विज्ञापन आज विपणन का अहम हिस्सा बन गया है. बाजार की जरूरत के उत्पाद और फिर उन के लिए बाजार बनाने का काम अब विज्ञापनों के हवाले हो गया है. विज्ञापनों द्वारा उत्पादों का बाजार तैयार किया जा रहा है. बाजार की इस स्थिति को देखते हुए कंपनियों ने उत्पाद से ज्यादा ध्यान विज्ञापनों पर केंद्रित कर दिया है. कई बार लगता है कि उत्पाद में वह गुणवत्ता बिलकुल नहीं है जिस का गुणगान उस के विज्ञापन में किया गया है. उपभोक्ता विज्ञापन के आधार पर वस्तुएं खरीद रहा है, इसलिए उद्योगों के साथ ही विज्ञापन भी बड़े उद्योग के रूप में पनपा है. उन्हीं विज्ञापनों के सहारे हमें अखबार सस्ते मिल रहे हैं और कम पैसे में ज्यादा चैनल देखने को मिल रहे हैं.

इसी क्रम में जो अखबार ज्यादा बिकता है अथवा जो न्यूज चैनल ज्यादा देखा जाता है, उस के लिए विज्ञापन दर भी ज्यादा होती है. कंपनियां एक ही विज्ञापन के सहारे ज्यादा उपभोक्ताओं तक पहुंचना चाहती हैं. इस दौड़ में कई कंपनियां भ्रामक विज्ञापन भी बना रही हैं. अपने उत्पाद को विज्ञापन में ज्यादा गुणवत्ता के साथ पेश किया जा रहा है, जिस से उपभोक्ता लुटता है. उपभोक्ता के साथ धोखा नहीं हो, इस के लिए सरकार ने हाल ही में भ्रामक विज्ञापनों की शिकायत के लिए एक पोर्टल शुरू किया है. पोर्टल पर वित्तीय सेवाएं, आवास, कृषि उत्पाद आदि की शिकायत दर्ज की जा सकती है. उत्पादों की पैकेजिंग पर भी यदि गलत सूचना दी गई है तो इस की भी शिकायत दर्ज की जा सकती है. इस में भ्रामक विज्ञापनों पर नजर रखने वाली संस्था एडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड काउंसिल औफ इंडिया को भी भागीदार बनाया गया है. सरकार पहल तो अच्छी करती है लेकिन उस की पहल ज्यादा दिन तक प्रभावी नहीं रहती है. यह पोर्टल किस दिन दम तोड़ दे, इस का पता किसी को नहीं है. उम्मीद की जानी चाहिए कि यह पोर्टल जनसेवा के लिए उपयोगी साबित होगा.

 

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