सरकार हरेक नागरिक को स्वास्थ्य बीमा के दायरे में लाने के लिए एक महत्त्वाकांक्षी योजना की तैयारी कर रही है. योजना का मकसद देश के हर नागरिक को बिना भेदभाव के स्वास्थ्य बीमा के कवच के दायरे में लाना है और उसे भरोसा दिलाना है कि सरकार दुख की घड़ी में उस के साथ है.

योजना के तहत आने वाले गरीबों को निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जानी है. योजना के क्रियान्वयन होने पर सरकारी अस्पतालों में 50 आवश्यक दवाओं का पैकेज बनाया जाएगा और बीमाधारक व्यक्तियों को इस पैकेज में शामिल दवाएं निशुल्क दी जाएंगी. योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में गरीबों को आयुर्वेदिक, यूनानी, प्राकृतिक चिकित्सा, होम्योपैथी की दवाएं भी निशुल्क दी जाएंगी. स्वास्थ्य बीमा की यह योजना गरीबी की रेखा से नीचे यानी बीपीएल परिवारों के सदस्यों के लिए निशुल्क होगी. योजना को लागू करने की तरकीब सुझाने के लिए चंडीगढ़ मैडिकल स्नातकोत्तर चिकित्सा महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफैसर रणजीत राय चौधरी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया और इस समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है. स्वास्थ्य बीमा जैसी महत्त्वाकांक्षी योजना लोगों में उत्साह पैदा कर रही है. वैसे भी अब तक देश में सिर्फ 25 फीसदी लोग ही स्वास्थ्य बीमा की परिधि में हैं. सरकारी स्तर पर स्वास्थ्य बीमा की योजना नहीं होने के कारण बड़ी आबादी इस से वंचित है.

ये हालात उस स्थिति में हैं जब कहा जाता है कि भारत चिकित्सा पर्यटन के लिहाज से दुनिया का अग्रणी देश बन रहा है. दुनियाभर से बीमार सस्ते और बेहतर इलाज के लिए भारत का रुख कर रहे हैं. देश में निजी अस्पताल तो सचमुच अच्छे हैं लेकिन सरकारी अस्पतालों की हालत बहुत खराब है. इन अस्पतालों का रखरखाव अच्छे बजट के बावजूद बहुत खराब है. वहां अच्छी मशीनें हैं और बहुत उम्दा किस्म के चिकित्सा उपकरण हैं लेकिन वे काम ही नहीं करते हैं. वहां डाक्टर हैं लेकिन इलाज नहीं करते हैं. वहां दवाएं निशुल्क मिलती हैं लेकिन दी नहीं जातीं और अगर दवा मिलती भी हैं तो वे नकली होती हैं. स्वयं डाक्टर ही अपने मरीज को उन दवाओं के सेवन की सलाह नहीं देते हैं. सरकारी अस्पतालों के अधिकांश डाक्टर दवा और जांच के लिए मरीजों को निजी लैब में भेजते हैं और कमीशन खाते हैं. उम्मीद की जानी चाहिए कि स्वास्थ्य बीमा योजना लागू होने से गरीबों को सचमुच राहत मिलेगी.