अखबारों का यह आंकड़ा देख कर चेहरे पर मुसकान खिलती है कि देश में मोबाइल और इंटरनैट उपभोक्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है. कई राज्य सरकारें छात्रों को लैपटौप बांट रही हैं लेकिन लैपटौप को चार्ज करने के लिए बिजली नहीं दे पा रही हैं. कई पार्टियों ने चुनाव में लोगों को लुभाने के लिए निशुल्क वाईफाई जैसी सुविधा देने के वादे किए और सत्ता में आने के बाद वे नाममात्र के लिए उस का अनुपालन कर रही हैं. बाजार में 4जी तथा 5जी की सुविधा वाले मोबाइल फोन हैं लेकिन हमारे सेवा प्रदाताओं का 3जी सुविधा देने में ही पसीना निकल रहा है. मोबाइल पर नैट है लेकिन उस की गति देख कर चिढ़ पैदा होती है और फिर आप के पास शांत बैठने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता है. बहरहाल, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानी ट्राई ने लोगों की इस परेशानी को समझा है, इसलिए इस संगठन ने इस साल के अंत तक 2 मेगावाट्स प्रति सैकंड की स्पीड से ब्रौडबैंड सेवा उपलब्ध कराने को कहा है. वर्तमान में यह गति 512 केबीपीएस है. उम्मीद की जा रही है कि यदि ब्रौडबैंड सेवा में सुधार होता है तो 2020 तक 60 करोड़ लोग उस सेवा से जुड़ जाएंगे. ट्राई का मानना है कि ढांचागत सुविधा नहीं होगी तो उपभोक्ता को बेहतर सेवा नहीं दी जा सकती. ट्राई ने यह भी सिफारिश की है कि टैलीकौम औपरेटर को इंटरनैट टैरिफ स्कीम के साथ ही अन्य जरूरी सुविधा की अनुमति भी दी जानी चाहिए. उस का कहना है कि पहले से ही कमजोर सेवा सुविधा को बढ़ाने के लिए यदि ढांचागत विकास को महत्त्व नहीं दिया जाता है तो भारत की इंटरनैट रैंकिंग और गिर सकती है. भारत की रैंकिंग इस समय इस क्षेत्र में भूटान और श्रीलंका से भी कम है.

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