फुटबाल खिलाडि़यों के लिए सुनहरा मौका
वर्ष 2010 के कौमनवैल्थ खेलों के बाद भारत में अब 2017 में खेलों का एक बड़ा मेला लगेगा. जी हां, हमारे देश में फीफा का अंडर 17 फुटबाल वर्ल्ड कप खेला जाएगा जिस में 24 देशों की टीमें शिरकत करेंगी. इस के मैच नई दिल्ली, गुवाहाटी, गोआ, पुणे, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, कोच्चि जैसी जगहों पर होने की संभावना है. चूंकि यह टूर्नामैंट भारत में होगा इसलिए हमारी अंडर 17 फुटबाल टीम भी इस में हिस्सा लेगी.
हाल ही जब ब्राजील में 2014 में होने वाले फीफा वर्ल्ड कप की ट्रौफी भारत में आई थी तब उस के अनावरण समारोह के अवसर पर क्रिकेट को अलविदा कहने वाले सचिन तेंदुलकर ने कहा था कि भारत के पास फीफा वर्ल्ड कप 2022 में पहुंचने का सुनहरा मौका है. अंडर 17 विश्वकप बहुत ही शानदार अवसर है. हमें योजनाओं के साथ कड़ी मेहनत करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि इस दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है. यह सबकुछ एक रात में नहीं हो सकता, हमें प्रतियोगिताओं को संवारने की दिशा में काम करने की जरूरत है.
हिमाचल प्रदेश जूनियर फुटबाल टीम व इलाहाबाद विश्वविद्यालय फुटबाल टीम के कोच इंद्रनील घोष ने बताया कि इतने बड़े टूर्नामैंट से यकीनन भारतीय फुटबाल को फायदा होगा क्योंकि इस वर्ल्डकप पर पूरे वर्ल्ड की निगाहें होंगी. हमें इस से बहुतकुछ सीखने को मिलेगा.
सोने पे सुहागा यह है कि भारत की महिला फुटबाल टीम भी अपनी सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग पर है. उस का रैंक फिलहाल 49 है. लेकिन इतना तो तय है कि 2017 वर्ल्ड कप की मेजबानी से देश में फुटबाल के प्रति लोगों में दिलचस्पी बढ़ेगी और साथ ही युवा खिलाडि़यों का भी इस ओर रुझान बढ़ेगा जिस से फुटबाल की नईनई प्रतिभाएं उभर कर सामने आएंगी.
 
औलराउंडर जैक कैलिस का टैस्ट से संन्यास
दक्षिण अफ्रीका के जैक हेनरी कैलिस दुनिया के महान औलराउंडर हैं. जैक कैलिस ने न सिर्फ अपने बल्ले से रनों का पहाड़ खड़ा किया है बल्कि गेंदबाजी से भी बैट्समैन को पवेलियन का रास्ता दिखाया है. पिछले दिनों उन्होंने टैस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया.
वर्ष 1995 में इंग्लैंड के खिलाफ टैस्ट कैरियर की शुरुआत करने वाले 38 वर्षीय कैलिस ने अपने टैस्ट कैरियर में 166 मैच खेले हैं. 55.12 की औसत से उन्होंने 13,289 रन बनाए हैं. जिस में 45 शतक और 58 अर्धशतक शामिल हैं. अपनी गेंदबाजी से उन्होंने 292 विकेट भी चटकाए हैं. 
लिटिल मास्टर सचिन तेंदुलकर के रिकौर्ड को तोड़ने के लिए जैक कैलिस ही सब से करीब थे लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा. जैक कैलिस का कहना था कि यह फैसला लेना आसान नहीं था, खासतौर पर जब आस्ट्रेलिया के साथ मैच होने हैं. वे अंतर्राष्ट्रीय एकदिवसीय मैच खेलते रहेंगे और फिट रहे तो 2015 में होने वाले वर्ल्डकप के लिए अपनेआप को तैयार करेंगे. यहां तक कैलिस को पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी है. युवाओं को उन से सीखने के लिए बहुतकुछ है. हर बुरे वक्त में कैलिस अपनी टीम के लिए दीवार बन कर खड़े रहे और अपने खेल का बेहतर प्रदर्शन दिखाने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी.
किसी भी इंसान के लिए यह बेहद मुश्किल वक्त होता है जब वह रिटायर होता है, पर यह दिन तो एक दिन आता ही है. अगर कोई खिलाड़ी रिटायर नहीं होगा तो फिर नए खिलाडि़यों को मौका कैसे मिलेगा, इसलिए यह अच्छी बात है कि नई प्रतिभाओं को अवसर मिलेगा.
 
दीपिका की नजर दक्षिण कोरिया में होने वाले एशियाई खेलों पर
भारत की महिला तीरंदाज और वर्ष 2010 के दिल्ली कौमनवैल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली दीपिका कुमारी ने 34वीं सीनियर राष्ट्रीय तीरंदाजी चैंपियनशिप में बाजी मार ली. दीपिका ने गुजरात की वी प्रणीता को आखिरी सैट में हरा कर यह मुकाम हासिल किया.
दीपिका झारखंड की राजधानी रांची से तकरीबन 15 किलोमीटर दूर एक छोटे से गांव रातू छाटी की रहने वाली है. गरीबी के कारण उन के लिए यह खेल अपनाना आसान नहीं था. पर इस के लिए उन्होंने धैर्य रखा और कड़ी मेहनत की. दीपिका के पिता नहीं चाहते थे कि वह तीरंदाज बने. वे चाहते थे दीपिका पढ़लिख कर कुछ बने. लेकिन जब दीपिका ने वर्ष 2009 में अमेरिका में 11वीं आर्चरी चैंपियनशिप में जीत हासिल की तो उन्हें भी लगने लगा कि इस खेल में वह आगे बढ़ सकती है और फिर उन्होंने दीपिका को आगे बढ़ने के लिए हर तरह से सहयोग और समर्थन दिए.
वाकई दीपिका और उन के पिता तारीफ के काबिल हैं. यहां तक पहुंचने के लिए कितना कुछ त्याग और संघर्ष करना पड़ा होगा, यह वे जानते होंगे क्योंकि यह सच है कि अब कोई खेल सस्ता नहीं रहा, इसलिए पैसों की कमी की वजह से बहुत ऐसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी आगे नहीं बढ़ पाते हैं. कुछ ही खिलाड़ी हैं जो अपने आत्मविश्वास को डगमगाने नहीं देते और धैर्य रखते हैं, उन में दीपिका भी एक है. आज उन्होंने धैर्य रखा तो इस मुकाम पर हैं. 
फिलहाल, दीपिका की नजर अब इसी साल दक्षिण कोरिया में होने वाले एशियाई खेलों पर है.  दीपिका जैसी खिलाड़ी ऐसे युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत भी है जिन की पहुंच में सारा कुछ नहीं होता. दीपिका ने दिखाया है कि यदि आप में आगे बढ़ने की ख्वाहिश, देश के लिए कुछ करने का जज्बा हो तो गरीबी आड़े नहीं आती है.