सरिता विशेष

बारिश के दिनों में पेट की गड़बड़ी आम बात है. इस मौसम में अक्सर पेट खराब हो जाता है. पेट खराब होने के ज्यादातर मामले फूड पौयजनिंग के होते हैं. दरअसल, बारिश के मौसम में आबोहवा में जलीय वाष्प की मात्रा बहुत अधिक होती है.

इससे घर और घर से बहार भी मौसम में एक खास तरह की नमी बनी रहती है. वहीं घर के अंदर सीलन का एहसास होता है. मौसम की इसी नमी का लाभ उठा कर तरह-तरह के जीवाणु हमारे आपसपास सक्रिय हो जाते हैं.

पानी के जरिए ये जीवाणु हमारे पेट में पहुंचते हैं और फूड पौयजनिंग हो जाती है. डायरिया-दस्त की शुरूआत हो जाती है. मौसम की मार का यहीं अंत नहीं है. इस मौसम की और भी कई दिकदारियां हैं. मसलन; डेंगी, मलेरिया, टायफायड, पीलिया. इन बीमारियों में भी पेट की गड़बड़ी होती है.

आइए देखते हैं इस मौसम पेट की तमाम तरह की गड़बडि़यों से कैसे निपटा जा सकता है. इस बारे में कोलकाता की जानीमानी डायटिशियन डॉ. मंजीरा सांन्याल क्या कहती हैं?

डॉ. सांन्याल कहती हैं कि बीमारी कोई भी हो, खतरनाक स्तर पर पहुंचने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए और डॉक्टर द्वारा प्रेस्क्राइब की गयी दवाएं लेनी चाहिए. लेकिन इसी के साथ कभी-कभार हमारे खाने में कुछ तब्दीली करके भी छोटी-मोटी पेट की समस्या से निपटा जा सकता है.

खासतौर पर हमारे घर व रसोईघर में भी बहुत कुछ है जिनका सेवन ऐसे समय में किया जा सकता है.

पानी: शरीर में किसी तरह की गड़बड़ी में पानी अपने आपमें बहुत बड़ी दवा है. सही मात्रा में पानी पीना बहुत जरूरी है. खासतौर पर तब और भी जरूरी है जब तबीयत ठीक न हो. मामूली-से बुखार से लेकर सर्दी, डायरिया, टायफायड जैसे बहुत सारी बीमारियों में पानी ज्यादा से ज्यादा पीना चाहिए.

दरअसल, ज्यादातर बीमारियों में शरीर में पानी का क्षय होता है. इससे डिहाइड्रेशन होता है और पानी की कमी हो जाती है. शरीर में पानी मात्रा को बनाये रखने के लिए सही मात्रा में पानी पीना जरूरी है. ऐसी बीमारियों में पानी सबसे जरूरी और अहम दवा है.

चाय: पानी के बाद चाय भी उपकारी है. डिहाइड्रेशन में चाय भी पानी की कमी को पूरा करता है. लेकिन मिल्क टी नहीं. इससे फायदे के बजाए नुकसान होता है. बगैर दूध के काली चाय, हल्की या पतली-सी चाय बनाना हर घर में संभव हो सकता है. इसके अलावा ग्रीन टी भी फायदेमंद हो सकता है.

जूस: फलों का रस पानी की कमी को पूरा करने का अच्छा जरिया है. किसी भी मौसमी फल का रस डिहाइड्रेशन में लिया जा सकता है. फलों के रस में जरूरी विटामिन और खनिज होते हैं. डिहाइड्रेशन में काफी कारगर होते हैं. अगर घर पर कोई फल न हो तो सीधे-सीधे नींबू की शिकंजी भी पी जा सकती है. नींबू का रस वैक्टेरिया से निपटने और संक्रमण रोकने में कारगर होता है.

उबला चावल: शरीर में पानी की कमी होने से कमजोरी हो जाती है. ऐसे में उबले चावल कमजोरी को ताकत में बदल सकती है. इसीलिए सूखे उबले चावल खाने की सलाह देती हैं डॉ. मंजीरा सांन्याल. पेट की गड़बड़ी में सूखे उबले चावल बहुत अच्छी है. इस समय इस तरह से चावल खाने से नींद भी अच्छी आती है. बीमारी में अच्छी नींद भी बहुत कारगर साबित होती है.

केला: फूड पौयजनिंग में पका हो या कच्चा केला – बहुत काम का साबित होता है. पक्का केले में विटामिन्स, कैलसियम के साथ इसमें मौजूद खनिज डिहाइड्रेशन में पानी की कमी को पूरा करता है. वहीं कच्चा केला सुपाच्य होता है. पेट को बांधने में मददगार होता है.

टोस्ट या क्रैकर बिस्कुट: डायरिया में या डिहाइड्रेशन में टोस्ट खाना अच्छा होता है. लेकिन शर्त यह कि बगैर मक्खन, जैम के टोस्ट. ब्रेड को अच्छी तरह सेंका हुआ कुरकुरा और गरमागरम टोस्ट ही खाना चाहिए. बगैर सेंका हुआ यानि कच्चा ब्रेड फायदा के बजाए नुकसान ही पहुंचाएगा. टोस्ट के अलावा बाजार में मिलनेवाला क्रीम क्रैकर बिस्कुट भी भूख मिटाने के साथ पेट बांधने में कारगर होता है.

बेसिल या तुलसी पत्ता: हम सब जानते हैं कि बेसल पत्ता या तुलसी पत्ता सर्दी-खांसी में अच्छा होता है. लेकिन इसके अलावा इसके और भी कई गुण हैं. दरअसल, तुलसी बैक्टेरिया नाशक, फंगस नाशक है. तुलसी पत्ता चबा कर खाया जा सकता है. इसकी चाय भी बना कर ली जा सकती है. यह पेट की गड़बड़ी या फूड पौयजनिंग में भी अच्छा होता है. तुलसी में पायाू जानेवाला एंटी औक्सीडेंट और एंटी कर्सेनोजेनिक उपादान कैंसर में भी कारगर है.

जीरा: पेट के लिए जीरा बहुत बढि़या होता है. सब्जी या दाल के बघार में जीरा लिया जा सकता है. और कुछ नहीं तो दही में भुना जीरा पेट के लिए अच्छा रहता है. जीरा शरीर को हल्का-फुल्का बनाता है. जीरा की एक और खासियत यह है कि जलजीरा पेट को ठंडा कर शांत करता है. एसिडिटी का नाश करता है. शरीर की तापमात्रा को नियंत्रित करता है, इसीलिए गर्मी के दिनों में जलजीरा पिया जाता है. फूड पौयजनिंग में काफी फायदेमंद होता है, क्योंकि शरीर में पानी की कमी को दूर करता है. साथ में यह शरीर के वजन को भी कम करता है. कब्ज की भी अचूक दवा है यह जीरा. यह लीवर और पाचन के लिए बढि़या है.

सौंफ: हमारे किचेन में सौंफ आमतौर पर मौजूद रहता है. यह सौंफ पेट को ठंडा रखता है. प्राचीनकाल से मिस्र और चीन में इसके पौधे को मेडिसिनल माना गया है. हालांकि बाद में इसका उपयोग पूरे यूरोप और भूमध्यसागरीय देशों से एशिया और पूरे विश्व में फैला. विश्व के कई देशों में इसके पौधे के खास अंश से सब्जी भी बनायी जाती है. इसमें जीवाणुनाशक गुण के साथ एसिड का नाश करने के तत्व भी पाए जाते हैं. यह पाचन में भी सहायक है. यही कारण है कि खाना खाने के बाद इसके खाने का चलन है. फूड पौयजनिंग में भी यह बड़ा ही कारगर है. यहां तक कि नवजात शिशु को फीडिंग करानेवाली मां अगर सौंफ किसी भी रूप में लेती है तो बच्चे का पेट खराब नहीं होता.

धनिया: बंगाल में साबूत भुना धनिया भी खाना खाने के बाद खाने का चलन है. बंगाल और ओडिशा पान में भुना धनिया खाने का प्रचलन पुरना है. मकसद सहज पाचन है. अफरा, गैस की शिकायत होने पर घनिया की सेवन करने की सलाह दी जाती है. लेकिन जहां तक फूड पौयजनिंग में धनिया खाने का सवाल है तो इसमें पाया जानेवाला एंटी-माइक्रोबियल गुण है. यहां तक कि धनिया की पत्तियों में लाल साग, पालक जैसे अन्य किसी सब्जी से कहीं ज्यादा आयरन पाया जाता है. हर रोज 100 ग्राम धनिया पत्ता आयरन, कैलसियम और विटामिन ए की जरूरत को पूरा करता है. सबसे बड़ी बात यह रोग-प्रतिरोध शक्ति बढ़ा‍ता है.