खुशहाल जिंदगी के लिए स्वास्थ्य से बढ़ कर कुछ नहीं, इस बात को जीवन का आधार बना कर दैनिक जीवन में छोटीछोटी बातों में बदलाव ला कर कैसे पाएं बेहतर स्वास्थ्य, जानें इस लेख में.

आज की जटिल जीवनशैली व खानपान की बदलती आदतों के कारण स्वास्थ्य की ओर ध्यान देना एक जरूरी जरूरत बन गई है. दैनिक जीवन में छोटीछोटी बातों में बदलाव ला कर स्वस्थ रहा जा सकता है क्योंकि स्वस्थ रहना काफी हद तक स्वयं हमारे हाथ में होता है. दिल्ली के कौंस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित परफैक्ट हैल्थ मेले में मौजूद तकरीबन सभी विशेषज्ञों ने माना कि जीवनशैली में बदलाव से सिर्फ हृदय संबंधी बीमारियों से ही नहीं बचा जा सकता है, बल्कि मधुमेह, ब्लडप्रैशर, डिप्रैशन और कैंसर जैसी बीमारियों से भी बचा जा सकता है.

मेले में मेदांता अस्पताल के न्यूरोलौजिस्ट डा. विपुल गुप्ता, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स के डा. विनय गोयल और मूलचंद अस्पताल के सीनियर कार्डियोलौजिस्ट कृष्ण कुमार अग्रवाल ने संयुक्त रूप से कहा कि स्ट्रोक को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. यदि लकवा मार जाए तो साढ़े 4 घंटे से कम समय के अंदर अगर मरीज अस्पताल पहुंच जाएं तो लकवे का सही इलाज किया जा सकता है. 40 की उम्र के बाद पहली बार एसिडिटी और अस्थमा के अटैक को नजरअंदाज न करें. ब्लैक टी और ब्लैक कौफी स्वास्थ्य के लिए अच्छी होती हैं, अगर इन में दूध या चीनी न मिलाई जाए. अपना ब्लडप्रैशर 120/80 से कम रखें. ध्वनि प्रदूषण से बच कर रहें. हृदय रोगों का खुलासा होने में 10-20 साल लग जाते हैं. व्हाइट राइस, व्हाइट मैदा व व्हाइट शुगर के साथ ट्रांसफैट लेना भविष्य में हृदय रोगों का कारण बनता है.

सीपीआर यानी 10 मिनट के अंदर (जितनी जल्द संभव हो सके) मरे हुए आदमी की छाती पीटना चाहिए इस तकनीक से रोजाना केवल दिल्ली में 30 जिंदगियों को बचाया जा सकता है.

स्वास्थ्य के लिए ज्यादा वजन हानिकारक होता है. 18 की उम्र के बाद पुरुष और 20 की उम्र के बाद महिलाएं अपना वजन न बढ़ाएं, इस बात पर जोर देते हुए विशेषज्ञों ने हिदायत दी कि व्यक्ति को चाहिए कि वह 1 दिन में 15 मिलीलिटर से ज्यादा तेल, मक्खन या घी का सेवन न करे. एस्कोर्ट्स हार्ट इंस्टिट्यूट के डा. समीर श्रीवास्तव ने कहा कि डाक्टरों को मौडर्न इनवैस्टीगेशन की अपडेटेड जानकारी रखनी चाहिए. आज सोशल मीडिया, एप्स के माध्यम से इमरजैंसी उपचार संभव है और लोगों को इस का लाभ उठाना चाहिए.