सरिता विशेष

काले धन को सफेद करने का ग्रहण अब सरकारी संस्थान पर भी लग गया है. काले कारोबार से जुड़े निजी बैंकों से संबंधित खबर मार्च में सार्वजनिक हुई थी और इन बैंकों ने तत्काल अपने अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही कर दी थी. निजी बैंकों को पोल खोलने वाली खोजी नैट सेवा कोबरा पोस्ट डौट कौम ने हाल ही में जारी वीडियो में सनसनीखेज खुलासा किया है जिस में कहा गया है कि सरकारी और निजी क्षेत्र के 23 वित्तीय संस्थान काले धन को सफेद बनाने के अवैध कारोबार में लिप्त हैं.

वित्तीय संस्थान ‘अपने ग्राहक को जानें’ यानी केवाईसी के मानदंडों को पालन किए बगैर और काले धन को बीमा उत्पादों में लगा कर सफेद करने के कारोबार में लिप्त हैं. कोबरा पोस्ट ने जिन बैंकों के नाम दिए हैं उन में सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नैशनल बैंक, बैंक औफ बड़ौदा और केनरा बैंक के साथ ही सरकारी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम के नाम भी शामिल हैं.

वित्त मंत्रालय ने जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध तत्काल कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं. कई सरकारी बैंकों ने कार्यवाही शुरू भी कर दी है. कई अधिकारी व कर्मचारी निलंबित किए जा चुके हैं. इन में बीमा क्षेत्र का एक अधिकारी भी शामिल है. इस के अलावा बैंकों ने 10 अधिकारियों को काम से हटा दिया है और 6 को छुट्टी पर?भेज दिया है व मामले की जांचपड़ताल कर रहे हैं.

सरकार ने तत्परता तो दिखाई है लेकिन यह घटना आम आदमी के लिए बड़ा धोखा बन गई है. आम आदमी की धारणा है कि सरकारी बैंक और जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी धोखा नहीं करते हैं. निजी बैंकों की तुलना में आम आदमी सरकारी बैंकों से ऋण लेना ज्यादा पसंद करता है. उसे विश्वास है कि इन बैंकों में गड़बड़ी नहीं होती है.

हर आदमी सरकारी दूरसंचार सेवा या आम आदमी से जुड़ी अन्य सुविधाओं का लाभ हासिल करना चाहता है लेकिन उन की सर्विस अच्छी नहीं है इसलिए लोग उन से बचना चाहते हैं लेकिन आर्थिक स्तर पर उन्हें भरोसा है कि  सरकारी कंपनियां नियम से काम करती हैं. यही वजह है कि आम आदमी अपना निवेश भी सरकारी संस्थानों में करना पसंद करता है. लेकिन इन संस्थानों में किस तरह का धोखा है, कोबरा पोस्ट के खुलासे के बाद सब की आंखें खुल गई हैं.

लोग कहने लगे हैं कि देश के सरकारी बैंक अब स्विस बैंक की तर्ज पर काम करने लगे हैं. सरकार अपने इन अधिकारियों के खिलाफ कुछ भी कार्यवाही करे लेकिन यह दाग आसानी से धुलने वाला नहीं है. उसे जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए काले धन को सफेद करने के कारणों को बताना होगा और कितनी रकम को काले से सफेद किया गया है, इस का खुलासा करना पड़ेगा. बैंकों का यह कहना हास्यास्पद है कि सरकार की तरफ से जमा लक्ष्य को बढ़ाने का उपाय था इसलिए यह कदम उठाया गया है.