सरिता विशेष

शहरी क्षेत्रों में मोबाइल फोन की कड़ी प्रतिद्वंद्विता से परेशान दूरसंचार क्षेत्र प्रदाता गांव की तरफ रुख कर रहे हैं. गांव में भी मोबाइल सेवा का चक्र तेजी से घूम रहा है, इसलिए इन्होंने ग्रामीण महिलाओं को भी अपना लक्ष्य बना लिया है.

ग्रामीण क्षेत्रों के बारे में कहा जाता है कि वहां 76 फीसदी मोबाइल फोन पुरुषों के पास हैं जबकि महिला मोबाइल फोन धारकों की संख्या महज 29 फीसदी है. इस अंतर को कम करने के लिए एक बहुराष्ट्रीय मोबाइल फोन सेवा प्रदाता कंपनी ने हर ग्रामीण महिला के हाथ में कम दर की आकर्षक योजना पर अपनी सेवा देने की पहल की है. उस की इस साल गांव में इस परियोजना पर 101 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश की योजना है. कंपनी ने उत्तर प्रदेश के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में यह काम पायलट परियोजना के रूप में शुरू भी कर दिया है और उस का दावा है कि इस में उसे अच्छी सफलता मिल रही है.

गांव में सचमुच बड़ी दिक्कत है. मोबाइल वहां क्रांति के रूप में अपनी पैठ बना रहा है. गांवों में मोबाइल रखना अब हर महिला का सपना बन गया है. गरीबी, शिक्षा और पर्याप्त दस्तावेजों के अभाव में यह सपना कई महिलाओं का पूरा नहीं हो पा रहा है. रोटी, कपड़ा, मकान के साथ मोबाइल रखना भी एक जरूरत बन गया है. अपनों से तत्काल संपर्क करने का इस से अच्छा दूसरा साधन फिलहाल और कुछ है भी नहीं.

इस तरह की पहल सरकार को भी करनी चाहिए और सामाजिक तथा आर्थिक दृष्टि से कमजोर लोगों को सरकारी स्तर पर ऐसी सुविधा दी जानी चाहिए. गांव में लैपटौप बांटे जा रहे हैं तो मोबाइल भी बांटे जा सकते हैं. सस्ती दरों पर उन्हें यह सेवा दी जा सकती है. यह अलग बात है कि बिजली और शुद्ध पेयजल गांव की बड़ी समस्याएं हैं. मोबाइल उन समस्याओं का समाधान नहीं है लेकिन यह गांव वालों को खुशी का अवसर जरूर दे सकता है.