सरिता विशेष

सरकार निवेशकों को आकर्षित करने के लिए विशेष पहल कर रही है. वित्त वर्ष 2013-14 को इस एजेंडे में विशेष तरजीह दी गई है और उस के तहत कौर्पोरेट संबंधी शिकायतों के निस्तारण के लिए कौर्पाेरेट सेवा केंद्र खोला जा रहा है. इस कौल सैंटर के जरिए सरकार का प्रयास सूचनाओं का तेजी से प्रसार करना और उद्योगों की शिकायतों में कमी लाना है.

हमारी कारोबार संबंधी प्रक्रिया कुछ ज्यादा जटिल है. दुनिया में आसान कारोबार पर जारी विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, कारोबार संबंधी प्रक्रिया में 185 देशों में भारत का स्थान 132वां है. यही नहीं, विश्व मंच पर विकासशील देशों के तेजी से उभर रहे आर्थिक मंच ब्रिक्स में भी भारत सब से निचले पायदान पर है. ब्रिक्स के सदस्य देशों में भारत के अलावा ब्राजील, रूस और चीन हैं. इस से भी बड़ी चिंता की बात यह है कि भारत इस रिपोर्ट में अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान और नेपाल से भी निचले स्तर पर है. इस तरह की स्थिति से निबटने के लिए सरकार ने इस कौल सैंटर को खोलने की योजना बनाई है और इस का मकसद भारत को निवेश के लिए बेहतर स्थान बनाना है.

कौल सैंटर के जरिए कौर्पाेरेट और निवेशकों में ज्यादा से ज्यादा जागृति लाना है. साथ ही औनलाइन डिलीवरी के जरिए निवेश व कारोबार के क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाना है. इस योजना के बाद देश का कारोबारी स्तर किस गति से बढ़ेगा, इस पर फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन यह यदि ईमानदार पहल है तो इस केंद्र को कंपनियों के कौल सैंटर की तुलना में कुछ अलग बनाना पड़ेगा.

कंपनियों के कौल सैंटर में शिकायत के बाद समस्या का समाधान नहीं होता है. कारण पूछो तो रटारटाया जवाब मिलता है, ‘शिकायत फौरवर्ड कर दी गई है’. शिकायत पर कार्यवाही हो रही है या नहीं, इस के लिए शिकायतकर्ता अंधेरे में रहता है. अच्छा होगा कि कौर्पोरेट सेवा केंद्र पर शिकायत पर की जा रही कार्यवाही की प्रगति की भी सूचना हो. आवश्यक टैलीफोन नंबर और पता मिल सके तो ज्यादा बेहतर होगा. यदि यह केंद्र भी मशीन बन कर काम करेगा तो लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकेगा.