अंतर्राष्ट्रीय सियासत में इन दिनों रूस का मुद्दा खासा चर्चा में है. पिछले दिनों पर्यावरण के लिए काम करने वाली संस्था ‘ग्रीनपीस इंटरनैशनल’ के 30 कार्यकर्ताओं को समुद्री डकैती के आरोप में रूस ने गिरफ्तार किया तो दुनियाभर की सामाजिक व नामी हस्तियों ने उन्हें आजाद कराने की मुहिम छेड़ दी. कई मुल्कों में इस बाबत प्रदर्शन भी हो रहे हैं.

नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने भी उन्हें रिहा करने के लिए रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन से गुहार लगाई. लेकिन रूस का रुख जरा कड़ा है. उस के मुताबिक सभी पर आर्कटिक तेल प्लेटफौर्म में घुसने के आरोप में मुकदमा चलेगा. रूस के अनुसार यह मामला चोरी और घुसपैठ का है वहीं पर्यावरण संस्था का कहना है कि उस के कार्यकर्ता ‘खतरनाक आर्कटिक तेल खनन’ के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे.

बहरहाल, मुल्क में तेल, घुसपैठ और रिहाई की यह कहानी कोई भी मोड़ ले लेकिन एक बात तो साफ है कि मुल्क चाहे कोई भी हो, सरकारें सच की आवाज को दबा नहीं सकती हैं.

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