा था जैसे कि सब कुछ खत्म हो गया. मुझे पूरी दुनिया खत्म होना का अहसास हो रहा था. लेकिन परीक्षा खत्म होते ही सब कछ सामान्य हो गया. हम फिल्मों में प्यार को लेकर जिस तरह का जुनून देखते हैं, वैसा जुननू निजी जीवन के प्यार में नहीं होता है. लेकिन मेरा मानना है कि कई बार निजी जिंदगी का प्यार, फिल्मी प्यार के मुकाबले ज्यादा जानलेवाहोता है.

तो कटरीना कैफ के साथ आपके..?

– सब बकवास है..मीडिया सदैव कुछ मसालेदार खबरे छापता रहता है. यह सब मीडिया की बाते हैं. वही रिश्ते बनाती व बिगाड़ती रहती है. मैं तो खुद को एक सीधा इंसान मानता हूं. मेरा अपना कोई पीआर भी नहीं है.

तो फिर यह क्यूं कहा जा रहा है कि  कटरीना कैफ के साथ रिश्ते की वजह से आपने रणबीर कपूर के साथ दोस्ती खत्म कर दी?

– सच कहूं तो इस खबर को पढ़कर मैं खुद हैरान हूं. मेरी समझ में यह नही आता कि यदि हम किसी से रिश्ता जोड़ रहे हैं, तो हम किसी से दोस्ती खत्म क्यों करेंगे? हकीकत यह है कि हम दो दिन पहले ही रणबीर कपूर से मिलने उसके घर गए थे. कुछ अखबारों में वह तस्वीरें छपी भी हैं. मेरी लिंकअप की सारी गलत खबरें छप रही हैं. कटरीना कैफ के साथ मेरा कोई रिश्ता नहीं है.

हम कलाकार हैं और हम मानकर चलते हैं कि यह सब हमारे काम का ही एक हिस्सा है. यदि हमने मीडिया की हर बात पर गौर किया और अपनी जिंदगी को अपने तरीके से जीने पर पाबंदी लगानी शुरू की, तो हम जिंदगी जी नहीं पाएंगे. मैं मानता हूं कि आप लोग कई बार बहुत सही बातें लिखते हैं. लेकिन हम इस डर से किसी को दोस्त बनाना बंद नहीं कर सकते कि मीडिया में क्या लिखा जाएगा? मैं तो यह कहता हूं कि ज्यादा मत सोचो. अपनी जिंदगी अपने हिसाब से जियो. जिन्हें जो बोलना है, बोलते रहेंगे. आप चाहे जितना अच्छा काम करें, बुराई ढूढ़ने पर आमादा लोग बुराई ढूंढ़ लेंगे.

आपने कहीं कहा है कि सेक्स न होने पर रिश्ते खत्म हो जाते हैं?

– अरे नहीं! मैं ऐसा नहीं कह सकता. मगर क्या आप यह नहीं मानते कि सेक्स की अहमियत है.