सरिता विशेष

वर्ष 1951 में एशियाई खेलों की शुरुआत के बाद देश ने कई दिग्गज खिलाड़ी पैदा किए. उन दिग्गजों में से एक उत्तर प्रदेश के निशानेबाज जीतू राय हैं जिन्होंने इंचियोन एशियाई खेलों में भारत को स्वर्ण पदक दिला कर खाता खोला. जीतू ने ओंगनियोन शूटिंग रेंज में 50 मीटर पुरुष पिस्टल स्पर्धा में पदक जीता. जबकि श्वेता ने महिला 10 मीटर एअर पिस्टल स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किया.

जीत के बाद जीतू ने कहा, ‘‘मैं काफी दबाव में था और हर हाल में स्वर्ण पदक जीतना चाहता था.’’ जीतू वर्ष 2016 में होने वाले रियो ओलिंपिक में भी इसी तरह लय बनाए रखना चाहते हैं. 25 वर्षीय जीतू राय हाल ही में स्पेन के ग्रेनाड में विश्व निशानेबाजी चैंपियनशिप में रजत पदक जीत कर ओलिंपिक कोटा स्थान प्राप्त कर चुके हैं और इसलिए वे बिलकुल रिलैक्स करने के मूड में नहीं हैं.

भारतीय सेना के जूनियर अधिकारी हैं जीतू राय. वे अभी आईएसएसएफ विश्व रैंकिंग में 5वें स्थान पर हैं और इस वर्ष ग्लास्गो में संपन्न हुए राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण जीतने के बाद से उन का यह वर्ष शानदार रहा है. इस वर्ष वे 5 अंतर्राष्ट्रीय पदक जीत चुके हैं. साथ ही, विश्व चैंपियनशिप से कोटा हासिल करने वाले वे एकमात्र भारतीय निशानेबाज बन गए हैं.

लेकिन इन सब के बीच एशियाई खेलों में दल भेजने को ले कर जिस तरह नाटक हुआ और खेल मंत्रालय, भारतीय खेल प्राधिकरण यानी साई, भारतीय ओलिंपिक संघ यानी आईओए आदि खेल संघों के बीच जिस तरह का टकराव रहा, वह वाकई निंदनीय है. खेल मंत्रालय और साई का रवैया बिलकुल गैर पेशेवराना रहा और महीनों तक खेल फाइलों में ही खेला जाता रहा. इस बार आईओए ने एशियाई खेलों के लिए 662 खिलाडि़यों और 280 अधिकारियों सहित कुल 942 प्रतियोगियों की सूची भेजी थी लेकिन खेल मंत्रालय ने 516 खिलाडि़यों और 163 कोच को ही स्वीकृति दी.

इस खेल का खिलाडि़यों पर कितना असर पड़ेगा, इस से इन अधिकारियों को कोई लेनादेना नहीं. सभी के सुर और बोल अलगअलग. बाबुओं ने खेलों का सत्यानाश करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है और इस की सुध लेने वाला कोई नहीं. लेकिन इन सब के बीच जब जीतू राय जैसा मेहनती खिलाड़ी स्वर्ण पदक देश को दिलाता है तो क्रैडिट लेने में बाबुओं से ले कर मंत्री तक पीछे नहीं रहते.