सौर ऊर्जा के मामले में भारत के कदम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. लोगों के घरों और संस्थानों की बिजली जरूरत बड़े स्तर पर सौर ऊर्जा से पूरी हो रही है. ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए सौर ऊर्जा वरदान बनी हुई है. बिजली के तारों के जाल से बहुत दूर बसे लोगों के लिए ऊर्जा का यह आधार उन की जीवनचर्या में नए सोपान जोड़ रहा है और धीरेधीरे इस के इस्तेमाल का दायरा आधुनिक तकनीकी विस्तार के साथ बढ़ रहा है. अमेरिका को भारत की यह खुशहाली रास नहीं आ रही. वह भारत की इस तरक्की में बाधक बनना चाहता है और इस बार उस ने सौर ऊर्जा के मुद्दे पर भारत को घेरने का प्रयास भी किया है.

अमेरिका का कहना है कि भारत को सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करना उसी ने सिखाया है. उस का आरोप है कि भारत की सौर ऊर्जा नीति के कारण यह सौर ऊर्जा महंगी हो रही है. उस का कहना है कि पहले भारत में सौर ऊर्जा का उत्पादन अमेरिकी सामान से होता था. अमेरिका ने उस के लिए सब्सिडी भी दी थी. इस सब्सिडी से भारत का सौर ऊर्जा क्षेत्र विकास करने लगा और उस का कारोबार भी बढ़ने लगा लेकिन अब भारत ने सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए अपने देश में ही बने उपकरणों की खरीद को अनिवार्य कर दिया है.

राष्ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन ने स्थानीय स्तर पर निर्मित उपकरणों के इस्तेमाल से ही सौर ऊर्जा के उत्पादन की नीति बनाई है. अमेरिकी उपकरण निर्माता भारत के इस फैसले से दुखी हैं और उन्होंने विश्व व्यापार संगठन यानी डब्लूटीओ में जाने की यह कहते हुए धमकी दी है कि भारत ने घरेलू उत्पादों के अनिवार्य इस्तेमाल की नीति अपनाकर मानकों का उल्लंघन किया है. जब उसे जरूरत थी तो वह हमारे पास आया, सब्सिडी पर उपकरण खरीदता रहा और मजबूत स्थिति होने पर स्थानीय स्तर पर बने उपकरण की नीति अपना रहा है.

भारत का कहना है कि वह बाध्य नहीं है इसलिए हम अधिकारों का अपने हिसाब से इस्तेमाल करेंगे. भारत का यह भी कहना है कि उस ने निजी उत्पादकों के लिए नियम नहीं बनाया है. अमेरिका चाहे तो उन्हें उपकरण बेचे लेकिन सरकारी स्तर पर सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए?भारत अपने ही देश में बने उपकरणों का इस्तेमाल करेगा.