आईवीएफ प्रक्रिया के माध्यम से हर साल हजारों बच्चे जन्म लेते हैं. जो महिलाएं बांझपन जैसी समस्या से जूझ रही हैं उन के लिए आईवीएफ प्रक्रिया की यह जानकारी काफी फायदेमंद हो सकती है:

पहला चरण: मासिकधर्म के दूसरे दिन आप के ब्लड टैस्ट एवं अल्ट्रासाउंड के माध्यम से आप के अंडाशय की जांच होती है. फिर यह अल्ट्रासाउंड सुनिश्चित करता है कि आप को कितनी मात्रा में स्टिम्युलेशन दवा दी जानी चाहिए. मासिकधर्म के दौरान डाक्टर जांच के तहत हो रही प्रक्रिया पर निगरानी करते हैं. फिर जांच के बाद आप के फौलिकल्स यानी रोम को मौनिटर करते हैं. जैसे ही आप का रोम एक निश्चित आकार में पहुंच जाता है तो फिर आप उसे रोज मौनिटर कर सकते हैं. मौनिटरिंग के बाद आप को दूसरी दवा दी जाती है, जो ट्रिगर शौट के रूप में जानी जाती है.

दूसरा चरण: अंडों की पुन:प्राप्ति के बाद डाक्टर आप के गर्भाशय के स्तर के विकास के लिए प्रोजेस्टेरौन को बढ़ाने के लिए बाहरी प्रोजेस्टेरौन दवा देते हैं.

तीसरा चरण: जब अंडे पुन: बनने की प्रक्रिया में हों तब पुरुष साथी को मास्टरबेशन के माध्यम से शुक्राणु प्रदान करने के लिए कहा जाता है. डाक्टर क्लीनिक में भी निषेचन के लिए शुक्राणु तैयार करते हैं.

चौथा चरण: शुक्राणु एवं अंडे की पुन:प्राप्ति की प्रक्रिया के बाद डाक्टर शुक्राणु एवं अंडे का गठबंधन करते हैं. इस के बाद वे निषेचित अंडे को कुछ समय के लिए इनक्यूबेटर में रख देते हैं. इस अवधि के दौरान एक भ्रूण विशेषज्ञ के द्वारा भ्रूण के विकास की नियमित चैकिंग की जाती है. अगर सब कुछ सही दिशा में चल रहा हो तो स्वस्थ विकास के लिए 3 से 5 दिनों के बाद भ्रूण तैयार हो जाता है.

5वां चरण: भ्रूण के आरोपण के लिए यह एक सरल एवं दर्दरहित प्रक्रिया है. आरोपण के लिए भ्रूण को तरल पदार्थ के रूप में एक कैथेटर में रखा जाता है. इस प्रक्रिया में अच्छी खबर के लिए आप को 2 सप्ताह इंतजार करना पड़ता है, जिस में प्रैगनैंसी टैस्ट होता है. इस के बाद डाक्टर कुछ निश्चित भोजन से संबंधित एहतियात बरतने को कहते हैं. उन्हीं चीजों को खाने की सलाह देते हैं जो आप के आरोपण की प्रक्रिया में सहायक साबित हों.

इस प्रक्रिया में आप को प्रैगनैंसी का सही परिणाम जानने के लिए ब्लड टैस्ट होने तक का इंतजार अवश्य करना चाहिए, बजाय इस के कि प्रैगनैंसी किट से रिजल्ट पता किया जाए, क्योंकि कई बार प्रैगनैंसी किट से गलत रिजल्ट भी आता है.