व्यंग्य

कहानी : आदमी बनाम आदमी
By सईद खान | 24 May 2017
बचपन में मेरी दादी मुझे कहानियां सुनाया करती थीं. वे कहती थीं, ‘वक्त पड़ने पर अगर गधे को भी बाप कहना पड़े तो कोई बात नहीं.’