रुपए के रसातल में जाने से शेयर बाजार में हाहाकार मचा हुआ है. निवेशक समझ नहीं पा रहे हैं कि वे कहां जाएं और अपनी रकम को कैसे बचाएं. रुपया हर दिन गिरावट के रिकौर्ड कायम कर रहा है और उस की आंच से शेयर बाजार भी रसातल की तरफ बढ़ रहा है. दोनों के बीच रसातल की तरफ पहुंचने की एक तरह से होड़ मची है लेकिन सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है और वह कोई ठोस कदम उठाने की स्थिति में नजर नहीं आ रही है. वित्त मंत्री पी चिदंबरम समझ नहीं पा रहे हैं कि रुपया किस स्तर तक गिर सकता है और आखिर इस की गिरावट की प्रक्रिया कहां जा कर थमेगी.

अगस्त 16 को शेयर बाजार में काला शुक्रवार के नाम से पुकारा जा रहा है. उस दिन बाजार 770 अंक तक गिर गया था और बाजार में हाहाकार मचा रहा. शुक्रवार को बाजार 4 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया और निवेशकों को 2 लाख करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा था. उस के बाद जब सोमवार को बाजार खुला तो लगा कि सरकार कोई ठोस कदम उठाएगी और उस का सकारात्मक असर बाजार पर देखने को मिलेगा लेकिन यह उम्मीद बेकार साबित हुई और बाजार में गिरावट का दौर जारी रहा. इस से पहले सरकार ने 14 अप्रैल को कड़े कदम उठाने की बात की थी लेकिन उस दिन महंगाई की दर बढ़ कर 5.70 प्रतिशत दर्ज की गई जिस का बाजार पर नकारात्मक असर ही देखने को मिला.

इस से पहले दिन सरकार ने चालू खाता घाटा को कम करने के लिए सोने के आयात के साथ ही प्लैटिनम व चांदी के आयात पर सीमा शुल्क में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी जिस के कारण देश को 4,830 करोड़ रुपए के अतिरिक्त राजस्व की उम्मीद की जा रही थी लेकिन सरकार के इस प्रयास का भी बाजार पर कोई असर नहीं हुआ और सूचकांक में बराबर गिरावट दर्ज की जाती रही.

बुधवार, 21 अगस्त को बाजार ने निवेशकों पर और कहर ढा दिया जब सूचकांक 340 अंक गिर कर 18 हजार के मनोवैज्ञानिक अंक से नीचे उतर आया. वैश्विक स्तर पर कारोबार करने वाले एक बैंक ने तो यहां तक कह दिया कि रुपए की बुनियाद कमजोर पड़ चुकी है और यह अभी और अधिक गिरेगा. 28 अगस्त को तो रुपया डौलर के मुकाबले 256 पैसे गिर कर 68.80 पर आ गया.