व्यंग्य

कुरसी की आत्मकथा
मैं कुरसी हूं. हर जमाने में मेरा जलवा रहा है. मुझे हसीनाओं से भी ज्यादा भाव मिले हैं. इतिहास की ज्यादातर लड़ाइयां मेरे लिए ही लड़ी गईं. मैं सब की प्रिय हूं.