सरिता विशेष

क्रिकेट के बाद युवाओं का सब से पसंदीदा खेल अगर कोई है तो वह है फुटबौल और वर्तमान में चल रहे फुटबौल सीजन के चलते तो युवाओं ने अपने बाल भी क्रिकेट स्टार धौनी के स्टाइल को छोड़ कर फुटबौलरों की तरह बनवाने शुरू किए हैं.

फुटबौल का यह क्रेज सिर्फ मैदानों तक ही नहीं बल्कि कीचड़ में भी फुटबौल खेला जाता है और न केवल खेला जाता है बल्कि इस की सौकर चैंपियनशिप भी होती है. जिस में दुनिया में 260 टीमें हैं जिस में से 43 टीमों का वर्ल्डकप होता है. इस की सब से बड़ी खासीयत यह होती है कि इस में खिलाड़ी कीचड़ में फुटबौल खेलते हैं.

क्या है स्वैम्प फुटबौल

स्वैम्प फुटबौल एक ऐसा फुटबौल खेल है जिस में खिलाड़ी कीचड़ में फुटबौल खेलने का लुत्फ उठाते हैं. जिस से उन्हें फुटबौल खेलने का एक अलग अनुभव प्राप्त होता है. जब कीचड़ में लिप्त इन खिलाडि़यों को आसपास से गुजरते लोग देखते हैं तो देख कर दंग रह जाते हैं और सोचते हैं कि आखिर क्या मजा आता है इन्हें कीचड़ में खेल कर. लेकिन ये मजा तो सिर्फ वही फील कर सकता है जो इसे खेलता है.

कैसे हुई शुरुआत

यह खेल फिनलैंड से आया, जहां इसे ऐथलीट्स और सिपाहियों के शारीरिक व्यायाम के तौर पर प्रयोग में लाया गया. लेकिन धीरेधीरे इस की बढ़ती उपयोगिता और महत्त्व को देखते हुए इस खेल की डिमांड अन्य देशों में भी बढ़ने लगी. सब से पहले यह खेल 1998 में फिनलैंड में आयोजित हुआ.

स्वैम्प सौकर के लिए आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त संस्था स्कौटलैंड की स्वैम्प सौकर यूके लिमिटेड है. इस का उद्देश्य स्वैम्प सौकर वर्ल्डकप का आयोजन करने के साथसाथ इस खेल को अन्य देशों तक भी पहुंचाना था तभी तो इस के हैड ने (2011-2013) पिछले कुछ वर्षों में इस टूरनामैंट का चीन (बीजिंग), तुर्की (इस्तांबुल) और भारत (मुंबई) में इस का आयोजन किया.

कहां कहां हुआ आयोजन

2008 से पहले यह खेल स्कौटलैंड के दुनूम में आयोजित होता था लेकिन 2008 के बाद यह स्ट्रकर में आयोजित होने लगा. स्थान परिवर्तन का यह सिलसिला जारी रहा तभी तो 2011 में यह टूरनामैंट एडिनबर्ग और 2012 में आइनरनैस में हुआ. फिर पुनः 2013 से स्वैम्प सौकर वर्ल्डकप अपनी पुरानी जगह दुमून में आयोजित होने लगा.

खेल की प्रक्रिया

इस खेल में सौकर फील्ड को पीली प्लास्टिक की पट्टी से मार्क किया जाता है और उस के भीतर ही खिलाडि़यों को अपना प्रदर्शन करना होता है. इस खेल में हर टीम में कुल 6 खिलाड़ी होते हैं जिस में 5 फील्ड में और एक गोलकीपर की भूमिका अदा करता है.

जो खिलाड़ी डिफैंस के लिए खेल रहा होता है वो अपनी दाईं टांग का पूरी ताकत से इस्तेमाल कर बौल को किक करता है प्रतिद्वंद्वी टीम की ओर. जैसे ही उस की जोरदार किक पउ़ती है वैसे ही उस के फैन्स, चीयरलीडर्स का उत्साह देखते ही बनता है. खिलाड़ी की जबरदस्त किक और उसे कीचड़ में लथपथ देख एक अलग ही मस्ती का माहौल बन जाता है, जिसे देख हर किसी का झूमने को दिल करता है.

खेल के नियम

– एक मैच में 12-12 मिनट के दो हाफ होते हैं.

– इस में कोई भी औफ साइड नियम नहीं होता.

सरिता विशेष

– फील्ड में 6 खिलाड़ी होते हैं, लेकिन स्क्वैड में खिलाडि़यों की कोई लिमिट नहीं होती.

– कोई खिलाड़ी अगर चोटिल हो जाता है तो दूसरा खिलाड़ी उस की जगह ले लेता है.

– इस का वर्ल्डकप हर साल जून माह में स्कौटलैंड में आयोजित किया जाता है, जबकि वर्ल्ड चैंपियनशिप हर साल फिनलैंड में वर्ल्डकप के एक सप्ताह पहले आयोजित की जाती है.

केरल में भी कीचड़ फुटबौल से बदला नजारा

देखने वालों की आंखें दंग रह गईं जब उन्होंने कोदुर, मलल्पुरम में कीचड़ से भरा मैदान देखा. यह वो मैदान है जहां अकसर फुटबौल प्रतियोगिताओं का आयोजन होता रहता है. पहली बार मलल्पुरम में कीचड़ फुटबौल टूरनामैंट का आयोजन डिस्ट्रिक्ट टूरिज्म प्रोमोशन काउंसिल द्वारा किया गया. यह जान कर हजारों लोग वहां एकत्रित हो गए.

इस खेल के लिए कोदुर में 30×20 मीटर ग्राउंड की खास निगरानी की गई ताकि आयोजन में कोई बाधा उत्पन्न न हो. इस में मलल्पुरम और पड़ोसी जिले वयमाड और कोषिक्कोड की 12 टीमों ने भाग लिया. यह मैच सिर्फ 20 मिनट का था. भले ही समय कम था लेकिन कीचड़ में फुटबौल खेलना अपनेआप में काफी कठिन था. इस में जीत भले ही वयनाड की हुई लेकिन सभी खिलाडि़यों के साथ वहां एकत्रित लोगों ने इसे काफी ऐंजौय किया.

कुल मिला कर यह खेल मस्ती और मजा देने वाला है.