सरिता विशेष

भारतीय क्रिकेट टीम इन दिनों आलोचनाओं से दोचार हो रही है. वजह साफ है, हमेशा की तरह टीम इंडिया के धुरंधर विदेशी धरती पर कोई कारनामा नहीं दिखा पाए. लौर्ड्स टैस्ट की ऐतिहासिक जीत के बाद लग रहा था कि शायद टीम इंडिया आगे भी कुछ इसी तरह कारनामा करेगी पर अगले टैस्ट मैच में टीम इंडिया बिखर गई.

टैलीविजन चैनलों और अखबारों में फिर से बहस शुरू हो गई कि महेंद्र सिंह धौनी को अब कप्तानी छोड़ देनी चाहिए क्योंकि विदेशी मैदानों में धौनी का रिकौर्ड देखें तो वे 17 टैस्ट में टीम की कप्तानी कर चुके हैं जिन में 13 टैस्ट भारत हार चुका है.

वैसे भारतीय क्रिकेटरों की हमेशा से ही यह कमजोरी रही है कि घरेलू मैदान में वे शेर हो जाते हैं और विदेशी धरती पर जाते ही उन्हें ढेर होने में देर नहीं लगती. दरअसल, भारतीय टीम को तेज और उछालभरी पिचों पर खेलने की आदत नहीं है क्योंकि घरेलू मैदानों की पिचें इस तरह नहीं बनाई जाती हैं. यह समझ से परे है कि आखिर विदेशी पिचों की भांति यहां वैसी पिचों का निर्माण क्यों नहीं किया जाता. वहीं, बात केवल पिचों की ही नहीं है. बल्लेबाजी में मध्य क्रम को मजबूत करना होगा क्योंकि विराट कोहली की गैरमौजूदगी में मौजूदा टीम के पास कोई ऐसा खिलाड़ी नहीं है जिस से कि मध्यक्रम मजबूत नजर आ रहा हो. गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण में भी टीम इंडिया विदेशी पिचों पर खरी नहीं उतरती.

दरअसल, आईपीएल के आने के बाद क्रिकेट का स्तर लगातार गिर रहा है और टीम इंडिया लगातार विपक्षी टीमों के सामने घुटने टेकती नजर आ रही है. यह सच है कि क्रिकेट खिलाड़ी अब कारोबारियों के हाथों की कठपुतली बन कर रह गए हैं. तभी तो मशहूर इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने अपनी किताब ‘विदेशी खेल अपने मैदान पर’ में आईपीएल के नकारात्मक पहलुओं को उजागर करते हुए कहा है कि मुझे डर था कि आईपीएल के बहाने जन्मा क्रिकेट क्लब का नया ढांचा पुराने और सुस्थापित रणजी टूर्नामैंट को बरबाद कर देगा और राष्ट्रीय क्रिकेट को भी नुकसान पहुंचाएगा.

यहां रामचंद्र गुहा की बातें एकदम सटीक बैठ रही हैं. इसलिए केवल धौनी को बदलने से क्रिकेट के अच्छे दिन नहीं आने वाले हैं, क्रिकेट खेल को बचाना है तो ताबड़तोड़ क्रिकेट यानी आईपीएल के साथसाथ टैस्ट क्रिकेट और एकदिवसीय मैचों के लिए खिलाडि़यों पर भी ध्यान देना होगा, वरना हम घर के ही शेर साबित होते रहेंगे.