सरिता विशेष

शेयर बाजार में उतारचढ़ाव के साथ मजबूती का ही रुख है. रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने बाजार में समय आने पर पैसे की कमी नहीं होने देने के लिए बैंक ब्याज दरों में कोई कटौती नहीं की है. केंद्रीय बैंक ने रेपो और रिजर्व रेपो दर दोनों बढ़ाई हैं. रिजर्व रेपो मतलब वाणिज्यिक बैंकों का जो पैसा रिजर्व बैंक के पास रहता है उस पर ब्याज बढ़ाया गया है और रेपो दर यानी बैंक अपनी नकदी बढ़ाने के लिए जो सिक्यूरिटी रिजर्व बैंक के पास रखते हैं उस की दर भी बढ़ी है. रेपो दर हमेशा रिजर्व रेपो से ज्यादा रहती है.

राजन की नीति का सीधा मतलब है कि नई मुद्रानीति से ऋण दरें कम नहीं होगी. राजन अपने पूर्ववर्ती की राह पर चल रहे हैं. सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी पर 1 प्रतिशत की कटौती का पूर्वानुमान लगाया गया है. वैश्विक रेटिंग एजेंसियों ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी की दर के घटने का अनुमान व्यक्त किया है. ये अनुमान फिच और बार्कलेज जैसी एजेंसियों का है. रुपए में भी बहुत उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ है, हालांकि यह नए गवर्नर की ताजपोशी के बाद से सुधार की तरफ ही रुख किए है.

इन सब विपरीत स्थितियों के बावजूद बाजार में मजबूती है. सितंबर के आखिरी सप्ताह में बाजार में गिरावट रही और सप्ताह के दौरान बाजार 536 अंक लुढ़का जबकि अक्तूबर के पहले सप्ताह बाजार 4 दिन ही खुला लेकिन 1 दिन छोड़ कर शेष दिनों में बाजार में तेजी बनी रही.