आप कामकाजी महिला हैं, यदि बच्चा गोद लेने की सोच रही हैं और आप को लगता है कि छोटे बच्चे के घर पर आने से उस की देखभाल में औफिस से छुट्टी नहीं मिलेगी और दिक्कत होगी तो आप गलत सोच रही हैं. बच्चा गोद लेने के बाद कानूनी स्तर पर आप को वही सुविधाएं मिलेंगी जिन की हकदार एक मां होती है. यह अच्छी पहल है और इस से उन माताओं का सम्मान भी बढे़गा जिन्होंने अपने बुढ़ापे के सहारे के लिए बच्चे को गोद लिया है.

जरूरी यह है कि आप को कानूनी प्रक्रिया पूरी कर के ही यह काम करना पड़ेगा. जैसे ही आप कानून के अनुसार बच्चे को गोद लेती हैं तो आप के नियोक्ता को आप को वही सब सुविधाएं देनी पड़ेंगी जिन की हकदार एक मां होती है. मतलब कि बच्चा गोद लेने के बाद आप को मातृत्व अवकाश मिलेगा और इस दौरान आप का वेतन भी नहीं कटेगा. इतना ही नहीं, यह सुविधा बच्चे के पिता को भी मिलेगी. सुविधा हालांकि उतनी ही होगी जितनी सरकारी स्तर पर दी जा रही है लेकिन आप को यह हक बच्चे का कानूनी पिता बनने के बाद मिल पाएगा.

अब तक यह व्यवस्था सिर्फ सरकारी कार्यालयों में ही थी और सरकारी कर्मचारियों में यह सुविधा खूब चर्चा में रही है लेकिन अब निजी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों ने भी इस को अपना लिया है. निजी क्षेत्र के टाटा समूह, रिलायंस, ब्रिटानिया इंडस्ट्री, आरपीजी समूह, गोदरेज आदि कंपनियां ने यह सुविधा देनी शुरू की है. इन कंपनियों में कर्मचारी को 2 माह के वेतन के साथ मातृत्व अवकाश दिया जाएगा.

कुछ कंपनियां तो इस अवकाश को 8 सप्ताह से बढ़ा कर 16 सप्ताह कर रही हैं और इस दौरान अपने कर्मचारी को पूरा वेतन दे रही हैं. यह मानवीय पहल है और इस का स्वाभाविक रूप से सर्वत्र स्वागत किया जाना चाहिए. इस से बच्चे के प्रति मां का और फिर बच्चे का मां के प्रति ऐसा ही लगाव बढ़ेगा जो एक जन्मदात्री मां का अपने बच्चे के साथ होता है.

यह नितांत असाधारण मानवीय पहल है और सभी निजी क्षेत्र की कंपनियों को इस का पालन करना चाहिए. इस से कर्मचारी में अपने संस्थान के प्रति लगाव बढ़ेगा और वह अपना काम समझ कर संस्थान के साथ जुड़ा रहेगा. निसंदेह ठेका प्रथा से कर्मचारी और संस्थान के बीच की भावनात्मक दूरी बढ़ी है और इस के दुष्परिणाम आने वाले समय में जरूर सामने आएंगे. कर्मचारी और संस्थान जब एकदूसरे के पूरक बनेंगे तो कार्यक्षमता बढ़ेगी और उस का लाभ कर्मचारियों के साथ संस्थान को भी होगा.