सरिता विशेष

औल टाइम मनी यानी एटीएम की सुविधा उपभोक्ता के लिए अब जी का जंजाल बन रही है. सरकार ने बेंगलुरु में एटीएम पर एक महिला के साथ हाल में हुए जानलेवा हमले की घटना के बाद सभी बैंकों को एटीएम में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की सलाह दी है. बैंक सरकार की इस सलाह पर परेशान हैं.

बैंकों का मानना है कि जिस तेजी से ग्राहक की सुविधा के लिए एटीएम खोले जा रहे हैं उस स्तर पर सुरक्षा के बंदोबस्त वे नहीं कर सकते. इस के लिए उन्हें बहुत खर्च करना पड़ेगा और यह खर्च वे एटीएम सेवा के बदले शुल्क ले कर ही कवर कर सकते हैं. रिजर्व बैंकको इस पर एतराज नहीं है.

केंद्रीय बैंक ने कह दिया है कि वाणिज्यिक बैंक एटीएम सेवा के बदले ग्राहकों से शुल्क ले सकते हैं. इस का मतलब यह हुआ कि आम ग्राहक जिस एटीएम का इस्तेमाल करेगा उस के बदले बैंक शुल्क लेगा. इस से बैंकों की आमदनी बढ़ेगी लेकिन यह संदिग्ध है कि बैंक पैसे ले कर भी हर एटीएम पर सुरक्षाकर्मी तैनात करेगा. इस की भी कोई गारंटी नहीं है कि जहां बैंक लूटे जाते हैं वहां एक गार्ड इतना कारगर हो कि बेंगलुरु जैसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होगी. वहीं, बैंक यदि एटीएम पर शुल्क लेते हैं तो आम आदमी के साथ यह धोखा है. बैंकों ने एटीएम देते समय यह नहीं कहा था कि इस के इस्तेमाल पर शुल्क लिया जाएगा. अगर यह विकल्प होता बड़ी संख्या में लोग शायद इस का इस्तेमाल नहीं करने का विकल्प लेते. अब स्थिति बदलती है तो यह लूट या सरकारी धंधा कहलाएगा.

एटीएम आज हर आदमी की जरूरत बन गया है. हर आदमी के पास एटीएम कार्ड है और जरूरत पड़ने पर वह छोटीमोटी रकम के लिए इसी का इस्तेमाल कर रहा है. एक तरह से एटीएम पौकेट मनी की जगह ले चुका है. आम जरूरत की वस्तु बन चुके एटीएम के प्रयोग के बदले शुल्क लेना अन्याय है. शुल्क ही लेना है तो बड़े लेनदेन वालों से लिया जाना चाहिए. आम आदमी मुश्किल से पैसा बचाता है और बैंक में रख कर एटीएम के जरिए अपनी जरूरत की छोटी पूंजी निकालता है. ऐसे में उस से शुल्क वसूलना ठीक नहीं है.