दीवाली पर शेयर बाजार में खूब दीवाली मनी. बाजार में धनलक्ष्मी ने जम कर वर्षा की और बौंबे स्टौक एक्सचेंज यानी बीएसई का सूचकांक सभी रिकौर्ड तोड़ कर नई ऊंचाई पर जा पहुंचा. फार्मा, आटो, बैंकिंग, आईटी सभी क्षेत्र के शेयरों में जम कर लिवाली हुई. दीवाली से पहले ही बाजार ने दीवाली मनाई और अक्तूबर के आखिरी बुधवार को बाजार रिकौर्ड ऊंचाई 21033.97 अंक पर बंद हुआ. इस से पहले बाजार 5 नवंबर, 2010 को इस स्तर के नजदीक 21004.96 अंक पर पहुंचा था.

दीवाली के मुहूर्त कारोबार में भी बाजार में खुशनुमा माहौल रहा. अगले दिन तो बाजार इतिहास में पहली बार 21,300 अंक के करीब पहुंचा. बाजार की इस रिकौर्ड ऊंचाई की वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों की लिवाली के साथ ही विदेशी बाजारों में तेजी और अच्छे मानसून के कारण बंपर पैदावार को बताया गया. इस की एक और वजह प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह की चीन यात्रा को भी माना गया. चीन ने जिस गरिमा के साथ

डा. मनमोहन सिंह का स्वागत किया और दोनों देशों के बीच आर्थिक स्तर पर जो समझौते हुए उस का शेयर बाजार पर अनुकूल असर दिखा. वहीं दीवाली के बाद बाजार को झटका लगा और 5 नवंबर को बाजार 5 दिन की तेजी के बाद धड़ाम से गिर गया और 21 हजार के स्तर से नीचे उतर आया. इस के बाद सप्ताहांत तक बाजार में लगातार 4 दिन तक गिरावट रही और सूचकांक 575 अंक तक लुढ़क गया. इस की बड़ी वजह रुपए के 6 सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंचने के साथ ही वैश्विक रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड ऐंड पुअर्स यानी एसऐंडपी की यह चेतावनी भी रही कि आम चुनाव के बाद सरकार यदि आर्थिक बढ़ोत्तरी की विश्वसनीय योजना बनाने में असफल रहती है तो भारत की रेटिंग घट सकती है.

जानकार कहते हैं कि नई सरकार के गठन में अभी देरी है और बाजार में इस दौरान कई तरह के उतारचढ़ाव देखने को मिलेंगे लेकिन सूचकांक में गिरावट का यह रुख रेटिंग एजेंसी के बयान का तात्कालिक प्रभाव है जो ज्यादा दिन तक उसे प्रभावित नहीं कर सकेगा.