शेयर बाजार के लिए 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजे मानो सौगात ले कर आए. शेयर बाजार का सूचकांक इस अवधि में फिर 21 हजार अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया.

बाजार के जानकारों का कहना है कि यह असर पूरी तरह से चुनाव नतीजों का रहा. इस से रुपया भी मजबूत हो गया. इस से पहले यानी 3 दिसंबर को बाजार गिरावट पर रहा, हालांकि माह की 1 और 2 तारीख को बाजार में तेजी रही. उस की वजह सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी की दर का अनुमान सकारात्मक रहने और आर्थिक विकास का आंकड़ा लगातार दूसरी तिमाही में बढ़ना रहा. नवंबर के आखिरी कारोबारी दिनों में भी बाजार में तेजी रही. वैश्विक स्तर पर अच्छे संकेत रहे और इसी दौरान जापानी शेयर बाजार के 6 माह के उच्चतम स्तर पर पहुंचना इस की वजह रही. इस का बौंबे स्टौक एक्सचेंज यानी बीएसई के सूचकांक पर भी अच्छा असर रहा और बाजार में तेजी का माहौल रहा.

बाजार 2014 के आम चुनाव में केंद्र में स्थायी सरकार और राजनीतिक स्थिरता का पक्षधर है. विकास के लिए राजनीतिक स्थिरता आवश्यक है.