सरिता विशेष

लड़कियां केवल पढ़ाई के क्षेत्र में ही नहीं स्पोटर्स मीट में क्रिकेट जैसे दमखम दिखाने वाले खेलों में भी वह बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं. लखनऊ के एसआर ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूशन के शौर्य स्पोटर्स मीट 2017’ के आयोजन में लड़कियों की संख्या सबसे अधिक दिखी.

शहरों की लड़कियों को ऐसे अवसर पहले भी मिलते रहे हैं अब गांव और छोटे शहरों की लड़कियां भी इस हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं. लड़कियों ने अपने बल पर केवल अच्छा प्रदर्शन ही नहीं किया दकियानूसी सोंच को भी पीछे ढ़केल दिया है.

एसआर ग्रुप के दीक्षांत समारोह में भी टॉपर लिस्ट में लड़कियों की संख्या सबसे अधिक थी. इसे देखकर दीक्षांत समारोह में मेडल दे रहे उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक ने कहा कि जिस तरह से लड़कियां पढ़ाई के साथ करियर के हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं उससे साफ है कि आने वाले दिनों में लड़को को अपने लिये आरक्षण मांगने की जरूरत आ सकती है.

एसआर ग्रुप औफ इंस्टिट्यूशन के चेयरमैन पवन सिंह चैहान कहते हैं कि इंजीनियरिंग के करियर में लड़कियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. इसकी वजह यह है कि आज विज्ञान ने काफी तरक्की कर ली है. हर काम मशीनों के जरीये करना सरल हो गया है. ऐसे में लड़कियों के लिये इजीनियरिंग का करियर बेहतर हो गया है. इंजीनियरिंग में हार्डकोर ब्रांचों के अलावा इंजीनियरिंग में कई ऐसी ब्रांच शुरू हो गई है जो लड़कियों के लिये बहुत उपयोगी हो गई है. लड़कियों के करियर में उनके पैरेंट का रोल अहम है. अब वह भी लड़की को केवल डॉक्टर या टीचर ही नहीं बनाना चाहते. लड़की को वह उसी तरह से सहयोग कर रहे हैं जैसे लड़के को करते हैं.

31 जनवरी और 1 फरवरी 2017 को आयोजित शौर्य स्पोटर्स मीटमें लड़कियों ने बैडमिंटन, टेबिल टेनिस, शतरंज जैसे खेलों के अलावा क्रिकेट जैसे दमखम दिखाने वाले खेलों में भी हिस्सा लिया. मैदान पर इनकी बैटिंग और बॉलिंग देखकर किसी को इस बात का अहसास नहीं हुआ कि यह लड़कियां है. वह भी लड़को की ही तरह चैके छक्के लगा रही थीं.

पवन सिंह चैहान कहते है, लड़कियों और उनके परिवार की सोंच को बदलने मीडिया की भूमिका अहम रही है. मीडिया ने जिस तरह से लड़कियों के उत्साह को बढ़ाया है उससे लड़कियों का हौसला बढ़ा है. जो लोग अपनी रूढिवादी सोंच के चलते लड़कियों को पीछे ढ़केलने का प्रयास करते हैं उनको परास्त होना पड़ा है. बड़े शहरों में लड़कियों को पहले भी खेल और पढ़ाई में बराबर के मौके मिलते रहे हैं अब छोटे शहरों और गांव की लड़कियों को भी ऐसे मौके मिलने लगे हैं. इससे समाज में नई सोंच का जन्म होगा.