देश में निजी क्षेत्र की सब से बड़ी विमानन कंपनी तथा सस्ती दर पर हवाई सेवा देने वाली इंडिगो ने अब दुनिया के आकाश पर नजर टिका दी है. अब वह अंतर्राष्ट्रीय मार्गों पर भी सस्ती दर से विमान सेवा उपलब्ध कराने की क्रांतिकारी योजना पर विचार कर रही है. इस के लिए कंपनी ने देश की सब से बड़ी विमानन कंपनी एयर इंडिया के शेयर खरीदने की पहल शुरू कर दी है.

करोड़ों के घाटे में चल रही एयर इंडिया को सरकार ने निजी हाथों में बेचने का फैसला किया है. इंडिगो ने इस कंपनी को अपने बेड़े में शामिल करने की जरूरी कार्यवाही शुरू कर दी है. हालांकि, कंपनी प्रबंधन का कहना है कि वह एयर इंडिया को पूरी तरह से अधिग्रहीत नहीं करेगी. इस सौदे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कंपनी अंतर्राष्ट्रीय मार्गों पर भी कम दाम पर हवाई सेवा देगी.

इंडिगो का भारतीय वायुमार्ग सेवा पर करीब 40 प्रतिशत हिस्सा है जबकि अंतर्राष्ट्रीय मार्ग पर उस की हिस्सेदारी सिर्फ 3 प्रतिशत है. एयर इंडिया का देश में 14 प्रतिशत तथा अंतर्राष्ट्रीय बाजार में 17 प्रतिशत कब्जा है. सवाल है कि इंडिगो सस्ती दर पर सेवा देने के बावजूद फायदे में है जबकि सारी सुविधाओं से संपन्न एयर इंडिया घाटे में है और निजी हाथों को सौंपा जा रहा है. दरअसल, एयर इंडिया एक दर्पण है जो बताता है कि  हमारी सरकारी मशीनरी कितनी खराब हो चुकी है. उस की लगभग सारी सार्वजनिक सेवाएं नुकसान में हैं जबकि निजी क्षेत्र फलफूल रहा है.

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