सरिता विशेष

भारतीयों के लिए दाल, रोटी और सब्जी की अहमियत से इनकार नहीं किया जा सकता. किसी भी काम को अंजाम देने के दौरान खाने-पीने की अपनी अहमियत है. मनपसंद व माकूल खाना मिलने से इनसान की कूवत में काफी इजाफा हो जाता है. जब अपना देश छोड़ कर किसी वजह से दूसरे देश जाना पड़ता है, तो खाने का मुद्दा काफी अहम हो जाता है.

अगर विदेश में भी अपनी पसंद का खाना नसीब हो जाए तो व्यक्ति निहाल हो जाता है, वरना मजबूरन जैसे तैसे काम चलाना पड़ता है. अब बारी है भारतीय खिलाड़ियों के दल की रियो जाने की. रियो ओलंपिक में भारत को भी अपने खिलाड़ियों से तमाम तमगों की आस है. ऐसे में वहां खिलाड़ियों के खाने का बंदोबस्त बहुत ज्यादा अहम हो जाता है.

रियो ओलंपिक आयोजन समिति ने इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन से जब पूछा कि उन के खिलाड़ियों को ओलंपिक खेलों के डाइनिंग के मेन्यू में कौन से भारतीय पकवान चाहिए, तो जवाब दिया गया कि खाने में दाल, रोटी और कोई शाकाहारी सब्जी पक्के तौर पर होनी चाहिए. इन के अलावा वे लोग अन्य भारतीय व्यंजन अपनी मर्जी से मेन्यू में शामिल कर सकते हैं. यह हकीकत भी है कि हिंदुस्तानियों को अगर खाने में ये तीनों चीजें मिल जाएं, तो फिर उन्हें कोई दिक्कत नहीं होती.

भारतीय खिलाड़ियों के लिए इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (आईओए) की ओर से दाल, रोटी और सब्जी की मांग ठीक उसी तरह की गई है, जिस तरह किसी भी ओलंपिक या दूसरे खेल आयोजन में मुसलमान देशों के खिलाड़ियों के लिए हलाल मीट की मांग की जाती है. आमतौर पर ऐसे आयोजनों में मुस्लिम खिलाड़ियों के लिए हलाल मीट का बंदोबस्त अलग से किया जाता है. गेम्स की डाइनिंग में खास जगह पर बाकायदा हलाल मीट लिखा होता है.

रियो में जाने वाले भारतीय दल के शेफ डि मिशन राकेश गुप्ता के मुताबिक वे खाने के मामले में आयोजनकर्ताओं पर जोर डाले हुए हैं. दरअसल आईओए ने बहुत पहले ही रियो ओलंपिक आयोजन समित से भारतीय खिलाड़ियों के लिए भारतीय भोजन का इंतजाम करने की गुजारिश की थी.

इसी कड़ी में रियो ओलंपिक आयोजन समित ने आईओए की गुजारिश कबूल कर ली थी और भारतीय पकवानों का मेन्यू मांगा था. इसी के तहत भारत की ओर से दाल, रोटी और तरकारी मुहैया कराने को कहा गया है.

इस दफे भारत के खिलाड़ियों का काफी बड़ा दल ओलंपिक में हिस्सा लेगा. ज्यादातर खिलाड़ी तो गेम्स विलेज यानी यानी खेल गांव में रहेंगे, मगर तीरंदाजों का अलग बंदोबस्त किया गया है.

तीरंदाजों को ठहराने का इंतजाम स्टेडियम के करीब मौजूद एक होटल में किया गया है. वहीं आर्चरी एसोसिएशन आफ इंडिया ने तीरंदाजों के लिए भारतीय भोजन का बंदोबस्त किया है. एसोसिएशन ने वहां एक हिंदुस्तानी बावर्ची की तलाश कर ली है. बावर्ची ने खिलाड़ियों की मरजी के मुताबिक खाना बनाने की बात मान ली है.

मनचाहा खाना पकवाने के लिए भारतीय तीरंदाज तमाम जरूरी मसाले अपने साथ भारत से ले कर जाएंगे. आर्चरी एसोसिएशन आफ इंडिया (एएआई) के ट्रेजरार वीरेंद्र सचदेवा के मुताबिक तमाम तीरंदाज मसालों के साथसाथ पापड़ भी ले कर जाएंगे ताकि रियो में खाने के जायके में कोई कसर न रहे.

अब देखने वाली बात यह होगी कि तीरंदाजों सहित तमाम भारतीय खिलाड़ी रियो से कितने तमगे (पदक) जुटा पाते हैं.