हाल ही में 2 खबरें आई हैं जो बेहद चौंकाने वाली हैं. पहली खबर यह कि विश्व बैंक भारत के 7 गरीब राज्यों को गरीबों का स्तर सुधारने के लिए 20 अरब डौलर देगा. भारत में विश्व बैंक के कंट्री डायरैक्टर ओनो रुल का कहना है कि इन सभी सातों राज्यों में गरीबों का स्तर तेजी से गिर रहा है, इसलिए यह फैसला लिया गया कि इस राशि का

60 प्रतिशत इन राज्यों में राज्य सरकार की विकास योजनाओं पर खर्च किया जाएगा और 30 प्रतिशत राशि इन में जो राज्य ज्यादा गति करेगा उसे दी जाएगी. रुल का कहना है कि इन राज्यों में 2010 में गरीबी का स्तर 29.8 प्रतिशत था जिसे 2030 में 5.5 प्रतिशत के स्तर पर लाए जाने का लक्ष्य रखा गया है. उन का कहना है कि जिन राज्यों के लिए यह पैसा स्वीकृत किया गया है उन में बिहार, छत्तीसगढ़, ?ारखंड, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान शामिल हैं.

दूसरी खबर यह है कि वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने अंधाधुंध कर्जमाफी के लिए बैंकों को फटकार लगाई है और कर्जमाफी के संबंध में रिपोर्ट देने को कहा है. असल में सरकार को संदेह है कि कर्जमाफी की आड़ में करोड़ों रुपए के घोटाले हो रहे हैं. निश्चित रूप से बैंक जो भी कर्ज माफ करेंगे वे सरकार के दिशानिर्देश के बिना संभव नहीं हैं और सरकारी नीति के अनुसार, कर्ज गरीबों व किसानों का ही माफ किया जाना है लेकिन बैंक कई मामलों में उद्योगों व अन्य क्षेत्र के कर्ज को भी माफ कर रहे हैं. यानी गरीब के लिए दी गई मलाई को मिलीभगत से मोटी खाल के लोग चाट रहे हैं.

गौर करने की बात यह है कि गरीब के लिए भेजा गया पैसा कौनकौन खा रहा है. कर्जमाफी का लाभ उसे मिल रहा है या उस के नाम पर कोई अन्य मजे ले रहा है. विश्व बैंक का यह पैसा कितने स्तर तक गरीबी को समाप्त करेगा, यह सुनिश्चित करने के लिए भ्रष्टाचार पर रोक जरूरी है.