स्पिनर गेंदबाज के रूप में प्रसिद्ध हुए क्रिकेटर हरभजन सिंह पंजाब के शहर जालंधर के हैं. उन्होंने अपने कोच चरणजीत सिंह भुल्लर द्वारा बैट्समैन का प्रशिक्षण प्राप्त किया.

कोच की अचानक मृत्यु के बाद वे स्पिनर बौलर के रूप में उभर कर आए और क्रिकेट के इतिहास में 32 विकेट्स ले कर हैट्रिक बनाने वाले पहले भारतीय बौलर बने. साल 2009 में उन्हें पद्मश्री से नवाजा गया. साल2015 में उन्होंने मौडल व ऐक्ट्रैस गीता बसरा से शादी की. अब वे टीवी पर एक कौमेडी शो में जज की भूमिका निभा  रहे हैं.

शो से जुड़ने की वजह पूछने पर हरभजन बताते हैं, ‘‘मैं कौमेडी को ऐंजौय करता हूं. फिर चाहे वह टीवी शोज हों या फिल्में. मैं पंजाबी और पाकिस्तानी ड्रामा खूब देखता हूं. जब मेरे पाकिस्तानी दोस्त खेलने आते थे तो उन से कौमेडी की सीडी मंगवाया करता था. इस के अलावा कई टीवी शोज पर गेस्ट बन कर गया हूं. यहां पर आने की वजह यह है कि यहां काफी मजा आ रहा है जिन की मैं सीडी खरीद कर देखता था, वे लाइव यहां परफौर्म कर रहे हैं और सब का मनोरंजन कर रहे हैं. मैं खुद भी इसे करने में खुश हो रहा हूं.”

हरभजन कहते हैं कि ‘‘हर पंजाबी के खून में ह्यूमर होता ही है. फनी बातें मुझे पसंद हैं. कुछ लोग मुझे ‘फनी’ कहते हैं तो कुछ सीरियस. जबकि मैं सीरियस नहीं हूं. मुझे सभी से मिलना, मजेदार बातें करना आदि सब पसंद है. जिंदगी एक बार मिलती है उसे हंसखेल कर गुजारना चाहिए. मैं वहां से आया हूं जहां लोग एकदूसरे से मिलते हैं,हंसतेबोलते हैं. वही मेरे स्वभाव में भी आ गया है. मैं जिसे नहीं भी जानता हूं उस से भी मजाक कर लेता हूं.’’

प्लेयर्स में सैंस औफ ह्यूमर अधिक होता है. ऐसे में कौन से प्लेयर के मजाक पसंद हैं, इस बाबत वे बोलते हैं, ‘‘विराट कोहली बहुत बड़ा ऐक्टर है. वह किसी की भी नकल कर लेता है. मेरे हिसाब से हर किसी को यह पता नहीं होता कि वह क्याक्या कर सकता है.’’

शोएब अख्तर के साथ शो में काम करने को ले कर हरभजन बताते हैं, ‘‘मैं शोएब को सालों से जानता हूं. वे मेरे दोस्त और बड़े भाई की तरह हैं. बहुत साल पहले भी हम मिले थे. बड़ा अच्छा लगा. इतने सालों बाद एक शो में मिल रहा हूं. ग्राउंड में तो इतनी बात नहीं हो पाती. शोएब बड़ा जौली किस्म का इंसान है. खूब हंसाता है.’’

जज बनने की तैयारी पर वे बताते हैं, ‘‘इस में तकनीक अधिक नहीं है. जब कोई मजाक होता है तो हर व्यक्ति को पता चल जाता है कि हंसी आई या नहीं. हंसी आई तो ठीक है. अगर हंसने वाली बात न होने पर भी आप हंसते हैं तो लोग आप को देख कर हंसेंगे. यहां पर क्या हो रहा है, उसे देखना जरूरी होता है. यह कोई ट्रिकी काम नहीं है. आम बातों से मजेदार बात निकलती है.’’

क्या कभी खुद आप किसी मजाक के पात्र बने हैं, जहां मजा भी आया हो, इस पर वे याद करते हुए कहते हैं, ‘‘प्लेन की सवारी में हम काफी मजे करते हैं. पिचकारी ले कर चलते हैं. कोई सो रहा हो तो उस के ऊपर पानी फेंकते हैं. अगर कोई अधिक खर्राटे मारता है तो उस के जूते के फीते निकाल देते हैं या बांध देते हैं, ऐसा चलता रहता है.’’

कौमेडी में किस बात का ध्यान रखना जरूरी है, इस पर उन की राय कुछ यों है, ‘‘जो भी कहें, अच्छा जोक हो, ‘बिलो द बैल्ट’ न हो, डबल मीनिंग वाले शब्द न हों, किसी को दुख न पहुंचे इस का खयाल हो. परिवार के साथ बैठ कर देखने लायक हो.’’

किस कौमेडियन के फैन हैं? इस पर हरभजन कई नाम लेते हुए कहते हैं, ‘‘मुझे पुराने और नए सभी कौमेडियन पसंद हैं. अभी कपिल शर्मा, राजू श्रीवास्तव, कृष्णा अभिषेक, सुदेश लाहिड़ी, सुनील ग्रोवर पसंद हैं. कई पाकिस्तानी कौमेडियन बहुत अच्छी कौमेडी करते हैं. कौमेडी में चेहरे के भाव और संवाद खास माने रखते हैं.’’

खेल के साथ इस शो को मैनेज करने के लिए वे कहते हैं, ‘‘अभी मैं कुछ समय के लिए फ्री हूं. वेस्टइंडीज के टूर में नहीं हूं. मैं अभी मुंबई में भी हूं. इस की शूटिंग भी रोजरोज नहीं होती. ऐसे में बाकी चीजें भी तो करनी हैं और जब मौका मिलता है तो कर लिया. बारिश की वजह से प्रैक्टिस इंडोर ही होती है. मैं जिम और दूसरे काम कर रहा हूं, हालांकि क्रिकेट मेरी पहली प्राथमिकता है. ड्रैसिंग रूम का माहौल काफी मजाकिया होता है. ड्रैसिंगरूम में गाने चलते रहते हैं, सब का मुंह चलता रहता है, सब कुछ न कुछ खाते रहते हैं. आजकल तो अच्छीअच्छी चीजें रखते हैं, जिन में खासकर ड्राईफ्रूट्स होता है. क्रिकेट एक हाईप्रैशर गेम है, उस के तनाव को ले कर अगर आप ड्रैसिंगरूम में आ गए तो आप ग्राउंड पर अच्छा परफौर्मेंस नहीं कर पाएंगे. इसलिए हम वहां अपनेआप को तनावमुक्त रखते हैं. थोड़ा सोना, रैस्ट करना आदि करते हैं. खाना खाते हुए हम कोई भी हास्य शो देखते हैं. कभी खेल अच्छा होता है तो कभी खराब. न्यूज वाले भी हमें गालियां देते हैं. सभी लोग सभी कुछ अच्छा देखना चाहते हैं.’’

जिंदगी में कोई मलाल रह गया है? इस पर वे कहते हैं, ‘‘नहीं, मैं कहां से आया हूं, मुझे पता है. आज मैं कहीं भी जा सकता हूं, कुछ भी कर सकता हूं, कुछ भी खा सकता हूं, यह मेरे लिए बहुत है. लोगों से मिलना, बात करना आदि सब हो रहा है. कोई मलाल नहीं. मेरा दोस्त संदीप मेरे काम का ध्यान रखता है.’’

खेल में राजनीति का प्रभाव खिलाडि़यों पर कितना पड़ता है? इस पर वे बताते हैं कि हर काम में राजनीति होती है. कोई न कोई आप की टांग खींचने में लगा रहता है. लाइफ ऐसी ही होती है. अगर आप स्ट्रौंग हैं तो आप इसे डील कर लेते हैं. हार गया जो, वह बंदा ही नहीं है. वह दौर अगर निकल गया तो आप का रास्ता आसान हो जाता है.