सरिता विशेष

शेयर बाजार में समाप्त वित्त वर्ष का आखिरी माह रिकौर्ड के अंबार लगा गया. मार्च में बौंबे स्टौक एक्सचेंज यानी बीएसई तथा नैशनल स्टौक एक्सचेंज यानी निफ्टी ने पुराने सारे रिकौर्ड तोड़ कर नई ऊंचाई हासिल की है. यह सिलसिला माह की शुरुआत से ही नजर आने लगा था. 5 मार्च को सूचकांक 21,297 अंक का स्तर हासिल कर के पूर्व के रिकौर्ड के नजदीक पहुंच गया था. इस से पहले 23 जनवरी को सूचकांक 21,377 अंक पर पहुंचा था लेकिन जल्द ही बाजार ने अपने सभी पुराने रिकौर्ड तोड़ दिए.

सूचकांक 11 मार्च को लगातार दूसरे दिन 22 हजार अंक के स्तर तक पहुंचा जबकि निफ्टी पहली बार 6563 अंक के उच्चतम स्तर तक गया. बीएसई का सूचकांक 6 मार्च को सर्वाधिक 21,514 अंक पर था. इस से पहले बाजार पिछले वर्ष 9 दिसंबर को सर्वाधिक 21,484 अंक पर बंद हुआ था. कमाल तो 18 मार्च को हुआ जब बीएसई का सूचकांक कारोबार के दौरान सर्वाधिक 22,045 अंक के स्तर पर पहुंचा. हालांकि मुनाफा वसूली के कारण यह स्तर बाजार के बंद होने तक कायम नहीं रह सका.

बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि यूके्रन संकट, अमेरिकी केंद्र रिजर्व की नीतियां इस बीच बाजार को लगातार प्रभावित करती रही हैं. उन का कहना है कि विदेशी निवेशक भारत की अर्थव्यवस्था की ढांचागत मजबूती के मद्देनजर बीएसई में लगातार निवेश कर रहे हैं. निवेशकों में फरवरी में मुद्रास्फीति के 9 माह के न्यूनतम स्तर 4.68 प्रतिशत पर पहुंचने का भी बाजार पर खासा उत्साह रहा है.