कहते हैं न कि कितने ही ऊटपटांग काम कर के तरक्की पा लीजिए लेकिन आखिरकार दूध का दूध और पानी का पानी वाली स्थिति आ ही जाती है.  हाल ही में ब्रिटेन के रिटेल बाजार से खबर आई है कि वहां दूध के पाउडर की मांग तेजी से बढ़ी है. पाउडर जैसे ही स्टौल पर आता है, देखते ही देखते बिक जाता है. इस की खरीद बड़े पैमाने पर हो रही है. स्टोर खाली हो रहे हैं. इस स्थिति से निबटने के लिए विक्रेताओं ने दूध पाउडर बेचने की सीमा तय कर दी और एक ग्राहक को सीमित स्तर पर ही पाउडर देना शुरू कर दिया. जांचपड़ताल पर जल्द ही पता चल गया कि चीनी दूध पाउडर के सब से बड़े ग्राहक बन गए हैं. इस की वजह चीनी दूध निर्माता कंपनियों से उठा उन का विश्वास है.

चीन में जो दूध पाउडर बन रहा है वह खतरनाक है और हाल ही में इस के सेवन से 6 शिशुओं की मौत हुई है. इस से पहले चीन में 2008 में पाउडर दूध के सेवन से 3 लाख शिशु बीमार पड़े थे. चीन में मध्यवर्गीय परिवारों की संख्या तेजी से बढ़ी है और इस से कामकाजी महिलाओं की संख्या में बड़ा इजाफा हो रहा है. ऐसी स्थिति में शिशु के लिए पाउडर दूध ही सब से अच्छा आहार है और इस की खपत चीन में बहुत अधिक है लेकिन हाल की घटना से वहां संकट पैदा हो गया है और विदेशों से तेजी से दूध पाउडर मंगाया जा रहा है.

चीन के लोग अपने दूध निर्माताओं की हेराफेरी समझ गए हैं. चिंतनीय यह भी है कि चीन का यह दूध भारतीय बाजार में आ सकता है. भारतीय उपभोक्ता सस्ते के चक्कर में शिशु की जान की परवा किए बिना इस दूध पर लपक सकते हैं. इसलिए सरकार को इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने चाहिए.