सरिता विशेष
श्रीनिवासन की फजीहत 
देश की सब से बड़ी अदालत सर्वोच्च न्यायालय ने बीसीसीआई के अध्यक्ष एन श्रीनिवासन को हटा कर उन की जगह क्रिकेटर सुनील गावस्कर को आईपीएल-7 होने तक अंतरिम अध्यक्ष बनाने के आदेश दे दिए. इस से पहले अदालत ने कहा था कि आईपीएल-6 में सट्टेबाजी और स्पौट फिक्ंिसग मामले में निष्पक्ष जांच के लिए श्रीनिवासन पद छोड़ दें लेकिन वे अंतिम समय तक जुगाड़ भिड़ाने में लगे रहे कि कुरसी हाथ से निकलनी नहीं चाहिए और जमे रहे. पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने उन के मनसूबे पर पानी फेर दिया.
मामला यों था कि आईपीएल-6 में सट्टेबाजी और स्पौट फिक्ंिसग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस मुकुल मुद्गल कमेटी बनाई थी जिस ने फरवरी माह में सौंपी अपनी रिपोर्ट में बीसीसीआई के अध्यक्ष एन श्रीनिवासन और चेन्नई सुपरकिंग के मालिक गुरुनाथ मयप्पन के अलावा कुछ क्रिकेटरों के नाम भी उजागर किए थे. श्रीनिवासन तभी संदेह के घेरे में आ गए थे जब उन्होंने अपने दामाद गुरुनाथ मयप्पन को एक समिति गठित कर के उन्हें क्लीनचिट दे दी और बीसीसीआई के अध्यक्ष पद से कुछ दिनों के लिए दूर भी रहे. इस ड्रामे के बाद जब मामला थोड़ा शांत हो गया तो अपना दबदबा दिखाते हुए उन्होंने फिर से कुरसी थाम ली.
दरअसल, खेल संघों को राजनीति का अखाड़ा बना दिया गया है और दादागीरी इतनी कि पूछिए मत. चाहे कोई भी खेल संघ हो, इन दिनों हर खेल संघ के ऊंचे पदों पर वही काबिज हैं जिन के पास पैसा और पावर है. इन पदों पर ऐसे लोग जुड़े हुए हैं जिन का खेल से दूरदूर तक वास्ता नहीं लेकिन इतना है कि किसी भी खिलाड़ी को अपनी उंगलियों पर नचाने की कूबत रखते हैं. उन में से श्रीनिवासन भी एक ऐसी ही शख्सीयत हैं लेकिन देश की सर्वोच्च अदालत ने उन की हैसियत बता दी. इस के लिए वे खुद ही जिम्मेदार हैं.
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला स्वागत योग्य है. यह फैसला मनमानी करने वाले क्रिकेट प्रशासन के लिए एक सबक है. कुंडली मार कर बैठे श्रीनिवासन को यह समझना चाहिए था कि इस से न सिर्फ उन की फजीहत हो रही थी बल्कि बीसीसीआई को भी इस का हिस्सा बनना पड़ रहा था. खैर, कुछ भी हो, श्रीनिवासन की छवि धूमिल जरूर हुई है.
सुनील गावस्कर को फिलहाल अध्यक्ष बनाना सही है क्योंकि वे अनुभवी खिलाड़ी हैं और इस से न सिर्फ भारतीय क्रिकेट का भला होगा बल्कि क्रिकेट की बेहतरी के लिए भी अच्छा होगा.
 
60 मिनट का रोमांच
हौकी खेल का समय अब 70 मिनट के बजाय 60 मिनट का होगा. अंतर्राष्ट्रीय हौकी महासंघ यानी एफआईएच ने यह फैसला लिया है. इस खेल में पहले 35 मिनट के 2 हाफ होते थे लेकिन अब 15-15 मिनट के 4 क्वार्टर होंगे. पहले और तीसरे क्वार्टर के बाद 
2 मिनट का बे्रक भी होगा जबकि हाफ टाइम के बाद 10 मिनट का बे्रक वैसा ही रहेगा जैसा पहले था.
समय में बदलाव इसलिए किए गए हैं ताकि यह खेल और रोमांचक बने. अंतर्राष्ट्रीय हौकी महासंघ के अध्यक्ष रोआंद्रो नेगे्र कहते हैं कि हम खेल को रोमांचक बनाना चाहते हैं. बे्रक के दौरान प्रशंसकों को रिप्ले देखने और उसे सही आकलन करने का समय मिलेगा.
इस के अलावा कमेंट्री करने वाले हौकी प्रशंसकों को खेल की बारीकी को सही तरीके से समझा सकेंगे. इस से खिलाडि़यों को भी रणनीति बनाने में मदद मिलेगी.
सवाल है कि क्या 60 मिनट का हौकी मैच कर के ज्यादा रोमांचकारी बन जाएगा? किसी भी मैच में रोमांच पैदा होता है खिलाडि़यों के जोशखरोश, खेलने के तरीके से वे खेल के प्रति कितने समर्पित जनून की हद तक खेल रहे हैं.
क्रिकेट मैच को ज्यादा रोमांचकारी बनाने के लिए 20 ओवर तक सीमित कर दिया तो लोगों के इस खेल के प्रति दीवानेपन का कारण खिलाडि़यों का उत्साह, दिलचस्प अंदाज, खेल के लिए बेहतरीन बंदोबस्त, तैयारियां आदि बातें रही हैं.
देश में हौकी इतने सालों से उपेक्षा का शिकार रहा. न सरकार और न ही खेल संघ ने इस ओर ध्यान दिया. एक समय में नंबर वन रही भारतीय हौकी रसातल में पहुंच गई.
आज हौकी को रोमांचकारी बनाना है तो पहले खिलाडि़यों को जोशीला, पूरी तरह प्रशिक्षित, संतुष्ट करना जरूरी है. यहां बात आती है पैसों की. क्रिकेट से आधा भी पैसा हौकी पर खर्च किया जाए तो हालात काफी सुधर सकते हैं. वरना लस्तपस्त, थकेहारे, अनट्रेंड खिलाडि़यों को 70 मिनट के बजाय 60 मिनट के लिए भी खेल के मैदान में उतारने पर दर्शकों को उन्हें झेलना भारी पड़ेगा. बोरियत के 10 मिनट भी बहुत होते हैं, फिर यहां तो बात 60 मिनटों की है.