सरकार के सोने के आयात पर फिर नियंत्रण की अवधि बढ़ाने, सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी की दर का निराशाजनक अनुमान, विनिर्माण क्षेत्र के 4 साल के निचले स्तर पर पहुंचने और विदेशी बाजार में अच्छा कारोबार नहीं होने से बंबई शेयर बाजार यानी बीएसई में निराशा का माहौल रहा और सूचकांक में तेज गिरावट दर्ज की गई है. निराशा के इस माहौल में बाजार को सब से तगड़ा झटका 23 मई को लगा जब सूचकांक 388 अंक तक लुढ़क गया. वर्ष 2012-13 में जीडीपी के दशक के सब से निचले स्तर पर रहने से बाजार में मायूसी का दौर रहा और 31 मई को समाप्त हुए सप्ताह में सूचकांक में 455 अंक की गिरावट दर्ज की गई. जून की शुरुआत भी बाजार के लिए अच्छी नहीं रही और जीडीपी, आटो बिक्री व विनिर्माण क्षेत्र के आंकड़ों के कमजोर रहने का दबाव बाजार पर स्पष्ट दिखा और सूचकांक मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे लुढ़कता रहा.

बाजार में अफरातफरी का माहौल देखते हुए वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने कहा है, ‘‘नर्वस होने की कोई बात नहीं है. मुझे लगता है कि भारतीय बाजार को ठीक तरह से स्थिति को पढ़ना आना चाहिए. बाजार को इधरउधर की घटनाओं से उत्पन्न हुई स्थिति का सही मूल्यांकन करना चाहिए.’’ वित्तमंत्री के इस बयान के बाद सूचकांक में जारी गिरावट को ब्रेक लगा और बाजार में, मामूली ही सही, मजबूती का रुख बना.